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मॉकड्रिल में परखीं तैयारियां, 10 मिनट में बच्चे को मिला उपचार
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मॉकड्रिल के दौरान जांच करते चिकित्सक।
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मॉकड्रिल में परखीं तैयारियां, 10 मिनट में बच्चे को मिला उपचार
बुलंदशहर। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाव की तैयारियां जानने के लिए शुक्रवार को जिले के पांचों कोविड अस्पताल में मॉकड्रिल हुई। मॉकड्रिल के दौरान एंबुलेंस से एक बच्चे को अस्पताल लाया गया। बच्चे के आते ही स्टाफ स्ट्रेचर और ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर पहुंचे। फिर बच्चे को बेड तक ले जाया गया। दस मिनट के भीतर बच्चे का उपचार शुरू हो गया। इस दौरान नोडल अधिकारी स्याना कोविड अस्पताल के संसाधनों से रूबरू हुए। इसके साथ ही जिले में स्थापित चार अन्य पीकू वार्ड (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) में भी मॉकड्रिल का आयोजन हुआ, जहां जिले के स्वास्थ्य अफसरों द्वारा तैयारियों को परखा गया।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर जिले में जटिया चिकित्सालय खुर्जा, संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, 100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई और स्याना व शिकारपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कोविड अस्पताल बनाया गया है। पांचों कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगने के साथ अन्य संसाधन जुटाए जा चुके हैं और तीन बार मॉकड्रिल का आयोजन किया जा चुका है। पहले और दूसरे मॉकड्रिल में मिली खामियों के बाद तीसरी में खामियां न मिलने पर सभी ने राहत की सांस ली। अब दोबारा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें रिस्पांस टाइम भी चेक किया गया। शासन की गाइड लाइन के अनुसार, मरीज को भर्ती करने से लेकर इलाज मिलने तक करीब 10 मिनट का समय लगना चाहिए।
सीन एक - स्याना सीएचसी
स्याना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शासन से नामित नोडल अधिकारी आरएफपीटीसी मेरठ के प्रधानाचार्य डॉ. पीपी सिंह ने एसीएमओ डॉ. अश्वनी भंडारी के साथ आइसोलेशन, एचडीयू, वेंटिलेटर, एनआईसीयू और पीआईसीयू की आदि को देखा। इस दौरान एक डमी मरीज को भर्ती कर उसके उपचार को लेकर प्रक्रिया करके दिखाई गई। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट को चार घंटे लगातार चलाकर उसकी क्षमता को परखा।
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सीन दो - खुर्जा चिकित्सालय
खुर्जा जटिया चिकित्सालय में बने पीकू वार्ड का जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने विशेषज्ञ चिकित्सकों संग तैयारियों को परखा गया। मॉकड्रिल के दौरान एक स्वास्थ्य कर्मी को मरीज बनाकर एंबुलेंस से लाया गया। पीकू वार्ड में मरीज का ऑक्सीजन स्तर के साथ, हृदय जांच, बीपी और फेफड़ों आदि की जांच की गई। इसके बाद मरीज को वेंटिलेटर पर भी शिफ्ट किया गया। मॉकड्रिल में सीएमएस डॉ. अजीत बाबा, डॉ. दिनेश कुमार और दो बाल रोग विशेषज्ञ, एक एनेस्थेटिस्ट और एक फिजीशियन शामिल रहे।
सीन तीन - राजकीय चिकित्सालय डिबाई
100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सीपीएस गौतम द्वारा तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया करवाई गई। एंबुलेंस से डमी मरीज पहुंचा। जांच में बुखार के साथ ही ऑक्सीजन लेबल कम होने पर उसे ऑक्सीजन मॉस्क लगाने के बाद स्ट्रेचर से पीआईसीयू में पहुंचाया गया। यहां तत्काल उसका इलाज शुरू कर दिया गया।
सीन चार - सिकंदराबाद संयुक्त चिकित्सालय
संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद का डिप्टी सीएमओ डॉ. बलराज ने निरीक्षण कर मॉकड्रिल का जायजा लिया। मॉकड्रिल के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए मरीजों का उपचार करने के निर्देश दिए गए। मॉकड्रिल में मरीज को भर्ती करने से लेकर उपचार करने की प्रक्रिया की गई।
मॉकड्रिल के दौरान नोडल अधिकारी ने ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में जानकारी लेने के साथ एक कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया। मॉकड्रिल में मरीज के आने पर उसे तुरंत उपचार दिलाने की प्रक्रिया करवाई गई, जिससे संभावित तीसरी लहर आने पर मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
