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दहेज हत्या के आरोपी पति को आजीवन कारावास
Updated Wed, 05 Jul 2017 10:19 PM IST
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दहेज हत्या के पति को आजीवन कारावास
दहेज नहीं मिलने पर विवाहिता की हत्या के वाले पति को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उसपर आजीवन कारावास के साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता इकबाल अहमद ने बताया कि सीताराम निवासी गांव रमपुरा थाना शिकारपुर ने 26 सितंबर 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि उसकी बहन रश्मि का विवाह गांव जटपुरा निवासी मनीष के साथ हुआ था।
शादी के बाद से ही मनीष अतिरिक्त दहेज के लिए रश्मि का शोषण करता था। बाइक के लिए रश्मि के साथ मारपीट की जाती थी। 26 सितंबर को सूचना मिली कि रश्मि की मौत हो गई है। जब हम रश्मि की ससुराल जटपुरा पहुंचे तो वह मृत जमीन पर पड़ी थी।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की। तत्कालीन सीओ श्रेष्ठा ठाकुर ने आईपीसी की धारा 498ए, 304बी तथा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत कोर्ट में चार्जशीट पेश की। मामला एडीजे (फास्ट ट्रैक कोर्ट) प्रथम हुसैन अहमद के समक्ष चल रहा था।
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मृतका के पिता वीरपाल सिंह, माता योगेंद्री आदि अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों ने न्यायाधीश के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। तमाम गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अवलोकन कर न्यायाधीश ने मनीष को रश्मि की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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दहेज नहीं मिलने पर विवाहिता की हत्या के वाले पति को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उसपर आजीवन कारावास के साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता इकबाल अहमद ने बताया कि सीताराम निवासी गांव रमपुरा थाना शिकारपुर ने 26 सितंबर 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि उसकी बहन रश्मि का विवाह गांव जटपुरा निवासी मनीष के साथ हुआ था।
शादी के बाद से ही मनीष अतिरिक्त दहेज के लिए रश्मि का शोषण करता था। बाइक के लिए रश्मि के साथ मारपीट की जाती थी। 26 सितंबर को सूचना मिली कि रश्मि की मौत हो गई है। जब हम रश्मि की ससुराल जटपुरा पहुंचे तो वह मृत जमीन पर पड़ी थी।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की। तत्कालीन सीओ श्रेष्ठा ठाकुर ने आईपीसी की धारा 498ए, 304बी तथा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत कोर्ट में चार्जशीट पेश की। मामला एडीजे (फास्ट ट्रैक कोर्ट) प्रथम हुसैन अहमद के समक्ष चल रहा था।
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मृतका के पिता वीरपाल सिंह, माता योगेंद्री आदि अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों ने न्यायाधीश के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। तमाम गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अवलोकन कर न्यायाधीश ने मनीष को रश्मि की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।