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अस्पतालों में खाट लेकर आ रहे मरीज

Mon, 19 Sep 2016 10:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर Updated Mon, 19 Sep 2016 10:35 PM IST
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All government and private hospitals beds full
अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चे - फोटो : amarujala

बुखार से जिले में हाहाकार मचा हुआ है। जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की लाइन लगी हैं। स्थिति ये है कि अस्पतालों में अब बेड तक उपलब्ध नहीं है। मरीज खुद ही अपनी चारपाई साथ ला रहे हैं।

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जिला अस्पताल में 160 बेडों की क्षमता है, जबकि मरीज 260 भर्ती हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और निजी अस्पतालों में मरीजों की भरमार है। आलम ये है कि निजी अस्पतालों में भी एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
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अस्पताल की बेंच, फर्श तक पर मरीज पड़े हुए हैं। जिन मरीजों को बेंच नहीं मिल पा रही, उनके तीमारदार खुद ही अपनी चारपाई  घर से ला रहे हैं। निजी अस्पतालों के अलावा अपंजीकृत चिकित्सक भी जमकर चांदी काट रहे हैं। अपंजीकृत चिकित्सक धड़ल्लेे से मरीजों को देख रहे हैं।
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जनपद में फैले बुखार के प्रकोप में घिरे स्वास्थ्य अधिकारियों का ध्यान भी अब इनकी तरफ नहीं पहुंच रहा है। मरीजों की जहां बुखार से कमर टूट रही है, तो वहीं जेब पर भी बोझ पड़ रहा है। डॉक्टर से लेकर मेडिकल स्टोर और निजी लैबों पर मनमाने तरीके से फीस वसूली की जा रही है।

30 रुपये में होने वाली जांच 150 रुपये तक में हो रही है। पैरासिटामोल की दवा पर भी मेडिकल स्टोर संचालक मनमानी कर रहे हैं। मरीजों का अनापशनाप बिल बनाया जा रहा है। सीएमओ डा. दीपक ओहरी का कहना है कि जिला अस्पताल समेत सभी अस्पताल प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि बुखार से पीड़ित मरीजों को बेहतर देखभाल की जाए।

मरीजों को शुद्ध और ताजा भोजन देने के निर्देश दिए गए हैं। मरीज अधिक होने और बैड सीमित होने के कारण थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

दरवाजों पर टांगकर चढ़ाई जा रहीं बोतलें
क्षेत्र में फैले बुखार के प्रकोप के बाद राजकीय और निजी अस्पतालों में अव्यवस्थाओं की भरमार हो गई है। मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं, इसके चलते लोगों को खिड़की और दरवाजों पर टांगकर बोतलें चढ़ाई जा रही हैं।  

मरीज लाने को कम पड़ गईं समाजवादी एंबुलेंस
रोजाना हजारों लोग बुखार की चपेट में आ रहे हैं। आलम यह है कि देहात क्षेत्रों से उपचार के लिए अस्पतालों तक मरीजों को पहुंचाने वाली समाजवादी एंबुलेंस भी कम पड़ रहीं हैं। रोजाना मरीज एंबुलेंस की शिकायत कर रहे हैं। कुछ लोग मरीज को कंधे पर लिटाकर और भैंसा बुग्गी से ही अस्पतालों पहुंचा रहे हैं।

बुखार का प्रकोप देख काम पर लौटे डॉक्टर
बुखार के प्रकोप में मरीजों को मरता देख जिलेभर के संविदा चिकित्सक और कर्मचारी पांच दिन बाद काम पर लौट आए। हालांकि  सरकार के विरोध में चिकित्सक और कर्मचारी डटे रहेंगे। चिकित्सक सभी सरकारी कार्यों से विरत रहेंगे, सिर्फ बुखार से पीड़ित मरीजों का उपचार दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले पांच दिनों से हड़ताल पर थे। बुखार का तांडव देख संविदा चिकित्सकों और कर्मियों ने स्वयं हड़ताल खत्म कर दी है।

यूनियन के जिलाध्यक्ष डॉ. संतोष गुप्ता का कहना है कि उनका विरोध जारी रहेगा। वह सिर्फ मानवीय आधार पर अपनी हड़ताल वापस ले रहे हैं। सरकारी कार्यों का बहिष्कार रहेगा। सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी का कहना है कि संविदा चिकित्सकों की हड़ताल खत्म होने से अस्पतालों की व्यवस्था सुधरेगी।

एक बेड पर चार मरीज
 डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और वायरल लोगों पर कहर बनकर टूट रहा है। शहर के बड़े से बड़े अस्पतालों में मरीजों की भरमार है। आलम यह है कि अस्पतालों में एक बेड पर चार-चार मरीज रहने को मजबूर हैं। 

बुखार से युवक समेत दो की मौत
पहासू और छतारी क्षेत्र में युवक समेत दो लोगों की बुखार ने जान ले ली। जिले में बुखार का कहर जारी है और अब तक मरने वालों की संख्या 89 हो गई है। बुखार के कहर से जिले की जनता में दहशत है। छतारी के गांव कीरतपुर में बुखार से दर्जनों लोग बीमार हैं।

पहासू के मोहल्ला काजीखेल निवासी युवक की बुखार से मौत हो गई। उसका दिल्ली स्थित अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था। मौत के बाद से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। जमील खां (22) पुत्र नत्थू खां को एक सप्ताह पूर्व बुखार हुआ था।

पहले तो परिजनों ने स्थानीय चिकित्सकों से उपचार कराया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। वहां भी आराम न मिलने पर परिजन उसे लेकर दिल्ली स्थित तेगबहादुर अस्पताल गए। जहां उपचार के दौरान रविवार रात जमील ने दमतोड़ दिया। जमील की मौत के बाद से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।


दूसरी ओर छतारी क्षेत्र के गांव कीरतपुर में बुखार की चपेट में आने से अधेड़ की मौत हो गई। सुभाष (50) पुत्र महेंद्र सिंह पिछले दस दिनों से बुखार से पीड़ित थे। परिजनों ने प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं आया। सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई। इन दो मौतों के साथ ही जिले में बुखार से मरने वालों की संख्या 89 हो गई है। 

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