- डॉ. अश्वनी भंडारी, एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी
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बुलंदशहर। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाव की तैयारियां जानने के लिए शुक्रवार को जिले के पांचों कोविड अस्पताल में मॉकड्रिल हुई। मॉकड्रिल के दौरान एंबुलेंस से एक बच्चे को अस्पताल लाया गया। बच्चे के आते ही स्टाफ स्ट्रेचर और ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर पहुंचे। फिर बच्चे को बेड तक ले जाया गया। दस मिनट के भीतर बच्चे का उपचार शुरू हो गया। इस दौरान नोडल अधिकारी स्याना कोविड अस्पताल के संसाधनों से रूबरू हुए। इसके साथ ही जिले में स्थापित चार अन्य पीकू वार्ड (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) में भी मॉकड्रिल का आयोजन हुआ, जहां जिले के स्वास्थ्य अफसरों द्वारा तैयारियों को परखा गया।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर जिले में जटिया चिकित्सालय खुर्जा, संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, 100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई और स्याना व शिकारपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कोविड अस्पताल बनाया गया है। पांचों कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगने के साथ अन्य संसाधन जुटाए जा चुके हैं और तीन बार मॉकड्रिल का आयोजन किया जा चुका है। पहले और दूसरे मॉकड्रिल में मिली खामियों के बाद तीसरी में खामियां न मिलने पर सभी ने राहत की सांस ली। अब दोबारा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें रिस्पांस टाइम भी चेक किया गया। शासन की गाइड लाइन के अनुसार, मरीज को भर्ती करने से लेकर इलाज मिलने तक करीब 10 मिनट का समय लगना चाहिए।
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सीन एक - स्याना सीएचसी
स्याना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शासन से नामित नोडल अधिकारी आरएफपीटीसी मेरठ के प्रधानाचार्य डॉ. पीपी सिंह ने एसीएमओ डॉ. अश्वनी भंडारी के साथ आइसोलेशन, एचडीयू, वेंटिलेटर, एनआईसीयू और पीआईसीयू की आदि को देखा। इस दौरान एक डमी मरीज को भर्ती कर उसके उपचार को लेकर प्रक्रिया करके दिखाई गई। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट को चार घंटे लगातार चलाकर उसकी क्षमता को परखा।
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सीन दो - खुर्जा चिकित्सालय
खुर्जा जटिया चिकित्सालय में बने पीकू वार्ड का जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने विशेषज्ञ चिकित्सकों संग तैयारियों को परखा गया। मॉकड्रिल के दौरान एक स्वास्थ्य कर्मी को मरीज बनाकर एंबुलेंस से लाया गया। पीकू वार्ड में मरीज का ऑक्सीजन स्तर के साथ, हृदय जांच, बीपी और फेफड़ों आदि की जांच की गई। इसके बाद मरीज को वेंटिलेटर पर भी शिफ्ट किया गया। मॉकड्रिल में सीएमएस डॉ. अजीत बाबा, डॉ. दिनेश कुमार और दो बाल रोग विशेषज्ञ, एक एनेस्थेटिस्ट और एक फिजीशियन शामिल रहे।
सीन तीन - राजकीय चिकित्सालय डिबाई
100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सीपीएस गौतम द्वारा तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया करवाई गई। एंबुलेंस से डमी मरीज पहुंचा। जांच में बुखार के साथ ही ऑक्सीजन लेबल कम होने पर उसे ऑक्सीजन मॉस्क लगाने के बाद स्ट्रेचर से पीआईसीयू में पहुंचाया गया। यहां तत्काल उसका इलाज शुरू कर दिया गया।
सीन चार - सिकंदराबाद संयुक्त चिकित्सालय
संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद का डिप्टी सीएमओ डॉ. बलराज ने निरीक्षण कर मॉकड्रिल का जायजा लिया। मॉकड्रिल के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए मरीजों का उपचार करने के निर्देश दिए गए। मॉकड्रिल में मरीज को भर्ती करने से लेकर उपचार करने की प्रक्रिया की गई।
मॉकड्रिल के दौरान नोडल अधिकारी ने ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में जानकारी लेने के साथ एक कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया। मॉकड्रिल में मरीज के आने पर उसे तुरंत उपचार दिलाने की प्रक्रिया करवाई गई, जिससे संभावित तीसरी लहर आने पर मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
- डॉ. अश्वनी भंडारी, एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी