फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   बुलंदशहर की जमीन पर गैंगवार के अंकुर

बुलंदशहर की जमीन पर गैंगवार के अंकुर

Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
Bulandshahr
Bulandshahr Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
बुलंदशहर। क्राइम कैपिटल कही जाने वाली पश्चिमी यूपी में गैंगवार की आहट ने पुलिस को चौकन्ना कर दिया। मेरठ के करनावल में हुए तिहरे मर्डर में यहां के जतन रिसोही गैंग के तीन गुर्गों के नाम सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को सबूत मिल रहे हैं कि कई गैंग के मुखियाओं की मौत के बाद उनके सदस्य मौजूदा सक्रिय और खतरनाक गैंग से हाथ मिलाकर जरायम को अंजाम दे रहे हैं। एसटीएफ भी दुश्मन गिरोह के सदस्यों में हो रही दोस्ती को खतरनाक मानकर ऐसे अपराधियों की कुंडली खंगालने में जुट गई है।
विज्ञापन

पुलिस रिकार्ड में बुलंदशहर में इस समय 41 गैंग दर्ज हैं। उसके 265 सदस्यों ने जिले ही नहीं वेस्ट यूपी में कोहराम मचा रखा है। सर्वाधिक छह गैंग सिकंदराबाद में हैं। इन 41 गैंग से 79 सदस्य जेल में हैं। 95 की जुर्म की दुनिया में सक्रियता लगातार पुलिस को मिल रही है। 90 ऐसे हैं जिनके बारे में पुलिस को कोई पता ही नहीं चल रहा है। वह बेहद गोपनीय तरीके से जुर्म कर रहे हैं।
विज्ञापन

एसटीएफ और पुलिस के पास पहुंची जानकारी के मुताबिक सहंसरपाल और जतन सिरोही दोनों ही मारे जा चुके हैं। इनके गिरोह के सदस्य अपना वजूद बरकरार रखे हुए हैं, लेकिन उनमें से कई ने दूसरे गैंग से हाथ मिला लिया है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक करनावल ट्रिपल मर्डर में शूटरों के नाम जतन सिरोही गैंग से निकल रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कैसे शुरू हुआ गठजोड़
मेरठ के सरूरपुर के भदौड़ा में हुई प्रमोद भदौड़ा की हत्या के बाद से ही ताजी गैंगवार शुरू हुई। भाई की हत्या का बदला लेने के लिए गाजियाबाद कचहरी में ऊधम पर भदौड़ा गैंग ने हमला किया। ऊधम के साथ तीन गैंग जुड़े हैं। भदौड़ा गैंग का बुलंदशहर के जतिन सिरोही गैंग पर वर्चस्व है।

खूनी रहे हैं वेस्ट के हालात
बुलंदशहर में जतन सिरोही और सेंसरपाल के बीच लंबे समय तक गैंगवार छिड़ी रही थी। इस खूनी टकराव में 40 से ज्यादा लोग मारे गए। खूनी कहानी सेंसरपाल और जतन सिरोही की मौत के बाद ही खत्म हुई थी। योगेश भदौड़ा भी बुलंदशहर जेल में बंद रहा। तब वह जतन सिरोही गैंग के करीब आया और जुर्म करने को हाथ मिला लिया।

मोबाइल से जुर्म हुआ ‘मोबाइल’
मोबाइल से अब जुर्म भी मोबाइल हो गया है। अगर इन गैंग के खिलाफ काम करने वाले और बड़े बदमाश धमेंद्र लाला को मुठभेड़ में मारने वाले, एक लाख के ईनामी सुशील मूंछ और बदन सिंह बद्दो को गिरफ्तार करने वाली टीम की जांच पर यकीन किया जो तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

दुश्मन गिरोह खेल रहे दोस्ती का सेफ गेम
पुलिस की मुखबिरी का जाल भेदने के लिए भी बदमाश दोस्ती कर रहे हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक ज्यादातर मामलों में पुलिस को कामयाबी तभी मिली जब किसी गिरोह का कोई सदस्य विभीषण बनकर पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने उससे जानकारी हासिल कर टारगेट को भेद दिया यानी बदमाश को मार गिराया या फिर गिरफ्तार कर लिया। बदमाशों ने भेद देने की परंपरा को खत्म करने के लिए भी दोस्ती कर डाली। ऐसा पुलिस अफसर भी मानते हैं।

एसपी एसटीएफ अन्नत देव का कहना है कि गिरोह के गठजोड़ के खतरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए एसटीएफ लोकल पुलिस के सहयोग से ऐसे बदमाशों की कुंडली खंगाल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed