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Bulandshahar News: बन रहा दुर्लभ संयोग, अमृत सिद्धि योग में होगा जलाभिषेक
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बुलंदशहर। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि पर रविवार को महाशिवरात्रि विशेष योग के बीच श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी शाम 4:23 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर रात्रि भर रहेगी।
अर्द्धरात्रि में चतुर्दशी होने के कारण इसी दिन महाशिवरात्रि व्रत रखा जाना शास्त्रसम्मत और फलदायी होगा। अमृत सिद्धि योग में पूजा-अर्चना होगी।
गांव गंगेरूआ स्थित श्री द्वादशमहालिंगेश्वर सिद्धमहापीठ के आचार्य मंजीत धर्मध्वज ने बताया कि ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि उत्तराषाढ़ नक्षत्र शाम 7:26 बजे तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। व्यतिपात योग दोपहर 2:45 बजे तक रहेगा, इसके बाद वरियान योग लगेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग पूरे दिन-रात रहेगा।
निशीथ काल रात 11:52 बजे से 12:42 मिनट तक रहेगा, जो भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। इस तरह से पूरा दिन जलाभिषेक किया जा सकेगा। बताया कि इसी दिन अर्द्धरात्रि में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है।
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बताया कि अभिजित मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जिसमें पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। अमृत सिद्धि योग में शिव आराधना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पं. अंकुर शर्मा के मुताबिक बुधादित्य राजयोग बना रहे हैं। सूर्य और शुक्र के मेल से शुक्रादित्य योग बन रहा है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु पंचग्रह भी राजयोग बना रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार, इन पांच विशेष योगों का एक साथ बनना दुर्लभ संयोग है।
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अर्द्धरात्रि में चतुर्दशी होने के कारण इसी दिन महाशिवरात्रि व्रत रखा जाना शास्त्रसम्मत और फलदायी होगा। अमृत सिद्धि योग में पूजा-अर्चना होगी।
गांव गंगेरूआ स्थित श्री द्वादशमहालिंगेश्वर सिद्धमहापीठ के आचार्य मंजीत धर्मध्वज ने बताया कि ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि उत्तराषाढ़ नक्षत्र शाम 7:26 बजे तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। व्यतिपात योग दोपहर 2:45 बजे तक रहेगा, इसके बाद वरियान योग लगेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग पूरे दिन-रात रहेगा।
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निशीथ काल रात 11:52 बजे से 12:42 मिनट तक रहेगा, जो भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। इस तरह से पूरा दिन जलाभिषेक किया जा सकेगा। बताया कि इसी दिन अर्द्धरात्रि में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है।
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बताया कि अभिजित मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जिसमें पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। अमृत सिद्धि योग में शिव आराधना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पं. अंकुर शर्मा के मुताबिक बुधादित्य राजयोग बना रहे हैं। सूर्य और शुक्र के मेल से शुक्रादित्य योग बन रहा है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु पंचग्रह भी राजयोग बना रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार, इन पांच विशेष योगों का एक साथ बनना दुर्लभ संयोग है।