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मिल की खुली पड़ी मशीनरी, मरम्मत को राशि का इंतजार
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मिल की खुली पड़ी मशीनरी, मरम्मत को राशि का इंतजार
बुलंदशहर। वेव शुगर मिल के चलने को लेकर अभी से संशय शुरू हो गया है। मिल की मशीनरी खुली पड़ी है और मरम्मत के लिए राशि का इंतजार है। अभी तक मिल में मरम्मत कार्य अधर में लटका हुआ है। जबकि मिल के जीएम का कहना है कि मिल चलाने को लेकर मालिकों से बातचीत हो चुकी है और मिल हरहाल में चलेगी।
बता दें कि नगर की पन्नीनगर शुगर मिल के नाम से जानी जाने वाली मिल को बसपा की सरकार में मात्र 29 करोड़ में वेव कंपनी को बेच दिया था। जब से यह मिल वेव कंपनी द्वारा चलाई जा रही है, तब से लेकर अब तक इसके संचालन को लेकर खेल जारी है। विगत दो वर्ष पहले गन्ना किसानों की मांग पर शासन ने मिल को चलाने के आदेश जारी किए थे। इसके चलते मिल तो चली, लेकिन देरी से चली और किसानों के बकाया गन्ने का भुगतान भी समय पर नहीं किया गया। अभी भी किसानों का 49.12 करोड़ रुपये मिल पर बकाया चल रहा है। पिछले दिनों शासन के आदेश पर डीसीओ ने आगामी गन्ना पेराई सत्र के लिए मिल प्रबंधन को मिल की मरम्मत के आदेश दिए थे। इसके चलते अफसरों ने मशीनरी तो खुलवा दी, लेकिन अभी तक करीब पांच लाख रुपये ही मरम्मत के लिए मिल पाए हैं। जबकि बताया जा रहा है कि मरम्मत कार्य के लिए करीब ढाई करोड़ राशि की जरूरत है। मिल अफसरों का भी कहना है कि जब तक राशि नहीं मिलती तब तक मरम्मत कार्य भी नहीं हो सकता है। ऐसे में मिल के चलने को लेकर एक बार फिर संशय बनने लगा है। यदि ऐसा हुआ तो गन्ना किसानों को एक बार फिर परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
कोट =
मिल को चलाने और मरम्मत करवाने के लिए मालिकों से बातचीत हो चुकी है। जल्द ही मरम्मत कार्य के लिए राशि मिल जाएगी और प्रयास किया जा रहा है कि समय पर मिल चले, ताकि किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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- बीएस चौहान, जीएम, वेव शुगर मिल बुलंदशहर
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बुलंदशहर। वेव शुगर मिल के चलने को लेकर अभी से संशय शुरू हो गया है। मिल की मशीनरी खुली पड़ी है और मरम्मत के लिए राशि का इंतजार है। अभी तक मिल में मरम्मत कार्य अधर में लटका हुआ है। जबकि मिल के जीएम का कहना है कि मिल चलाने को लेकर मालिकों से बातचीत हो चुकी है और मिल हरहाल में चलेगी।
बता दें कि नगर की पन्नीनगर शुगर मिल के नाम से जानी जाने वाली मिल को बसपा की सरकार में मात्र 29 करोड़ में वेव कंपनी को बेच दिया था। जब से यह मिल वेव कंपनी द्वारा चलाई जा रही है, तब से लेकर अब तक इसके संचालन को लेकर खेल जारी है। विगत दो वर्ष पहले गन्ना किसानों की मांग पर शासन ने मिल को चलाने के आदेश जारी किए थे। इसके चलते मिल तो चली, लेकिन देरी से चली और किसानों के बकाया गन्ने का भुगतान भी समय पर नहीं किया गया। अभी भी किसानों का 49.12 करोड़ रुपये मिल पर बकाया चल रहा है। पिछले दिनों शासन के आदेश पर डीसीओ ने आगामी गन्ना पेराई सत्र के लिए मिल प्रबंधन को मिल की मरम्मत के आदेश दिए थे। इसके चलते अफसरों ने मशीनरी तो खुलवा दी, लेकिन अभी तक करीब पांच लाख रुपये ही मरम्मत के लिए मिल पाए हैं। जबकि बताया जा रहा है कि मरम्मत कार्य के लिए करीब ढाई करोड़ राशि की जरूरत है। मिल अफसरों का भी कहना है कि जब तक राशि नहीं मिलती तब तक मरम्मत कार्य भी नहीं हो सकता है। ऐसे में मिल के चलने को लेकर एक बार फिर संशय बनने लगा है। यदि ऐसा हुआ तो गन्ना किसानों को एक बार फिर परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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कोट =
मिल को चलाने और मरम्मत करवाने के लिए मालिकों से बातचीत हो चुकी है। जल्द ही मरम्मत कार्य के लिए राशि मिल जाएगी और प्रयास किया जा रहा है कि समय पर मिल चले, ताकि किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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- बीएस चौहान, जीएम, वेव शुगर मिल बुलंदशहर