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...खुफिया तंत्र फेल, कहीं पूर्व नियोजित तो नहीं था बवाल!
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...खुफिया तंत्र फेल, कहीं पूर्व नियोजित तो नहीं था बवाल!
बुलंदशहर। नगर कोतवाली से चंद कदमों की दूरी पर ही उपद्रव की आग ने शहर की फिजा को झुलसा दिया। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि नगर पुलिस से लेकर खुफिया तंत्र तक बवाल की पूर्व में ही कोई पुख्ता जानकारी इकट्ठा नहीं कर सका। इसे खुफिया तंत्र और बुलंदशहर पुलिस का फेलियर भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हालांकि, पिछले कई दिनों से डीएम और एसएसपी लगातार जनपद का दौरान करते रहे, लेकिन नगर कोतवाली के समीप ही उपजे बवाल ने जनपद की छवि को खराब कर दिया।
सूत्रों की मानें तो जिस तरह ऊपरकोट पर बवाल को अंजाम दिया गया, उससे साफ लग रहा था कि प्रदर्शनकारियों के बीच बलवाईयों ने बवाल की पूर्व नियोजित योजना बनाई हुई थी। जिस तरह कुछ ही मिनटों पर हजारों की तादाद में लोग ऊपरकोट इलाके मे एकत्रित हुए वह दर्शाता है कि कहीं न कहीं विरोध ने पहले से ही चिंगारी का रूप ले लिया था। प्रदर्शनकारी तो हाथों में तिरंगा लिए प्रदर्शन करते हुए निकले। लेकिन, उनके बीच में मौजूद बलवाइयों ने वारदात को अंजाम देकर शहर की फिजा को बिगाड़ दिया। यकायक शहर की गलियां और बाजार बंद हो गए। ऊपरकोट पर बवाल की सूचना आग की तरह शहर में फैल गई थी। लेकिन, यहां एक बात गौर करने लायक है कि आखिर इस बवाल की सुगबुगाहट पुलिस को क्यों नहीं लग सकी। पुलिस और खुफिया तंत्र पूरी तरह से कैसे फेल हो गया? आखिर बीते कुछ दिनों से लगातार फ्लैग मार्च कर रहे अधिकारी अपने खुफिया तंत्र को सक्रिय करने में फेल कैसे हुए? हजारों की संख्या में बलवाई एकत्रित हुए तो ऊपरकोट पर तत्काल भारी भरकम पुलिस फोर्स क्यों नहीं भेजा जा सका? हालांकि, गनीमत रही कि बवाल में कोई हताहत नहीं हुआ है। पुलिस व स्थानीय लोगों को माल की काफी हानि हुई है।
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बुलंदशहर। नगर कोतवाली से चंद कदमों की दूरी पर ही उपद्रव की आग ने शहर की फिजा को झुलसा दिया। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि नगर पुलिस से लेकर खुफिया तंत्र तक बवाल की पूर्व में ही कोई पुख्ता जानकारी इकट्ठा नहीं कर सका। इसे खुफिया तंत्र और बुलंदशहर पुलिस का फेलियर भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हालांकि, पिछले कई दिनों से डीएम और एसएसपी लगातार जनपद का दौरान करते रहे, लेकिन नगर कोतवाली के समीप ही उपजे बवाल ने जनपद की छवि को खराब कर दिया।
सूत्रों की मानें तो जिस तरह ऊपरकोट पर बवाल को अंजाम दिया गया, उससे साफ लग रहा था कि प्रदर्शनकारियों के बीच बलवाईयों ने बवाल की पूर्व नियोजित योजना बनाई हुई थी। जिस तरह कुछ ही मिनटों पर हजारों की तादाद में लोग ऊपरकोट इलाके मे एकत्रित हुए वह दर्शाता है कि कहीं न कहीं विरोध ने पहले से ही चिंगारी का रूप ले लिया था। प्रदर्शनकारी तो हाथों में तिरंगा लिए प्रदर्शन करते हुए निकले। लेकिन, उनके बीच में मौजूद बलवाइयों ने वारदात को अंजाम देकर शहर की फिजा को बिगाड़ दिया। यकायक शहर की गलियां और बाजार बंद हो गए। ऊपरकोट पर बवाल की सूचना आग की तरह शहर में फैल गई थी। लेकिन, यहां एक बात गौर करने लायक है कि आखिर इस बवाल की सुगबुगाहट पुलिस को क्यों नहीं लग सकी। पुलिस और खुफिया तंत्र पूरी तरह से कैसे फेल हो गया? आखिर बीते कुछ दिनों से लगातार फ्लैग मार्च कर रहे अधिकारी अपने खुफिया तंत्र को सक्रिय करने में फेल कैसे हुए? हजारों की संख्या में बलवाई एकत्रित हुए तो ऊपरकोट पर तत्काल भारी भरकम पुलिस फोर्स क्यों नहीं भेजा जा सका? हालांकि, गनीमत रही कि बवाल में कोई हताहत नहीं हुआ है। पुलिस व स्थानीय लोगों को माल की काफी हानि हुई है।
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