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यूक्रेन से सात और छात्र लौटे घर, परिवार में खुशी का माहौल
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यूक्रेन से लौटी गांव खालौर की छात्रा निहारिका अपनी मां के साथ।
- फोटो : BULANDSHAHR
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यूक्रेन से सात और छात्र लौटे घर, परिवार में खुशी का माहौल
बुलंदशहर/शिकारपुर/जहांगीराबाद। यूक्रेन में फंसे जिले के सात और छात्र शनिवार को घर वापस लौट आए। उनके पहुंचने पर परिवार में खुशी का माहौल है। अभी तक यूक्रेन से 25 छात्र लौट आए हैं। जबकि शेष का अभी आने का इंतजार है। वापस लौटे छात्रों ने बताया कि धमाकों की आवाज डरा थी तो हर तरफ भयानक मंजर था। घर लौटने तक का सफर किसी मुसीबत से कम नहीं रहा।
नगर के अनूपशहर बस अड्डा क्षेत्र निवासी शान मोहम्मद अली शनिवार यूक्रेन से वापस लौटा। उसके पिता हाजी शकील व परिजनों ने उसके लौटने पर राहत की सांस ली। शान ने बताया कि यूक्रेन में धमाकों की आवाज डरा रही थी। बस यही आस थी कि जल्द से जल्द घर लौट जाएं। कीव से अपने साथियों के साथ एक मार्च को ट्रेन में सवार होकर टर्नोपिल पहुंचा और वहां से सिलोवाटिका पहुंचा। जहां पर तीन किलोमीटर पैदल चला और फिर बस से एक होटल ले जाया गया। जहां से भारत के लिए भेजा गया। गांव खालौर निवासी रवि कुमार की पुत्री निहारिका भी घर वापस लौट आई है। उसने बताया कि रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने के लिए 17 से 18 घंटे पैदल चले और वहां से जब भारत के लिए जहाज में सवार हुई तो राहत की सांस ली। निहारिका ने भारत सरकार की सराहना की है। वहीं, दूसरी ओर नगर के मोहल्ला मूर्ति विहार निवासी और अनाज मंडी में आढ़ती मनोज शर्मा का पुत्र नितिन शर्मा शुक्रवार की देर शाम शिकारपुर पहुंचा। उसके घर पहुंचने पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। नितिन ने बताया की बमबारी के बाद वह बहुत सहमे हुए थे और बंकर में छुपे थे। रोमानिया के रास्ते फ्लाइट पकड़कर मुंबई पहुंचे। जहां से फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। जहांगीराबाद निवासी छात्रा हिमांतिका चौहान भी घर लौट आई है। घर पहुंचने पर छात्रा के अभिभावक भावुक हो गए। हिमांतिका ने बताया कि मैं इवानो में फंसी थी। 15 किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया पहुंची। उसके बाद भारत लौटी। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है। वहीं छात्रा का भाजपा जिला मंत्री संजय चौधरी और किसान मोर्चा के जिला महामंत्री भूपेंद्र रावल ने घर जाकर हौसला बढ़ाया।
मौत के मुंह से निकलकर आया हूं: आरिफ
गुलावठी। खारकीव में दिल दहला देने वाला और तबाही का मंजर है। मैं मौत के मुंह से कैसे जिंदा निकलकर वापस आया है, यह मैं ही जानता हूं। दिन व रात बंकरों में गुजारे हैं और मोबाइल की रोशनी में ही खाना खाया है। यह कहना है कि यूक्रेन के खारकीव में फंसे रहने वाले ग्राम आसिफबाद चंद्रपुरा निवासी एमबीबीएस छात्र आरिफ पुत्र सलीम का। उसने बताया कि गत 11 दिसंबर को ही वह यूक्रेन गया था, परंतु रूस व यूक्रेन के युद्ध में वह फंस गया। करीब 8 दिन तक वह बंकरों में रहा। संवाद
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आंसू, चीख और चीत्कार का शहर बन गया है खारकीव: मो. हंजला
