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मौसम बिगाड़ रहा सेहत, अस्पतालों के बेड हो रहे फुल

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 11:42 PM IST
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मौसम बिगाड़ रहा सेहत, अस्पतालों के बेड हो रहे फुल
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बुलंदशहर। मौसम में आया बदलाव लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है, जिसके चलते जिला अस्पताल में गत तीन दिन से मरीजों की संख्या बढ़ने के चलते बेड फुल होने लगे हैं। क्षमता से कम बेड होने पर मरीजों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। अस्पताल प्रशासन कोविड अस्पताल और टीकाकरण के लिए बेड जाने की बात कह रहा है।
गत 15 दिन पूर्व हुई बारिश के बाद मौसम में दिन-प्रतिदिन बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। साथ ही खानपान में जरा सी लापरवाही भी लोगों को भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में जहां प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज अस्पताल में अपना उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, हालत गंभीर होने पर मरीजों को भर्ती कर उपचार भी किया जा रहा है। कोविड में बेड जाने से शेष बेड की क्षमता से अधिक मरीजों के प्रतिदिन आने से अस्पताल प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है।
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जिला अस्पताल में कोरोना काल से पूर्व 177 बेड की क्षमता थी। कोविड अस्पताल बनने के दौरान जिला अस्पताल से काफी संख्या में बेड भेजे गए, तो वहीं, 16 जनवरी से शुरू हुए वैक्सीनेशन कार्यक्रम के लिए भी अस्पताल के बेड भेजे गए हैं, जिनके अभी तक वापस न आने से वर्तमान में जिला अस्पताल में मात्र 100 बेड हैं। जिनमें क्षय रोग वार्ड, आईसीयू वार्ड और बर्न वार्ड में आठ-आठ व प्राइवेट वार्ड में चार बेड रखे हुए हैं, जबकि इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड में शेष बेड पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। गत सप्ताह में एक दिन क्षमता से अधिक मरीज भर्ती होने पर अन्य वार्ड में शिफ्ट कर उपचार किया गया।
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डॉक्टर परवेंद्र सिंह का कहना है कि मौसम बदलने से लोग सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, आंखों में जलन और पेट दर्द का शिकार होते हैं। खासतौर पर वैसे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है। गर्मी होने पर पंखे का प्रयोग कम करें, बदलते मौसम में बीमारी की सबसे बड़ी वजह यही होती है। इससे सर्द-गर्म हो जाता है, जिसके चलते कुछ देर बाद बुखार आने लगता है।

सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. राजीव प्रसाद = जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को मौजूद संसाधनों के अनुसार उपचार दिया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सक और कुछ सुविधाएं न होने पर ही मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अस्पताल के कुछ बेड कोविड-19 व टीकाकरण के कार्यों में लगे हैं। वहां से वापस आने के बाद बेड की क्षमता बढ़ जाएगी।
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