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अगौता में किरनपाल और सदर में अलीम का रोका था ‘रथ’
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अगौता में किरनपाल और सदर में अलीम का रोका था ‘रथ’
बुलंदशहर। जनपद की राजनीति में सदर विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही की धमक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम दर्शन के लिए प्रदेश के मुखिया से लेकर विभिन्न केंद्रीय मंत्री भी पहुंचे। प्रदेश में खुद की अपनी अलग पहचान बनाने के लिए वीरेंद्र सिंह सिरोही का सफर इतना आसान नहीं रहा है, राजनीतिक जीवन में कई उतार चढ़ाव होने के बावजूद वह लोगों के दिलों में अपनी खास पैठ बनाने में कामयाब रहे।
तीन बार सिरोही विधायक तो बने, लेकिन हारने वाले प्रत्याशी कद्दावर नेता के साथ साथ क्षेत्र में अपना भारी जनमत जुटाए थे। यही कारण था कि पहली बार विधायक बनने पर ही उन्हें राजस्व मंत्री का पद दिया गया था।
वीरेंद्र सिंह सिरोही ने अगौता विधानसभा सीट से ही राजनीति शुरू की थी। अगौता विधानसभा सीट जाट बाहुल्य मानी जाती थी। इस सीट पर उस दौरान चौधरी किरनपाल सिंह का दबदबा हुआ करता था। वीरेंद्र सिरोही ने वर्ष 1992-93 में अगौता विस से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन, यहां उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद सिरोही ने खुद को और मजबूत किया और 1996-97 के चुनाव में एक बार फिर वह भाजपा के टिकट से मैदान में उतरे। उनके सामने चौधरी किरनपाल सिंह चुनावी मैदान में थे। लेकिन, इस बार वीरेंद्र सिंह सिरोही ने तख्ता पलट कर अपनी पहली जीत हासिल की। अगौता में जीत हासिल करते ही तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह दी और राजस्व मंत्री का पदभार सौंप दिया। इसके बाद वर्ष 2002 में किरनपाल सिंह ने सपा के टिकट पर वीरेंद्र सिंह सिरोही को मात दे दी। वर्ष 2007 में इस सीट पर अंतिम चुनाव दोनों कद्दावर नेताओं के बीच हुआ, जिसमें वीरेंद्र सिंह सिरोही ने जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में यह सीट परिसीमन के कारण समाप्त हो गई थी। वर्ष 2012 के चुनाव में वीरेंद्र सिंह सिरोही ने सदर सीट से चुनाव लड़ा था। जहां पहले से विधायक रहे बसपा के हाजी अलीम ने अपने दूसरे चुनाव में उन्हें मात दी। लेकिन, सिरोही ने हिम्मत नहीं हारी और भाजपा के टिकट से वर्ष 2017 के चुनाव में ताल ठोंकी और हाजी अलीम के विजय रथ को रोककर विजयश्री हासिल की थी। सदर सीट पर काफी समय के बाद भाजपा का परचम लहराया था। जीत के बाद लखनऊ पहुंचे वीरेंद्र सिंह सिरोही को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तोहफे के रूप में विधानमंडल दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया था।
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बुलंदशहर। जनपद की राजनीति में सदर विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही की धमक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम दर्शन के लिए प्रदेश के मुखिया से लेकर विभिन्न केंद्रीय मंत्री भी पहुंचे। प्रदेश में खुद की अपनी अलग पहचान बनाने के लिए वीरेंद्र सिंह सिरोही का सफर इतना आसान नहीं रहा है, राजनीतिक जीवन में कई उतार चढ़ाव होने के बावजूद वह लोगों के दिलों में अपनी खास पैठ बनाने में कामयाब रहे।
तीन बार सिरोही विधायक तो बने, लेकिन हारने वाले प्रत्याशी कद्दावर नेता के साथ साथ क्षेत्र में अपना भारी जनमत जुटाए थे। यही कारण था कि पहली बार विधायक बनने पर ही उन्हें राजस्व मंत्री का पद दिया गया था।
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वीरेंद्र सिंह सिरोही ने अगौता विधानसभा सीट से ही राजनीति शुरू की थी। अगौता विधानसभा सीट जाट बाहुल्य मानी जाती थी। इस सीट पर उस दौरान चौधरी किरनपाल सिंह का दबदबा हुआ करता था। वीरेंद्र सिरोही ने वर्ष 1992-93 में अगौता विस से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन, यहां उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद सिरोही ने खुद को और मजबूत किया और 1996-97 के चुनाव में एक बार फिर वह भाजपा के टिकट से मैदान में उतरे। उनके सामने चौधरी किरनपाल सिंह चुनावी मैदान में थे। लेकिन, इस बार वीरेंद्र सिंह सिरोही ने तख्ता पलट कर अपनी पहली जीत हासिल की। अगौता में जीत हासिल करते ही तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह दी और राजस्व मंत्री का पदभार सौंप दिया। इसके बाद वर्ष 2002 में किरनपाल सिंह ने सपा के टिकट पर वीरेंद्र सिंह सिरोही को मात दे दी। वर्ष 2007 में इस सीट पर अंतिम चुनाव दोनों कद्दावर नेताओं के बीच हुआ, जिसमें वीरेंद्र सिंह सिरोही ने जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में यह सीट परिसीमन के कारण समाप्त हो गई थी। वर्ष 2012 के चुनाव में वीरेंद्र सिंह सिरोही ने सदर सीट से चुनाव लड़ा था। जहां पहले से विधायक रहे बसपा के हाजी अलीम ने अपने दूसरे चुनाव में उन्हें मात दी। लेकिन, सिरोही ने हिम्मत नहीं हारी और भाजपा के टिकट से वर्ष 2017 के चुनाव में ताल ठोंकी और हाजी अलीम के विजय रथ को रोककर विजयश्री हासिल की थी। सदर सीट पर काफी समय के बाद भाजपा का परचम लहराया था। जीत के बाद लखनऊ पहुंचे वीरेंद्र सिंह सिरोही को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तोहफे के रूप में विधानमंडल दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया था।
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