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लालू के दामाद समेत पांच महारथियों को मिली शिकस्त
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लालू के दामाद समेत पांच महारथियों को मिली शिकस्त
बुलंदशहर। इस बार विधानसभा चुनाव में कई महारथियों को हार का सामना करना पड़ा। लालू यादव के दामाद राहुल यादव के अलावा पूर्व मंत्री समेत चार पूर्व विधायकों को भी शिकस्त झेलनी पड़ी।
विधानसभा चुनाव से पहले जब प्रत्याशियों की घोषणा हुई तो कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी। सिकंदराबाद सीट से सपा के टिकट पर एक बार फिर से लालू यादव के दामाद राहुल यादव मैदान में थे। इस बार उम्मीद थी कि रालोद से गठबंधन होने के कारण जीत आसान होगी, लेकिन इस बार भी उनके सपनों को झटका लगा। हालांकि जिले में वह इकलौते दिग्गज नहीं हैं, जिनके सपनों को झटका लगा है। सपा सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री और छह बार विधायक रहे किरनपाल सिंह को राजनैतिक तौर पर जिंदा करने के लिए यह चुनाव अहम माना जा रहा था। जिसके चलते पार्टी के नेता उन्हें जिताने के लिए पूरा जोर लगा रहे थे। भाजपा प्रत्याशी से मिली हार ने उनके भी अरमानों को तोड़ दिया। अनूपशहर से बसपा के टिकट पर दो बार विधायक गजेंद्र सिंह भी इस चुनाव को आखिरी चुनाव मानकर चल रहे थे, लेकिन टिकट न मिलने से वह रालोद से बागी हुए और कांग्रेस में पनाह तलाशी, लेकिन कांग्रेस भी उनके अरमानों को पूरा करने में सफल नहीं हुई।
स्याना और खुर्जा के पूर्व विधायक भी हुए फेल
स्याना से कांग्रेस के पूर्व विधायक दिलनवाज खान और खुर्जा से कांग्रेस के पूर्व विधायक बंशी पहाड़िया का दूसरी बार विधानसभा पहुंचने का सपना पूरा नहीं हो सका। दिलनवाज खान को उम्मीद थी कि रालोद और सपा के गठबंधन के साथ किसान आंदोलन का फायदा उठाकर वह किसान मतदाताओं को रिझा लेंगे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। जबकि खुर्जा के पूर्व विधायक बंशी पहाड़िया को उम्मीद थी कि भाजपा के खिलाफ जनता में नाराजगी है, जिससे परेशानी और बढ़ रही है।
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बुलंदशहर। इस बार विधानसभा चुनाव में कई महारथियों को हार का सामना करना पड़ा। लालू यादव के दामाद राहुल यादव के अलावा पूर्व मंत्री समेत चार पूर्व विधायकों को भी शिकस्त झेलनी पड़ी।
विधानसभा चुनाव से पहले जब प्रत्याशियों की घोषणा हुई तो कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी। सिकंदराबाद सीट से सपा के टिकट पर एक बार फिर से लालू यादव के दामाद राहुल यादव मैदान में थे। इस बार उम्मीद थी कि रालोद से गठबंधन होने के कारण जीत आसान होगी, लेकिन इस बार भी उनके सपनों को झटका लगा। हालांकि जिले में वह इकलौते दिग्गज नहीं हैं, जिनके सपनों को झटका लगा है। सपा सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री और छह बार विधायक रहे किरनपाल सिंह को राजनैतिक तौर पर जिंदा करने के लिए यह चुनाव अहम माना जा रहा था। जिसके चलते पार्टी के नेता उन्हें जिताने के लिए पूरा जोर लगा रहे थे। भाजपा प्रत्याशी से मिली हार ने उनके भी अरमानों को तोड़ दिया। अनूपशहर से बसपा के टिकट पर दो बार विधायक गजेंद्र सिंह भी इस चुनाव को आखिरी चुनाव मानकर चल रहे थे, लेकिन टिकट न मिलने से वह रालोद से बागी हुए और कांग्रेस में पनाह तलाशी, लेकिन कांग्रेस भी उनके अरमानों को पूरा करने में सफल नहीं हुई।
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स्याना और खुर्जा के पूर्व विधायक भी हुए फेल
स्याना से कांग्रेस के पूर्व विधायक दिलनवाज खान और खुर्जा से कांग्रेस के पूर्व विधायक बंशी पहाड़िया का दूसरी बार विधानसभा पहुंचने का सपना पूरा नहीं हो सका। दिलनवाज खान को उम्मीद थी कि रालोद और सपा के गठबंधन के साथ किसान आंदोलन का फायदा उठाकर वह किसान मतदाताओं को रिझा लेंगे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। जबकि खुर्जा के पूर्व विधायक बंशी पहाड़िया को उम्मीद थी कि भाजपा के खिलाफ जनता में नाराजगी है, जिससे परेशानी और बढ़ रही है।
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