गुलावठी। खारकीव में फंसे रहे मोहल्ला पीरखां निवासी एमबीबीएस छात्र मो. हंजला ने बताया कि खारकीव में हमले बढ़ने के बाद एक मार्च को वह चार गुना किराया देकर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर एक मिसाइल गिरी, जिससे वहां भगदड़ मच गई। उस समय उसका मौत से सामना हुआ था। बॉर्डर पर घंटों लाइन में लगने के बाद वह रोमानिया पहुंचा। शनिवार शाम चार बजे वह घर पहुंचा तो परिजनों में खुशी की लहर छा गया। डॉ.सिराज कुरैशी, हाजी रहीस, साजिद मुनाफ सहित अनेक शुभचिंतकों ने हंजला को फूलमालाएं पहनाकर व बुके देकर स्वागत किया। संवाद
सकुशल लौटा नरौरा का दूसरा छात्र विलय
नरौरा। अणुविहार कालोनी निवासी छात्र विलय कुमार की हंगरी के बुखारेस्ट एयरपोर्ट से भारत सरकार के आपरेशन गंगा के तहत सकुशल वतन वापसी हो गई है। भारत आने के बाद विलय अपनी रिश्तेदारी में बरेली में पहुंच गया है। यूक्रेन में गोलाबारी प्रारंभ होने के बाद भारतीय दूतावास के निर्देशों के अनुसार विलय यूक्रेन-हंगरी बॉर्डर ओर कड़ी मशक्कत के बाद पहुंचे थे। बॉर्डर पार होंने के बाद उन्हें बुखारेस्ट एयरपोर्ट के निकट एक शिविर में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। वह आपरेशन गंगा अभियान के तहत सकुशल वापस लौटे। जिस पर परिजनों ने खुशी जताई है। संवाद
बर्फ को पिघला कर प्यास बुझा रहे भारतीय छात्र
शिकारपुर। यूक्रेन के सूमी राज्य में मेडिकल की पढ़ाई करने गए छात्रों में से शिकारपुर के मोहल्ला चैनपुरा निवासी बीएसएफ के निरीक्षक संजीव शर्मा के पुत्र अनुज कुमार शर्मा ने फोन पर बताया की यहां वह हॉस्टल के बंकर में रह रहे हैं। जहां 700 से अधिक भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। रूस ने पहले दिन ही बमबारी में अपना निशाना बनाया था। रेलवे की लाइन और पुल ध्वस्त कर दिए गए थे। जिससे रेल सेवा बाधित हो चुकी है। रोजाना बमबारी हो रही है। छात्रों को रोमानिया और पोलैंड की सीमा तक पैदल पहुंचने में 22 से 24 घंटे लगेंगे। बमबारी होने के कारण वहां पहुंचना संभव नहीं है, जिसके चलते हम लोग बंकरों में ही शरण लिए हुए हैं। अनुज ने बताया कि 7-8 दिन पूर्व जो भी खाने पीने की चीजें इकट्ठा की गई थी। उसी से अपना काम चला रहे हैं। दो या तीन दिन तक का खाना उनके पास बचा हुआ है। बिजली और पानी की आपूर्ति पहले ही काटी जा चुकी है। प्यास लगने पर बर्फ को इकट्ठा करके किसी तरह पिघलाते हैं और उससे अपनी प्यास बुझा रहे हैं। शनिवार की सुबह 5:30 बजे धमाके की आवाज सुनकर की आंखें खुली थी। सूचना मिली है की भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति के बीच हुई वार्ता के बाद रूस द्वारा सीजफायर की घोषणा की गई है, लेकिन फायरिंग होने के कारण यहां से निकलना संभव नहीं हो पा रहा है। अनुज की मां सीमा शर्मा और बहन डॉ. स्वाति शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूक्रेन के सूमी राज्य में फंसे छात्रों को भारत लाने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है। संवाद
घर वापसी के लिए अनुराग ने पकड़ी फ्लाइट
सिकंदराबाद। पिछले कई दिनों से घर वापसी के लिए स्लोवाकिया स्थित शेल्टर हाउस में फ्लाइट का इंतजार कर रहे अनुराग सैनी शनिवार को फ्लाइट में सवार हो गया। यूक्रेन में फंसा छात्र अभिषेक भाटी, मुकुल गोयल, आकाश सैनी, छात्रा अंजलि नामदेव शुक्रवार तक वापस घर लौट आए थे। जबकि फ्लाइट नहीं मिलने के कारण छात्र अनुराग सैनी घर वापसी के लिए स्लोवाकिया के शेल्टर हाउस में इंतजार कर रहा है। अनुराग के चाचा धनेश्वर सैनी ने बताया कि कई दिनों से वह स्लोवाकिया से फ्लाइट में सवार हो गया है। संवाद
