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Bulandshahar News: राजगढ़ी पहुंची पशु चिकित्सकों की टीम, लंपी से बीमार पशुओं का किया टीकाकरण
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बुलंदशहर/औरंगाबाद। जिले में लंपी स्किन डिजीज बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। गांव राजगढ़ी में दो व नगर की अंबा कॉलोनी में एक गाय की मौत का समाचार अमर उजाला में प्रकाशित होने पर विभाग हरकत में आया। पशु चिकित्सकों की टीम सोमवार को गांव में पहुंची और लंपी से बीमार पशुओं का टीकाकरण किया। साथ ही रामगढ़ की गोशाला में गायों में बीमारी के लक्षण पाए जाने पर वहां भी टीकाकरण किया गया।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि गांव राजगढ़ी व रामगढ़ की गोशाला में गायों में लंपी की बीमारी के लक्षण की सूचना मिली थी। इस पर वह स्वयं पशु चिकित्सकों की टीम के साथ राजगढ़ी और रामगढ़ की गोशाला पहुंचे। जहां बीमार गायों का उपचार व टीकाकरण किया। टीम ने रामगढ़ की गोशाला का निरीक्षण किया, जहां कई गायों में लंपी बीमारी के लक्षण मिले। पशु चिकित्सकों ने तत्काल सभी संक्रमित पशुओं को अलग कर उनका इलाज शुरू किया और स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण किया। गोशाला परिसर में दवा का छिड़काव भी कराया गया। उन्होंने ने बताया कि विभाग बीमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क है। जिले में लंपी से बचाव के लिए 1.50 लाख वैक्सीन प्राप्त हुई हैं, जिनमें से अब तक 70 हजार गोवंश को वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सभी ब्लॉकों में पशु चिकित्सकों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और पशुपालकों को बीमारी से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर गांव पहाड़पुर निवासी ओमप्रकाश पालीवाल ने बताया कि उनके चार पशु बीमारी से पीड़ित हैं। एक पशु की मौत हो चुकी है। वैक्सीन लगने के बाद भी पशुओं में सुधार नहीं है।
लंपी बीमारी के ये हैं लक्षण
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज गाय और भैंस में होने वाला एक वायरल है। यह मच्छर, मक्खी, चिचड़ी से एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से फैलता है।
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मुख्य लक्षण:
शुरुआती लक्षण
-तेज बुखार 104-106 डिग्री तक, भूख कम लगना, सुस्त होना, दूध कम देना, आंख और नाक से पानी बहना।
चमड़ी पर लक्षण: पूरे शरीर पर खासकर सिर, गर्दन, थन और पैरों पर 2 से 5 सेमी की कठोर, गोल गांठें बनना, गांठों में से मवाद निकलना और घाव बन जाना, पैरों में सूजन, चलने में दिक्कत होना।
उपचार और बचाव
यह वायरल बीमारी है, इसका कोई सीधा एंटी वायरल इलाज नहीं है, लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है।
बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर दें। डॉक्टर के आने तक पशु को छायादार व साफ जगह पर रखें।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि गांव राजगढ़ी व रामगढ़ की गोशाला में गायों में लंपी की बीमारी के लक्षण की सूचना मिली थी। इस पर वह स्वयं पशु चिकित्सकों की टीम के साथ राजगढ़ी और रामगढ़ की गोशाला पहुंचे। जहां बीमार गायों का उपचार व टीकाकरण किया। टीम ने रामगढ़ की गोशाला का निरीक्षण किया, जहां कई गायों में लंपी बीमारी के लक्षण मिले। पशु चिकित्सकों ने तत्काल सभी संक्रमित पशुओं को अलग कर उनका इलाज शुरू किया और स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण किया। गोशाला परिसर में दवा का छिड़काव भी कराया गया। उन्होंने ने बताया कि विभाग बीमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क है। जिले में लंपी से बचाव के लिए 1.50 लाख वैक्सीन प्राप्त हुई हैं, जिनमें से अब तक 70 हजार गोवंश को वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सभी ब्लॉकों में पशु चिकित्सकों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और पशुपालकों को बीमारी से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर गांव पहाड़पुर निवासी ओमप्रकाश पालीवाल ने बताया कि उनके चार पशु बीमारी से पीड़ित हैं। एक पशु की मौत हो चुकी है। वैक्सीन लगने के बाद भी पशुओं में सुधार नहीं है।
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लंपी बीमारी के ये हैं लक्षण
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज गाय और भैंस में होने वाला एक वायरल है। यह मच्छर, मक्खी, चिचड़ी से एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से फैलता है।
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मुख्य लक्षण:
शुरुआती लक्षण
-तेज बुखार 104-106 डिग्री तक, भूख कम लगना, सुस्त होना, दूध कम देना, आंख और नाक से पानी बहना।
चमड़ी पर लक्षण: पूरे शरीर पर खासकर सिर, गर्दन, थन और पैरों पर 2 से 5 सेमी की कठोर, गोल गांठें बनना, गांठों में से मवाद निकलना और घाव बन जाना, पैरों में सूजन, चलने में दिक्कत होना।
उपचार और बचाव
यह वायरल बीमारी है, इसका कोई सीधा एंटी वायरल इलाज नहीं है, लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है।
बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर दें। डॉक्टर के आने तक पशु को छायादार व साफ जगह पर रखें।