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बच्चों से टीचर दीदी सुनना अच्छा लगता है: अंजली
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टीचर दीदी अंजली खन्ना
- फोटो : BULANDSHAHR
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बच्चों से टीचर दीदी सुनना अच्छा लगता है: अंजली
बुलंदशहर। नगर क्षेत्र निवासी एक युवती अपनी मां से मिली प्ररेणा के चलते शिक्षिका बनकर बच्चों को उच्च शिक्षा देने में जुटी हुई हैं। वर्तमान में वह नगर के एक निजी स्कूल में बच्चों को शिक्षा दे रही है। जहां बच्चे उन्हें प्यार से टीचर दीदी कहकर पुकारते है तो वह अपने आप को गौरवांवित महसूस करती है।
नगर की सुशीला विहार निवासी शरद खन्ना की पुत्री अंजली खन्ना नगर के सेंट मोमिना स्कूल में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं। अंजली की मां रेखा खन्ना शिक्षिका के पद पर कार्यरत है और काफी समय से बच्चों को शिक्षा दे रही है। इनसे मिली प्रेरणा पर वह भी शिक्षिका बनकर मां के सपने को साकार करने में जुटी हुई हैं। अंजली खन्ना ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है। बीकॉम और बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह शिक्षिका बनने की तैयारियों में जुट गई और लेकिन प्रयासों के बाद भी प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षिका बनने से वंचित रह गई। उन्होंने हार नहीं मानी और निजी स्कूल में बच्चों को शिक्षा देने के प्रयास में जुट गई। वह विगत पांच वर्षों से निजी स्कूल में बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। बताया कि वह आज जो भी कुछ हैं, सब मां से मिले आशीर्वाद से ही है। भविष्य में भी वह बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला जारी रखना चाहती है। अंजली बताती है कि स्कूल के बच्चे उन्हें अब प्यार से दीदी कहकर पुकारते हैं तो वह भी मुस्करा देती है। साथ ही शिक्षिका बनाने को जो सपना मां ने अपनी आंखों में देखा था वह बच्चों की आंखों में पूरा होते हुए देखती हैं।
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बुलंदशहर। नगर क्षेत्र निवासी एक युवती अपनी मां से मिली प्ररेणा के चलते शिक्षिका बनकर बच्चों को उच्च शिक्षा देने में जुटी हुई हैं। वर्तमान में वह नगर के एक निजी स्कूल में बच्चों को शिक्षा दे रही है। जहां बच्चे उन्हें प्यार से टीचर दीदी कहकर पुकारते है तो वह अपने आप को गौरवांवित महसूस करती है।
नगर की सुशीला विहार निवासी शरद खन्ना की पुत्री अंजली खन्ना नगर के सेंट मोमिना स्कूल में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं। अंजली की मां रेखा खन्ना शिक्षिका के पद पर कार्यरत है और काफी समय से बच्चों को शिक्षा दे रही है। इनसे मिली प्रेरणा पर वह भी शिक्षिका बनकर मां के सपने को साकार करने में जुटी हुई हैं। अंजली खन्ना ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है। बीकॉम और बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह शिक्षिका बनने की तैयारियों में जुट गई और लेकिन प्रयासों के बाद भी प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षिका बनने से वंचित रह गई। उन्होंने हार नहीं मानी और निजी स्कूल में बच्चों को शिक्षा देने के प्रयास में जुट गई। वह विगत पांच वर्षों से निजी स्कूल में बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। बताया कि वह आज जो भी कुछ हैं, सब मां से मिले आशीर्वाद से ही है। भविष्य में भी वह बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला जारी रखना चाहती है। अंजली बताती है कि स्कूल के बच्चे उन्हें अब प्यार से दीदी कहकर पुकारते हैं तो वह भी मुस्करा देती है। साथ ही शिक्षिका बनाने को जो सपना मां ने अपनी आंखों में देखा था वह बच्चों की आंखों में पूरा होते हुए देखती हैं।
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