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Assembly Elections : बुलंदशहर सदर में भाजपा-रालोद में कड़ी जंग, जाति दिखाएगी रंग
Sat, 29 Jan 2022 06:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राहुल सक्सेना, बुलंदशहर
राहुल सक्सेना, बुलंदशहर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 29 Jan 2022 06:26 AM IST
सार
रालोद और बसपा ने मुस्लिम, तो भाजपा और कांग्रेस ने जाट प्रत्याशी उतारे।
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UP elections
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बुलंदशहर सदर विधानसभा सीट पर मतदाता किसका झंडा बुलंद करेंगे, यह सवाल सबके जेहन में कौंध रहा है। रालोद और बसपा ने यहां मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, तो भाजपा और कांग्रेस ने जाट। मुस्लिम मतदाताओं के वर्चस्व वाली सीट पर इस बार जाट मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। कभी बाहुबली डीपी यादव के कब्जे में रही इस सीट पर सभी दलों को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है।
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यहां क्यों सभी दलों की परीक्षा है, इसे समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। 2017 के चुनाव में जिले में भाजपा के बड़े चेहरों में शुमार रहे जाट नेता विरेंद्र सिंह सिरोही जीते थे। उनके निधन के बाद भाजपा ने उनकी पत्नी ऊषा सिरोही को 2020 के उपचुनाव में उतारा था। उन्होंने बसपा के हाजी यूनुस को 21 हजार से अधिक मतों से मात दी थी।
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हाजी यूनुस अब गठबंधन की तरफ से रालोद के चुनाव चिह्न पर मैदान में हैं। भाजपा ने इस बार भी जाट समाज के ही प्रदीप चौधरी पर भरोसा जताया है। 2012 से इस सीट पर भाजपा और बसपा के बीच टक्कर होती आई है। पर, समीकरणों के हिसाब से इस बार रालोद और भाजपा के बीच मुकाबला माना जा रहा है।
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बसपा ने रालोद के सामने खड़ी की चुनौती
रालोद प्रत्याशी हाजी यूनुस बसपा के पूर्व विधायक हाजी अलीम के भाई हैं। इस सीट पर एक लाख से अधिक मुस्लिम मतदाताओं में इनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। 62 हजार जाटव और मुस्लिम मतदाताओं के मजबूत समीकरण के बल पर हाजी अलीम 2007 और 2012 में विधायक चुने गए थे। 2017 में मोदी लहर में वह विरेंद्र सिंह सिरोही से हार गए थे। बाद में अलीम की हत्या हो गई। अब उनकी सियासी विरासत को हाजी यूनुस आगे बढ़ा रहे हैं। 2020 के उपचुनाव में हार के बाद यूनुस पाला बदलकर रालोद में पहुंच गए। पर, बसपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी मोबिन कल्लू को उतारकर उनका गणित गड़बड़ा दिया है।
रालोद के परंपरागत मतदाता माने जाने वाले जाट मतदाताओं का झुकाव पिछले चुनाव में भाजपा की तरफ देखा गया था। भाजपा ने इस बार भी जाट समाज से ही प्रत्याशी उतारा है। भाजपा का सारा गणित इनके अलावा 36 हजार ब्राह्मण, 35 हजार लोध, 23 हजार क्षत्रिय, 15 हजार वाल्मीकि मतदाताओं पर टिका है। कांग्रेस ने सुशील चौधरी को यहां से टिकट दिया है।
माना जा रहा है कि इस बार 40 हजार जाट वोटर भाजपा, रालोद के साथ कांग्रेस की तरफ भी जा सकता है। ध्रुवीकरण के साथ भाजपा गैर जाट और गैर मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश में लगी हुई है। रालोद-सपा गठबंधन की सारी कोशिश जाट और मुस्लिम मतों के बिखराव को रोकने और अपने पाले में लाने की है। नगर के मोहल्ला आवास विकास के इरफान कहते हैं, इस बार कड़ी टक्कर है। बसपा की सक्रियता भले कम है, लेकिन वह मतों में बंटवारा करते हुए दिख रही है। वहीं, श्रीकांत कहते हैं कि यहां के जातिगत समीकरण विपक्ष के लिए चुनौती हैं। जितेंद्र सिंह इस पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, विपक्ष ही क्यों, यह चुनाव भाजपा के लिए भी आसान नहीं है।
सूरमाओं का इम्तिहान लेंगे सियासी समीकरण
भाजपा : प्रदीप चौधरी
संपत्ति : 3.65 करोड़
शिक्षा : इंटरमीडिएट
रालोद : हाजी यूनुस
संपत्ति : 1.10 करोड़
शिक्षा : साक्षर
कांग्रेस : सुशील चौधरी
संपत्ति : 1.44 करोड़
शिक्षा : इंटरमीडिएट
बसपा : मोबिन कुरैशी
संपत्ति : 25 लाख
शिक्षा : साक्षर
डीपी यादव ने लगाई थी हैट्रिक
1952 में इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसीदास चुनाव जीते थे। 1989 से लगातार तीन बार बाहुबली डीपी यादव का कब्जा रहा। भाजपा को पहली बार 1996 में महेंद्र सिंह यादव ने इस सीट पर जीत दिलाई थी। वे 2002 में भी जीते थे।
कमजोर पड़े स्थानीय मुद्दे
शहर के लोग समय-समय पर दिल्ली के लिए ट्रेन समेत यातायात की सुविधाएं बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। रिंग रोड समेत अन्य मुद्दे भी उठते हैं। पर, चुनावी माहौल में ये मुद्दे कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।
वोटों का समीकरण
- मुस्लिम 1.15 लाख
- जाटव 62 हजार
- जाट 40 हजार
- ब्राह्मण 36 हजार
- लोधी 35 हजार
- ठाकुर 23 हजार
- वाल्मीकि 15 हजार
- अन्य 1.22 लाख