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पेंशन-जीपीएफ के लिए ली घूस, सुपरवाइजर समेत दो सस्पेंड
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पेंशन-जीपीएफ के लिए ली घूस, सुपरवाइजर समेत दो सस्पेंड
बुलंदशहर। स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन व जीपीएफ जारी करने के लिए घूस लेने का मामला सामने आया है। प्रकरण में जांच के बाद सीएमओ ने सुपरवाइजर सहित दो कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही एक कर्मी को दूसरे कार्यालय से संबद्ध करते हुए कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है।
स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विभाग से सेवानिवृत्त हुए अनूपशहर निवासी कर्मचारी सतेंद्र ने पेंशन और जीपीएफ के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन के दौरान अकाउंट शाखा के बाबू निर्देश व कर्मचारी सुरेंद्र और भूपेंद्र ने सतेंद्र से 34 हजार रुपये रिश्वत ली। पीड़ित ने इसकी वीडियो बना ली और स्वास्थ्य महानिदेशक से मामले की शिकायत की । पीड़ित ने आरोप लगाया था कि कई बार दफ्तर के चक्कर कटवाए गए और रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया। स्वास्थ्य महानिदेशक ने मामले में डीएम को कार्रवाई का निर्देश दिया था। डीएम ने सीएमओ जांच का आदेश दिया था। जांच के बाद सीएमओ ने मलेरिया विभाग के सुपरवाइजर सुरेंद्र और सीएमओ कार्यालय में तैनात कर्मचारी भूपेंद्र को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही अकाउंट विभाग के बाबू निर्देश को जिला क्षय रोग अधिकारी के कार्यालय से संबद्ध कर दिया है।
तीन सदस्यीय टीम ने की जांच
डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने अवैध वसूली के मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था। टीम में एसीएमओ डॉ. रोहताश यादव, एसीएमओ डॉ. सुनील कुमार व डॉ. सीपी गौतम शामिल थे। जांच टीम ने चार दिन में अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी है।
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जिला मलेरिया अधिकारी पाए गए निर्दोष
शिकायतकर्ता सतेंद्र ने अवैध वसूली के मामले में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. बीके श्रीवास्तव, अकाउंट विभाग के बाबू निर्देश, मलेरिया सुपरवाइजर सुरेंद्र और सीएमओ कार्यालय में तैनात भूपेंद्र के खिलाफ शासन को शिकायत दी थी। तीन सदस्यीय टीम की जांच के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी निर्दोष पाए गए। जांच टीम ने उन्हें क्लीन चिट दी है।
भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई के लिए शासन की ओर से पत्र मिला था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। अकाउंट विभाग के बाबू के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है। - डॉ. विनय कुमार, सीएमओ
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बुलंदशहर। स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन व जीपीएफ जारी करने के लिए घूस लेने का मामला सामने आया है। प्रकरण में जांच के बाद सीएमओ ने सुपरवाइजर सहित दो कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही एक कर्मी को दूसरे कार्यालय से संबद्ध करते हुए कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है।
स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विभाग से सेवानिवृत्त हुए अनूपशहर निवासी कर्मचारी सतेंद्र ने पेंशन और जीपीएफ के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन के दौरान अकाउंट शाखा के बाबू निर्देश व कर्मचारी सुरेंद्र और भूपेंद्र ने सतेंद्र से 34 हजार रुपये रिश्वत ली। पीड़ित ने इसकी वीडियो बना ली और स्वास्थ्य महानिदेशक से मामले की शिकायत की । पीड़ित ने आरोप लगाया था कि कई बार दफ्तर के चक्कर कटवाए गए और रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया। स्वास्थ्य महानिदेशक ने मामले में डीएम को कार्रवाई का निर्देश दिया था। डीएम ने सीएमओ जांच का आदेश दिया था। जांच के बाद सीएमओ ने मलेरिया विभाग के सुपरवाइजर सुरेंद्र और सीएमओ कार्यालय में तैनात कर्मचारी भूपेंद्र को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही अकाउंट विभाग के बाबू निर्देश को जिला क्षय रोग अधिकारी के कार्यालय से संबद्ध कर दिया है।
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तीन सदस्यीय टीम ने की जांच
डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने अवैध वसूली के मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था। टीम में एसीएमओ डॉ. रोहताश यादव, एसीएमओ डॉ. सुनील कुमार व डॉ. सीपी गौतम शामिल थे। जांच टीम ने चार दिन में अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी है।
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जिला मलेरिया अधिकारी पाए गए निर्दोष
शिकायतकर्ता सतेंद्र ने अवैध वसूली के मामले में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. बीके श्रीवास्तव, अकाउंट विभाग के बाबू निर्देश, मलेरिया सुपरवाइजर सुरेंद्र और सीएमओ कार्यालय में तैनात भूपेंद्र के खिलाफ शासन को शिकायत दी थी। तीन सदस्यीय टीम की जांच के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी निर्दोष पाए गए। जांच टीम ने उन्हें क्लीन चिट दी है।
भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई के लिए शासन की ओर से पत्र मिला था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। अकाउंट विभाग के बाबू के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है। - डॉ. विनय कुमार, सीएमओ