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जर्जर 71 आंगनबाड़ी केंद्रों की बदलेगी सूरत
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अनूपशहर क्षेत्र में जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र।
- फोटो : BULANDSHAHR
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जर्जर 71 आंगनबाड़ी केंद्रों की बदलेगी सूरत
बुलंदशहर। जिले में 71 आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हो चुके हैं। इसके चलते इनका संचालन भी नहीं हो रहा है। विभाग ने इनके जीर्णोद्धार और ध्वस्तीकरण के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही शासन से इस बारे में दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
जिले में 3967 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 722 आंगनबाड़ी केंद्र बाल एवं पुष्टाहार विभाग की हैं। जबकि शेष आंगनबाड़ी केंद्र बेसिक शिक्षा के स्कूलों में संचालित हैं। यहां पर छह साल तक के बच्चों को अक्षर ज्ञान देने के साथ उन्हें पोषाहार के तहत भोजन उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अलावा यहीं से कुपोषित बच्चों, गर्भवती और धाती महिलाओं के अलावा 14 साल तक की उन किशोरियों को भी पोषाहार दिया जाता है, जो स्कूल नहीं जाती हैं। विभागीय अफसरों के अनुसार जर्जर हो चुके केंद्रों का संचालन बेसिक शिक्षा के स्कूल या फिर गांव की ग्राम पंचायत आदि पर किया जा रहा है।
जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों के ध्वस्तीकरण और जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उस पर काम किया जाएगा। - हरिओम वाजपेयी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल एवं पुष्टाहार विभाग।
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बुलंदशहर। जिले में 71 आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हो चुके हैं। इसके चलते इनका संचालन भी नहीं हो रहा है। विभाग ने इनके जीर्णोद्धार और ध्वस्तीकरण के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही शासन से इस बारे में दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
जिले में 3967 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 722 आंगनबाड़ी केंद्र बाल एवं पुष्टाहार विभाग की हैं। जबकि शेष आंगनबाड़ी केंद्र बेसिक शिक्षा के स्कूलों में संचालित हैं। यहां पर छह साल तक के बच्चों को अक्षर ज्ञान देने के साथ उन्हें पोषाहार के तहत भोजन उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अलावा यहीं से कुपोषित बच्चों, गर्भवती और धाती महिलाओं के अलावा 14 साल तक की उन किशोरियों को भी पोषाहार दिया जाता है, जो स्कूल नहीं जाती हैं। विभागीय अफसरों के अनुसार जर्जर हो चुके केंद्रों का संचालन बेसिक शिक्षा के स्कूल या फिर गांव की ग्राम पंचायत आदि पर किया जा रहा है।
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जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों के ध्वस्तीकरण और जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उस पर काम किया जाएगा। - हरिओम वाजपेयी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल एवं पुष्टाहार विभाग।
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