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एसएसपी का बयान थोड़ी देर में....

Tue, 11 Jul 2017 10:07 PM IST
Updated Tue, 11 Jul 2017 10:07 PM IST
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पुलिस लापरवाही से रिहान और उसके साथियों को जमानत
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पहासू पुलिस की लापरवाही से नफरत भरा वीडियो वायरल कर दंगा भड़काने वाले रिहान और उसके साथियों को जमानत मिल गई। पुलिस निर्धारित समय के भीतर एक भी आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं कर पाई।

रिहान और सद्दाम को जमानत मिलने के आधार पर अन्य साथियों को भी जमानत मिल गई। इस संबंध में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने पुलिस की लापरवाही के खिलाफ डीएम को पत्र लिखा है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि 25 फरवरी को पहासू के मोहल्ला पठान टोला निवासी रिहान पुत्र इब्बन ने सोशल नेटवर्किंग साइट व्हाट्सएप पर एक आपत्तिजनक वीडियो शेयर किया था। वीडियो वायरल होते ही जिले के लोगों में आक्रोष पैदा हो गया था।
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इस संबंध में पहासू पुलिस की ओर से आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। 28 फरवरी में पुलिस ने रिहान को बुलंदशहर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके दो दिन बाद दो मार्च को वीडियो शूट करने वाले आरोपी सद्दाम को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

इसके कुछ दिन बाद पुलिस ने अन्य आरोपियों नईम, रिजवान, शकील, इमरान और चीना उर्फ इरशाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आईटी एक्ट के इस मामले में पुलिस 60 दिन के भीतर कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं कर पाई।

इसके चलते सिविल जज जूनियर डिविजन खुर्जा ने 22 जून को रिहान को जमानत दे दी। इसके बाद इसी कोर्ट से आठ मई में नईम और रिजवान को जमानत मिल गई। इसके अगले दिन नौ मई को कोर्ट ने सद्दाम को जमानत दे दी।

बाकी तीन शकील, इमरान और चीना उर्फ इरशाद की अपर सत्र न्यायाधीश रमेश चंद गुप्ता ने इस आधार पर जमानत दे दी, कि जिन आरोपियों के बयान के आधार पर इन्हें आरोपी बनाया गया है, उनकी जमानत पहले लोअर कोर्ट से हो चुकी है। पुलिस की इस लापरवाही के खिलाफ एडीजीसी रविंद्र कुमार शर्मा ने डीएम को पत्र लिखा है।

ऐसे हुई चूक
तत्कालीन एसओ पहासू कौशलेंद्र यादव ने शुरुआत में विवेचना की। इसके बाद एसओ किशनपाल सिंह ने विवेचना की। नियम के तहत आईपीसी की धारा-153 ए के तहत पुलिस को केस चलाने के लिए शासन से अनुमति लेनी होती है।

छह मार्च तक विवेचना करने वाले कौशलेंद्र यादव ने शासन से अनुमति के लिए डीएम को पत्र ही नहीं लिखा। जबकि आरोपियों की गिरफ्तारी के फौरन बाद ही पत्र लिख देना चाहिए था।

रिहान के खिलाफ चार्जशीट पेश करने का समय निकलने के बाद 30 अप्रैल को दूसरे विवेचक केपी सिंह ने एसएसपी के माध्यम से डीएम को एक पत्र लिखकर शासन से केस चलाने की अनुमति मांगी। पुलिस चार्जशीट पेश नहीं कर सकी और एक-एक कर आरोपी कोर्ट से जमानत लेते गए।


शकील, इमरान और चीना उर्फ इरशाद की अपर सत्र न्यायाधीश रमेश चंद गुप्ता ने 10 जुलाई को इस आधार पर जमानत दे दी, कि जिन आरोपियों के बयान के आधार पर इन्हें आरोपी बनाया गया है, उनकी जमानत पहले ही लोअर कोर्ट से हो चुकी है।

कोर्ट ने तथ्य एवं परिस्थितियों को देखते हुए बिना गुण-दोष पर विचार किए कानून के तहत आरोपियों को जमानत दे दी।
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