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40 दिन में सीओ से इंस्पेक्टर बन गए सुधीर त्यागी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 12:48 AM IST
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40 दिन में सीओ से इंस्पेक्टर बन गए सुधीर त्यागी
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बुलंदशहर। पदोन्नति के लिए फर्जी शपथ पत्र देने पर 40 दिन के बाद सुधीर कुमार त्यागी को सीओ से इंस्पेक्टर पद पर पदावनत कर दिया गया। शासन के निर्देश पर सोमवार को हुई इस कार्रवाई के बाद अन्य अधिकारी भी अलर्ट हो गए हैं।
मुजफ्फरनगर निवासी एसओजी इंस्पेक्टर सुधीर कुमार त्यागी की जिले में करीब ढाई वर्ष पूर्व तैनाती हुई थी। इस दौरान वह कोतवाली देहात में प्रभारी निरीक्षक रहने के साथ ही दो बार एसओजी के प्रभारी भी रहे थे। अक्तूबर 2021 में इंस्पेक्टर सुधीर कुमार त्यागी की पदोन्नति होनी थी। इसके लिए शासन ने उनसे एक शपथ पत्र मांगा कि उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज है या नहीं। सुधीर त्यागी की ओर से दिए गए शपथ पत्र में बताया गया कि कोई मुकदमा विचाराधीन नहीं है। जिसके चलते सुधीर त्यागी की पदोन्नति करते हुए उन्हें पांच जनवरी 2022 को सीओ बना दिया गया। जब शासन स्तर से जांच कराई गई तो मामले में पता चला कि वर्ष 1999 में आगरा के थाना रकाबगंज में एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में एसपी देहात बजरंग बली चौरसिया ने जांच की तो प्रारंभिक तौर पर आरोप सही पाए गए। जिसके बाद अब नगर कोतवाली में सुधीर कुमार त्यागी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। मुकदमा दर्ज कराने के बाद अब 40 दिन में ही उन्हें सीओ से पदानवत करते हुए इंस्पेक्टर बनाया गया है।
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1989 में ज्वाइन की थी नौकरी
सुधीर कुमार त्यागी ने वर्ष 1989 में पुलिस की नौकरी ज्वाइन की थी। इसके बाद वह विभिन्न पदों पर दस से अधिक जिलों में तैनात रहे थे। करीब ढाई वर्ष पहले उनका तबादला जिले में किया गया था। इस कार्यकाल में वह अधिकतर समय एसओजी इंस्पेक्टर के पद पर ही तैनात रहे हैं। केवल एक बार उन्हें कोतवाली देहात का चार्ज दिया गया था।
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13 धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
आगरा के रकाबगंज थाने में 1999 में एक मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मुकदमा वर्तमान में कोर्ट में विचाराधीन है और इसका खुलासा ही उन्होंने शपथ पत्र में नहीं किया था। बताया जा रहा है कि मुकदमे में गैर इरादतन हत्या समेत कुल 13 धाराएं लगाई गई थीं। हालांकि यह अभी भी साफ नहीं हुआ है कि इस मुकदमे में सुधीर त्यागी का नाम मुख्य आरोपियों में था या विवेचना के बाद शामिल किया गया था।
मुकदमा दर्ज होने पर नहीं पा सकते पदोन्नति
शासनादेश के अनुसार किसी भी थाने में मुकदमा दर्ज होने पर विभागीय अधिकारी या कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिलेगी। मुकदमे वाले तथ्य को छिपाकर पदोन्नति पाई भी जाती है तो जांच होने पर पदोन्नति को वापस करना पड़ेगा। साथ ही विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा।

कोट
एसओजी इंस्पेक्टर ने तथ्यों को छिपाकर तथा झूठा शपथ पत्र विभाग को दिया और पदोन्नति हासिल की। पुलिस ने फर्जीवाड़ा समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए पदोन्नति को निरस्त करते हुए सीओ से इंस्पेक्टर बनाया गया है। - संतोष कुमार सिंह, एसएसपी
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