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तीन साल में 14 हजार एफआईआर, एक दरोगा पर छह हजार मुकदमों का भार
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तीन साल में 14 हजार एफआईआर, एक दरोगा पर छह हजार मुकदमों का भार
बुलंदशहर। बिजली चोरी के मुकदमों के निस्तारण के लिए सरकार ने प्रत्येक जिले में बिजली थाना खोला था। वर्ष 2019 में सरकार के आदेश पर जिले में थाना बनाया गया तो बिजली चोरी के मामलों के जल्द निस्तारण की आस जगी लेकिन थाने में स्टाफ की कमी के कारण हालात जस के तस हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 2442 मुकदमे ही निस्तारित हो सके हैं और 11867 मामले में कार्रवाई का इंतजार है।
वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने बिजली चोरी के मामले की जांच के लिए बिजली थाना बनाने का आदेश दिया था। योजना के तहत हाईडिल कॉलोनी में बिजली थाना बनाया गया। थाना खुलने के बाद से अब तक बिजली चोरी के कुल 14326 मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इनमें से केवल 2452 मामलों में ही फाइनल रिपोर्ट लगाकर उपभोक्ताओं से जुर्माना वसूला गया है।
पहले यह होती थी व्यवस्था
बिजली थाना खोले जाने से पहले सामान्य थानों में ही अधिकारियों द्वारा बिजली चोरी के मुकदमे दर्ज कराए जाते थे। थानों में अपराध के मामले अधिक होने और विवेचना में समय अधिक लगने के कारण बिजली चोरी के मामले समय पर निस्तारित नहीं हो पाते थे। इसके चलते बिजली विभाग को जुर्माना वसूलने के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता था।
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थाने में यह है स्टाफ का हाल
प्रतिवर्ष थाने में करीब सात हजार मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। इसके बाद भी थाने में केवल एक इंस्पेक्टर, दो दरोगा, दो हेड कांस्टेबल और सात कांस्टेबल तैनात किए हैं। जबकि इतनी बड़ी संख्या में दर्ज मुकदमों के निस्तारण के लिए न्यूनतम चार इंस्पेक्टर, छह दरोगा, 10 हेड कांस्टेबल और 15 कांस्टेबल तैनात किए जाने जरूरी है।
वर्ष दर्ज मुकदमे निस्तारित
2019 4561 1209
2020 7894 1229
2021 1871 14
थाना खुलने के बाद से अभी तक 14 हजार से अधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें से करीब ढाई हजार मुकदमों का निस्तारण कर दिया गया है। थाने में स्टाफ की कुछ कमी है। इसके बाद भी प्रयास किया जा रहा है कि अधिक से अधिक मुकदमों का शीघ्र निस्तारण किया जा सके। - धर्मेंद्र यादव, थाना प्रभारी
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बुलंदशहर। बिजली चोरी के मुकदमों के निस्तारण के लिए सरकार ने प्रत्येक जिले में बिजली थाना खोला था। वर्ष 2019 में सरकार के आदेश पर जिले में थाना बनाया गया तो बिजली चोरी के मामलों के जल्द निस्तारण की आस जगी लेकिन थाने में स्टाफ की कमी के कारण हालात जस के तस हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 2442 मुकदमे ही निस्तारित हो सके हैं और 11867 मामले में कार्रवाई का इंतजार है।
वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने बिजली चोरी के मामले की जांच के लिए बिजली थाना बनाने का आदेश दिया था। योजना के तहत हाईडिल कॉलोनी में बिजली थाना बनाया गया। थाना खुलने के बाद से अब तक बिजली चोरी के कुल 14326 मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इनमें से केवल 2452 मामलों में ही फाइनल रिपोर्ट लगाकर उपभोक्ताओं से जुर्माना वसूला गया है।
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पहले यह होती थी व्यवस्था
बिजली थाना खोले जाने से पहले सामान्य थानों में ही अधिकारियों द्वारा बिजली चोरी के मुकदमे दर्ज कराए जाते थे। थानों में अपराध के मामले अधिक होने और विवेचना में समय अधिक लगने के कारण बिजली चोरी के मामले समय पर निस्तारित नहीं हो पाते थे। इसके चलते बिजली विभाग को जुर्माना वसूलने के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता था।
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थाने में यह है स्टाफ का हाल
प्रतिवर्ष थाने में करीब सात हजार मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। इसके बाद भी थाने में केवल एक इंस्पेक्टर, दो दरोगा, दो हेड कांस्टेबल और सात कांस्टेबल तैनात किए हैं। जबकि इतनी बड़ी संख्या में दर्ज मुकदमों के निस्तारण के लिए न्यूनतम चार इंस्पेक्टर, छह दरोगा, 10 हेड कांस्टेबल और 15 कांस्टेबल तैनात किए जाने जरूरी है।
वर्ष दर्ज मुकदमे निस्तारित
2019 4561 1209
2020 7894 1229
2021 1871 14
थाना खुलने के बाद से अभी तक 14 हजार से अधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें से करीब ढाई हजार मुकदमों का निस्तारण कर दिया गया है। थाने में स्टाफ की कुछ कमी है। इसके बाद भी प्रयास किया जा रहा है कि अधिक से अधिक मुकदमों का शीघ्र निस्तारण किया जा सके। - धर्मेंद्र यादव, थाना प्रभारी