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बुलंदशहर/शिकारपुर/जहांगीराबाद। यूक्रेन में फंसे जिले के सात और छात्र शनिवार को घर वापस लौट आए। उनके पहुंचने पर परिवार में खुशी का माहौल है। अभी तक यूक्रेन से 25 छात्र लौट आए हैं। जबकि शेष का अभी आने का इंतजार है। वापस लौटे छात्रों ने बताया कि धमाकों की आवाज डरा थी तो हर तरफ भयानक मंजर था। घर लौटने तक का सफर किसी मुसीबत से कम नहीं रहा।
नगर के अनूपशहर बस अड्डा क्षेत्र निवासी शान मोहम्मद अली शनिवार यूक्रेन से वापस लौटा। उसके पिता हाजी शकील व परिजनों ने उसके लौटने पर राहत की सांस ली। शान ने बताया कि यूक्रेन में धमाकों की आवाज डरा रही थी। बस यही आस थी कि जल्द से जल्द घर लौट जाएं। कीव से अपने साथियों के साथ एक मार्च को ट्रेन में सवार होकर टर्नोपिल पहुंचा और वहां से सिलोवाटिका पहुंचा। जहां पर तीन किलोमीटर पैदल चला और फिर बस से एक होटल ले जाया गया। जहां से भारत के लिए भेजा गया। गांव खालौर निवासी रवि कुमार की पुत्री निहारिका भी घर वापस लौट आई है। उसने बताया कि रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने के लिए 17 से 18 घंटे पैदल चले और वहां से जब भारत के लिए जहाज में सवार हुई तो राहत की सांस ली। निहारिका ने भारत सरकार की सराहना की है। वहीं, दूसरी ओर नगर के मोहल्ला मूर्ति विहार निवासी और अनाज मंडी में आढ़ती मनोज शर्मा का पुत्र नितिन शर्मा शुक्रवार की देर शाम शिकारपुर पहुंचा। उसके घर पहुंचने पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। नितिन ने बताया की बमबारी के बाद वह बहुत सहमे हुए थे और बंकर में छुपे थे। रोमानिया के रास्ते फ्लाइट पकड़कर मुंबई पहुंचे। जहां से फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। जहांगीराबाद निवासी छात्रा हिमांतिका चौहान भी घर लौट आई है। घर पहुंचने पर छात्रा के अभिभावक भावुक हो गए। हिमांतिका ने बताया कि मैं इवानो में फंसी थी। 15 किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया पहुंची। उसके बाद भारत लौटी। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है। वहीं छात्रा का भाजपा जिला मंत्री संजय चौधरी और किसान मोर्चा के जिला महामंत्री भूपेंद्र रावल ने घर जाकर हौसला बढ़ाया।
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गुलावठी। खारकीव में दिल दहला देने वाला और तबाही का मंजर है। मैं मौत के मुंह से कैसे जिंदा निकलकर वापस आया है, यह मैं ही जानता हूं। दिन व रात बंकरों में गुजारे हैं और मोबाइल की रोशनी में ही खाना खाया है। यह कहना है कि यूक्रेन के खारकीव में फंसे रहने वाले ग्राम आसिफबाद चंद्रपुरा निवासी एमबीबीएस छात्र आरिफ पुत्र सलीम का। उसने बताया कि गत 11 दिसंबर को ही वह यूक्रेन गया था, परंतु रूस व यूक्रेन के युद्ध में वह फंस गया। करीब 8 दिन तक वह बंकरों में रहा। संवाद
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आंसू, चीख और चीत्कार का शहर बन गया है खारकीव: मो. हंजला
