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बैंकों का खजाना खाली, लाइन में शहर

Fri, 18 Nov 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Fri, 18 Nov 2016 12:21 AM IST
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Bank's reserves, in line city
बैंक - फोटो : अमर उजाला

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इक्का-दुक्का बैंक शाखाओं को छोड़ दें तो अधिकांश बैंक शाखाओं का खजाना खाली हो गया है। पीएनबी और एसबीआई की शाखा में थोड़ा बहुत लेनदेन जरूर हुआ, बाकी बैंकों में सन्नाटा पसरा रहा। एलडीएम के अनुसार 11 नवंबर से नए नोट नहीं आए हैं। कम से कम दो दिन तक नए नोट आने की उम्मीद भी नहीं है।

नोट बंदी से सबसे अधिक परेशान वह परिवार हैं, जिनके यहां शादी ब्याह है। बृहस्पतिवार को शशिकला एडीएम वित्त बृजेश कुमार से मिलीं और बेटी की शादी का कार्ड दिखाते हुए 25 हजार रुपये निकलवाने की मांग की। इसी प्रकार मनोज ने बेटी की शादी कार्ड एडीएम को सौंपा और 2.5 लाख रुपये दिलवाने की मांग की।
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मनोज की बेटी की शादी 24 नवंबर और शशिकला की बेटी की शादी 19 नवंबर को है। बृहस्पतिवार को जैसे ही बैंक शाखाए खुलीं, लोगों की कतार लगने लगी। थोडी ही देर में बैंक प्रबंधकों ने नो कैश की स्लिप टांग दी। ऐसे में हाय हुल्लड़ करने के बाद लोग मायूस लौट गए।
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दिनेश गुप्ता ने बताया कि बैंकों की कतार में एक भी अमीर आदमी नहीं है। सब गरीब तबका कतार में लगा है। जब सिस्टम इस लायक नहीं था तो 500-1000 के नोटों की बंदी क्यों कर दी गई। इस फैसले से आम आदमी परेशान है।

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