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एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए 55 हजार, डीएम से की शिकायत
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एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए 55 हजार, डीएम से की शिकायत
बुलंदशहर। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के नाम पर ठगी करने वाले एक गैंग की शिकायत नोएडा निवासी शीतल चौधरी ने की है। ट्विटर पर डीएम अलीगढ़ चंद्रभूषण सिंह ने रीट्वीट कर जांच बैठाने की बात कही है। पीड़िता का आरोप है कि उसके भाई के इलाज के लिए अलीगढ़ स्थित इकरा कॉलोनी के आईएसएच व आईटी हास्पिटल में ऑक्सीजन सुविधा के बिना लाखों रुपये मांगे गए। एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक ने 55 हजार रुपये ऐंठ लिए। दिनभर मरीज परेशान रहा तो शीतल भाई को बुलंदशहर लेकर पहुंची। जहां इलाज तो शुरू हुआ, लेकिन, अगले दिन उपचार के दौरान उसके भाई की मौत हो गई।
नोएडा निवासी शीतल चौधरी ने बताया कि अनूपशहर तहसील के राजौर गांव निवासी विपिन उर्फ विपेंद्र सिंह उनका भाई है। जबकि, सिकंदराबाद के शेखूपुर गांव निवासी सुभाष सिंह उनके जीजा हैं। 24-25 अप्रैल को जीजा सुभाष सिंह की तबियत खराब हुई तो नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया। कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर यहां इलाज के लिए मना कर दिया गया। अलीगढ़ के एक अस्पताल में नर्स का काम कर रही पड़ोसी गांव की युवती ने फोन कर बताया कि अलीगढ़ में वेंटिलेटर मिल जाएगा, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। उसकी व्यवस्था मेरा भाई करा देगा। तुम अलीगढ़ आ जाओ। शीतल ने वीडियो में बताया कि युवती को पहले से जानती थीं तो अलीगढ़ इलाज को तैयार हुईं। शीतल ने युवती से कहा कि वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस सिकंदराबाद में नहीं मिल रही है। इस पर युवती ने अपने भाई की मदद से 50 हजार रुपये में एंबुलेंस भिजवाई। जीजा की तबीयत ज्यादा खराब थी तो उन्हें वेंटिलेटर पर और भाई को बाईपैप पर लाने का निर्णय लिया गया। एंबुलेंस चालक ने कहा कि 50 हजार अलीगढ़ तक और 50 हजार रुपये बुलंदशहर तक होते हैं। एक लाख रुपये दो, तभी मरीज लेकर चलूंगा।
शीतल का आरोप है कि 55 हजार रुपये देने पर बड़ी देर बाद एंबुलेंस चालक राजी हुआ। बुलंदशहर के लक्ष्मी हास्पिटल में भर्ती कराने के बाद शीतल के साथियों ने हंगामा किया तो एंबुलेंस चालक पुलिस के आने के डर से 20 हजार रुपये वापस कर दिए। इसके बाद पांच तारीख की रात को भाई ने दम तोड़ दिया।
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बुलंदशहर। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के नाम पर ठगी करने वाले एक गैंग की शिकायत नोएडा निवासी शीतल चौधरी ने की है। ट्विटर पर डीएम अलीगढ़ चंद्रभूषण सिंह ने रीट्वीट कर जांच बैठाने की बात कही है। पीड़िता का आरोप है कि उसके भाई के इलाज के लिए अलीगढ़ स्थित इकरा कॉलोनी के आईएसएच व आईटी हास्पिटल में ऑक्सीजन सुविधा के बिना लाखों रुपये मांगे गए। एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक ने 55 हजार रुपये ऐंठ लिए। दिनभर मरीज परेशान रहा तो शीतल भाई को बुलंदशहर लेकर पहुंची। जहां इलाज तो शुरू हुआ, लेकिन, अगले दिन उपचार के दौरान उसके भाई की मौत हो गई।
नोएडा निवासी शीतल चौधरी ने बताया कि अनूपशहर तहसील के राजौर गांव निवासी विपिन उर्फ विपेंद्र सिंह उनका भाई है। जबकि, सिकंदराबाद के शेखूपुर गांव निवासी सुभाष सिंह उनके जीजा हैं। 24-25 अप्रैल को जीजा सुभाष सिंह की तबियत खराब हुई तो नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया। कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर यहां इलाज के लिए मना कर दिया गया। अलीगढ़ के एक अस्पताल में नर्स का काम कर रही पड़ोसी गांव की युवती ने फोन कर बताया कि अलीगढ़ में वेंटिलेटर मिल जाएगा, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। उसकी व्यवस्था मेरा भाई करा देगा। तुम अलीगढ़ आ जाओ। शीतल ने वीडियो में बताया कि युवती को पहले से जानती थीं तो अलीगढ़ इलाज को तैयार हुईं। शीतल ने युवती से कहा कि वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस सिकंदराबाद में नहीं मिल रही है। इस पर युवती ने अपने भाई की मदद से 50 हजार रुपये में एंबुलेंस भिजवाई। जीजा की तबीयत ज्यादा खराब थी तो उन्हें वेंटिलेटर पर और भाई को बाईपैप पर लाने का निर्णय लिया गया। एंबुलेंस चालक ने कहा कि 50 हजार अलीगढ़ तक और 50 हजार रुपये बुलंदशहर तक होते हैं। एक लाख रुपये दो, तभी मरीज लेकर चलूंगा।
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शीतल का आरोप है कि 55 हजार रुपये देने पर बड़ी देर बाद एंबुलेंस चालक राजी हुआ। बुलंदशहर के लक्ष्मी हास्पिटल में भर्ती कराने के बाद शीतल के साथियों ने हंगामा किया तो एंबुलेंस चालक पुलिस के आने के डर से 20 हजार रुपये वापस कर दिए। इसके बाद पांच तारीख की रात को भाई ने दम तोड़ दिया।
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