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प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से चली गई सात लोगों की जान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2019 11:37 PM IST
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बुलंदशहर। नरौरा में श्रद्वालुओं की मौत के बाद घटना स्थल पर विलाप करते परिजन। - फोटो : BULANDSHAHR
प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से चली गई सात लोगों की जान
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अमित सक्सेना
बुलंदशहर। नरौरा के गांधी घाट पर हुए दर्दनाक हादसे को लेकर लोगों मे चर्चा है कि अगर वहां पर प्रकाश की व्यवस्था होती तो सातों जान बच सकती थी। कई सालों से घाट के आसपास के इलाकों में प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोग कई वर्षो से वहां पर प्रकाश व्यवस्था किए जाने की मांग कर रहे थे, शाम होते ही वहां अंधेरा छा जाता है।
शुक्रवार की अलसुबह नरौरा के गांधी घाट पर एक बस द्वारा सड़क किनारे आराम कर रहे सात श्रद्धालुओं को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। इन मरने वालों में चार महिलाएं और तीन मासूम बच्चियां भी थी। उनके मरने से स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है। स्थानीय निवासियो ंने बताया अगर वहां पर प्रकाश की व्यवस्था होती तो यह हादसा होता ही नहीं। अगर प्रकाश होता तो बस वाले को श्रृद्धालु दिखाई देते। बताया कि ऐसा नहीं है कि यहां यह पहला हादसा है। कई दुर्घटनाएं हो चुकी है, लेकिन यह सबसे बड़ी और दर्दनाक है। कई बार नगर पंचायत और प्रशासनिक विभागों में यहां पर प्रकाश की व्यवस्था कराने के लिए कहा गया है, लेकिन किसी भी अधिकारी को सुनने की फुरसत ही नहीं हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारी भी नहीं सुनते है। जबकि जो ठेकेदार घाट बनाता है वहीं, प्रकाश की व्यवस्था के लिए उपकरण भी लगाता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रकाश की व्यवस्था या तो पालिका या फिर नगर पंचायत करवाती है।
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इनसेट=
नहीं है वाहन पार्किंग की सुविधा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वहां पर पार्किंग न होने से भी यह दर्दनाक हादसा घटित हुआ है। कहा कि वैसे तो वहां ठेकेदार वाहन खड़ा होने पर पैसे लेते है, लेकिन कोई स्थाई पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।
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इनसेट :
श्रद्धालुओं के ठहरने की नहीं है व्यवस्था
जनपद भर में करीब एक दर्जन से अधिक गंगा घाट बने हुए है। जिनमें सिद्धबाबा आहार, अनूपशहर, कर्णवास, राजघाट, नरौरा, रामघाट, गांधी घाट आदि प्रमुख हैं। यहां तक कि समय-समय पर लगने वाले मेलों के दौरान जितने श्रृद्धालु गंगा स्नान को आते है उनके लिए ठहरने की भी उचित व्यवस्था नहीं है। आने वालों में अधिकतर सड़क पर या किसी दुकान के किनारे सोकर ही अपनी रात गुजारते हैं। वहीं, नवंबर माह में अनूपशहर में मशहूर लक्खी मेला लगने वाला है, जिसको लेकर प्रशासन व शासन स्तर पर कोई तैयारी नहीं है।
कोट =
प्रकाश न होने की बात सामने आई है। सिंचाई विभाग के एक्सइएन और एसडीओ को तलब किया गया है। मामले की जांच एडीएम प्रशासन को सौंपी है।
- रविंद्र कुमार, डीएम
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