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Bulandshahar News: अब कोरोना संक्रमित की होगी जीनोम सीक्वेंसिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण की जिले में रफ्तार बढ़ने पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग अब गंभीर मरीजों का सैंपल लेकर जीनोम सीक्वेंसिंग करा रहा है। 25 मार्च से 12 अप्रैल तक मिले कोरोना संक्रमित में 20 लोगों की सीटी वैल्यू कम मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार सीटी वैल्यू कम आने पर मरीज में वेरिएंट के मिलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए संबंधित मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग जांच जरूरी होती है। विभाग की ओर से 20 लोगों का सैंपल लेकर लखनऊ जांच के लिए भेज दिया है।
जिले में 25 मार्च से कोरोना संक्रमण के मामले दिन-प्रतिदिन मिल रहे हैं। हालांकि अभी तक पांच से आठ मरीजों को ही कोविड अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। शेष होम आइसोलेट में रहे। चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमित कुमार कोरोना संक्रमण के नए स्वरूप को देखते हुए शासन ने जीनोम सीक्वेंसिंग कराने के निर्देश दिए। ऐसे में जिले में नए संक्रमित की सीटी वैल्यू की भी जांच की जा रही है। जिन मरीजों की सीटी वैल्यू कम होती है उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। वहीं, सीटी वैल्यू अधिक होने पर मरीज की स्थिति गंभीर नहीं मानी जाती है। जीनोम सीक्वेंसिंग जांच से पता चलता है कि वायरस कैसा है। ओमिक्रॉन या डेल्टा वेरिएंट की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग जांच की जाती है, जो सीटी वैल्यू 25 से कम होने पर होती है। पिछले दिनों 12 अप्रैल तक जिन मरीजों की सीटी वैल्यू कम आई उनकी जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपल लेकर केजीएमयू लखनऊ भेजा गया है।
कोट
कोरोना संक्रमित जिन मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम आ रही है, उनके नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे जा रहे हैं। अभी 20 मरीजों का सैंपल लेकर लखनऊ जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए भेजा है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण की जिले में रफ्तार बढ़ने पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग अब गंभीर मरीजों का सैंपल लेकर जीनोम सीक्वेंसिंग करा रहा है। 25 मार्च से 12 अप्रैल तक मिले कोरोना संक्रमित में 20 लोगों की सीटी वैल्यू कम मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार सीटी वैल्यू कम आने पर मरीज में वेरिएंट के मिलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए संबंधित मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग जांच जरूरी होती है। विभाग की ओर से 20 लोगों का सैंपल लेकर लखनऊ जांच के लिए भेज दिया है।
जिले में 25 मार्च से कोरोना संक्रमण के मामले दिन-प्रतिदिन मिल रहे हैं। हालांकि अभी तक पांच से आठ मरीजों को ही कोविड अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। शेष होम आइसोलेट में रहे। चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमित कुमार कोरोना संक्रमण के नए स्वरूप को देखते हुए शासन ने जीनोम सीक्वेंसिंग कराने के निर्देश दिए। ऐसे में जिले में नए संक्रमित की सीटी वैल्यू की भी जांच की जा रही है। जिन मरीजों की सीटी वैल्यू कम होती है उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। वहीं, सीटी वैल्यू अधिक होने पर मरीज की स्थिति गंभीर नहीं मानी जाती है। जीनोम सीक्वेंसिंग जांच से पता चलता है कि वायरस कैसा है। ओमिक्रॉन या डेल्टा वेरिएंट की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग जांच की जाती है, जो सीटी वैल्यू 25 से कम होने पर होती है। पिछले दिनों 12 अप्रैल तक जिन मरीजों की सीटी वैल्यू कम आई उनकी जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपल लेकर केजीएमयू लखनऊ भेजा गया है।
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कोरोना संक्रमित जिन मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम आ रही है, उनके नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे जा रहे हैं। अभी 20 मरीजों का सैंपल लेकर लखनऊ जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए भेजा है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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