गुलावठी। खारकीव में फंसे रहे मोहल्ला पीरखां निवासी एमबीबीएस छात्र मो. हंजला ने बताया कि खारकीव में हमले बढ़ने के बाद एक मार्च को वह चार गुना किराया देकर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर एक मिसाइल गिरी, जिससे वहां भगदड़ मच गई। उस समय उसका मौत से सामना हुआ था। बॉर्डर पर घंटों लाइन में लगने के बाद वह रोमानिया पहुंचा। शनिवार शाम चार बजे वह घर पहुंचा तो परिजनों में खुशी की लहर छा गया। डॉ.सिराज कुरैशी, हाजी रहीस, साजिद मुनाफ सहित अनेक शुभचिंतकों ने हंजला को फूलमालाएं पहनाकर व बुके देकर स्वागत किया। संवाद
सकुशल लौटा नरौरा का दूसरा छात्र विलय
नरौरा। अणुविहार कालोनी निवासी छात्र विलय कुमार की हंगरी के बुखारेस्ट एयरपोर्ट से भारत सरकार के आपरेशन गंगा के तहत सकुशल वतन वापसी हो गई है। भारत आने के बाद विलय अपनी रिश्तेदारी में बरेली में पहुंच गया है। यूक्रेन में गोलाबारी प्रारंभ होने के बाद भारतीय दूतावास के निर्देशों के अनुसार विलय यूक्रेन-हंगरी बॉर्डर ओर कड़ी मशक्कत के बाद पहुंचे थे। बॉर्डर पार होंने के बाद उन्हें बुखारेस्ट एयरपोर्ट के निकट एक शिविर में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। वह आपरेशन गंगा अभियान के तहत सकुशल वापस लौटे। जिस पर परिजनों ने खुशी जताई है। संवाद
बर्फ को पिघला कर प्यास बुझा रहे भारतीय छात्र
शिकारपुर। यूक्रेन के सूमी राज्य में मेडिकल की पढ़ाई करने गए छात्रों में से शिकारपुर के मोहल्ला चैनपुरा निवासी बीएसएफ के निरीक्षक संजीव शर्मा के पुत्र अनुज कुमार शर्मा ने फोन पर बताया की यहां वह हॉस्टल के बंकर में रह रहे हैं। जहां 700 से अधिक भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। रूस ने पहले दिन ही बमबारी में अपना निशाना बनाया था। रेलवे की लाइन और पुल ध्वस्त कर दिए गए थे। जिससे रेल सेवा बाधित हो चुकी है। रोजाना बमबारी हो रही है। छात्रों को रोमानिया और पोलैंड की सीमा तक पैदल पहुंचने में 22 से 24 घंटे लगेंगे। बमबारी होने के कारण वहां पहुंचना संभव नहीं है, जिसके चलते हम लोग बंकरों में ही शरण लिए हुए हैं। अनुज ने बताया कि 7-8 दिन पूर्व जो भी खाने पीने की चीजें इकट्ठा की गई थी। उसी से अपना काम चला रहे हैं। दो या तीन दिन तक का खाना उनके पास बचा हुआ है। बिजली और पानी की आपूर्ति पहले ही काटी जा चुकी है। प्यास लगने पर बर्फ को इकट्ठा करके किसी तरह पिघलाते हैं और उससे अपनी प्यास बुझा रहे हैं। शनिवार की सुबह 5:30 बजे धमाके की आवाज सुनकर की आंखें खुली थी। सूचना मिली है की भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति के बीच हुई वार्ता के बाद रूस द्वारा सीजफायर की घोषणा की गई है, लेकिन फायरिंग होने के कारण यहां से निकलना संभव नहीं हो पा रहा है। अनुज की मां सीमा शर्मा और बहन डॉ. स्वाति शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूक्रेन के सूमी राज्य में फंसे छात्रों को भारत लाने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है। संवाद
घर वापसी के लिए अनुराग ने पकड़ी फ्लाइट
सिकंदराबाद। पिछले कई दिनों से घर वापसी के लिए स्लोवाकिया स्थित शेल्टर हाउस में फ्लाइट का इंतजार कर रहे अनुराग सैनी शनिवार को फ्लाइट में सवार हो गया। यूक्रेन में फंसा छात्र अभिषेक भाटी, मुकुल गोयल, आकाश सैनी, छात्रा अंजलि नामदेव शुक्रवार तक वापस घर लौट आए थे। जबकि फ्लाइट नहीं मिलने के कारण छात्र अनुराग सैनी घर वापसी के लिए स्लोवाकिया के शेल्टर हाउस में इंतजार कर रहा है। अनुराग के चाचा धनेश्वर सैनी ने बताया कि कई दिनों से वह स्लोवाकिया से फ्लाइट में सवार हो गया है। संवाद