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ग्रेस मार्क से पास हुई छात्रा, पुनर्मूल्यांकन में मिला डिक्टेंशन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2020 12:15 AM IST
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शिकारपुर की छात्रा सुरभि सिंह की यूपी बोर्ड से संशोधित मार्कसीट। - फोटो : BULANDSHAHR
ग्रेस मार्क से पास हुई छात्रा, पुनर्मूल्यांकन में मिला डिक्टेंशन
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बुलंदशहर/शिकारपुर। वर्ष 2018 हाईस्कूल की परीक्षा में मुख्यमंत्री मेधावी छात्र सम्मान पाने वाली छात्रा को यूपी बोर्ड की वर्ष 2020 की इंटरमीडिएट परीक्षा में जब ग्रेस मार्क से पास होने की जानकारी हुई तो उसके होश उड़ गए। उसे अंग्रेजी विषय में मात्र 33 अंक दिए गए। जबकि छात्रा ने अन्य विषयों में डिक्टेंशन प्राप्त किया है। छात्रा के पिता ने मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेजकर कापी का पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की। बोर्ड ने कापी की दोबारा जांच कराई तो परिणाम चौंकाने वाला आया। स्क्रूटनी जांच के दौरान छात्रा की उत्तर पुस्तिका में 82 अंक पाए गए। अब बोर्ड ने सुधार कर छात्रा को नई अंक तालिका जारी की है।
शिकारपुर के मोहल्ला शिवलोक कॉलोनी निवासी डीएपी इंटर कॉलेज में शिक्षक सुशील कुमार की पुत्री सुरभि सिंह ने वर्ष 2018 में हाई स्कूल की परीक्षा में 600 में से 544 अंक प्राप्त कर जनपद में पांचवां स्थान प्राप्त किया था। सुरभि को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। वहीं, वर्ष 2020 में हुई इंटरमीडिएट की परीक्षा में सुरभि को अंग्रेजी विषय में मात्र 33 अंक मिले। जबकि, गणित में 94, भौतिक विज्ञान में 82, रसायन विज्ञान में 82 और हिंदी में 75 अंक हासिल किए। अंग्रेजी में विशेष योग्यता वाले अंक आने से आश्वस्त छात्रा 33 अंक प्राप्त होने पर निराश हो गई। लेकिन, परिजनों ने उसे साहस देते हुए उसकी लड़ाई लड़ने की बात कही। पिता ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर परीक्षा केंद्र अथवा मूल्यांकन केंद्र पर पुत्री की उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी किए जाने की आशंका जताई। साथ ही जांच कराकर उत्तर पुस्तिका का पुन: मूल्यांकन कराने की मांग की। सुशील कुमार ने बताया कि 23 दिसंबर को मेरठ स्थित बोर्ड कार्यालय में कापी की जांच की गई। जांच में अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका में 82 अंक मिले। जबकि परीक्षक ने कंप्यूटर सीट में केवल 02 अंक भर दिए थे। कोराना काल में सरकार द्वारा 14 औसत अंक देकर उसके 16 अंक हो गए। 17 अनुग्रह अंक देकर उसे उत्तीर्ण कर दिया गया। जबकि, वास्तव में उसके 82 अंक थे। उन्होंने बताया कि अब उसकी बोर्ड कार्यालय से पांचों विषयों में विशेष योग्यता वाली अंक तालिका बनी है। इसमें 500 में 416 अंक प्राप्त कर फर्स्ट ऑनर्स में उत्तीर्ण दिखाया गया है।
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कम अंक देने वाले परीक्षक पर कार्रवाई करने की मांग
छात्रा सुरभि ने बताया कि उसे अंग्रेजी विषय की कापी में पुनर्मूल्यांकन में 82 अंक मिलने पर बेहद खुशी हो रही है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के दौरान जब उसे पता चला कि उसे अंग्रेजी विषय में मात्र 33 अंक मिले हैं, जबकि अन्य पांचों विषयों में विशेष योग्यता के अंक आए हैं तो वह पूरी तरह टूट गई थी और डिप्रेशन में आ गई थी। इस दौरान परिजनों ने उसेे सहारा दिया। वहीं, दूसरी ओर सूरजभान सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य प्रभात गुप्ता ने कहा कि ऐसे परीक्षकों को जिन्हें 02 और 82 अंक में अंतर दिखाई नहीं देता उन्हें परीक्षक पद से हटाकर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
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जिला विद्यालय निरीक्षक आरके तिवारी का कहना है कि छात्रा ने कम अंक आने पर शिकायत की थी। इसके बाद उसकी उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच करवाई गई। जिसमें उसे 33 के स्थान पर 82 अंक मिले हैं। बोर्ड ने छात्रा की नई अंक तालिका भी जारी कर दी है।
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