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राहत: जिले में 885 बच्चों ने कुपोषण से जीती जंग
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गांव ओलीना में कुपोषण से जंग जीतने वाली डिंपल परिजन के साथ।
- फोटो : BULANDSHAHR
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राहत: जिले में 885 बच्चों ने कुपोषण से जीती जंग
बुलंदशहर। जिले के 885 बच्चों ने कुपोषण से जंग जीत ली है। कुपोषण से मुक्ति पा चुके बच्चों के परिजनों में खुशी की लहर है। वहीं, दूसरी ओर जो बच्चे अभी भी कुपोषित हैं, उनका इलाज चल रहा है। साथ ही बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से दिए जाने वाला पोषाहार उपलब्ध करवाया जा रहा है। अफसरों का दावा है कि जनपद को जल्द से जल्द कुपोषण मुक्त करने पर काम चल रहा है।
शासन की ओर से कुपोषित बच्चों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर ऐसे बच्चों का उपचार किया जाता है। जबकि बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से पोषाहार दिया जाता है। साथ ही समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्र पर पंजीकृत पांच साल तक के बच्चों का वजन किया जाता है। इसके माध्यम से ही कुपोषित और स्वस्थ बच्चों का पता चलता है। अक्तूबर माह में जिले में पोषण माह के तहत बच्चों का वजन किया गया। इस दौरान 3,29,016 बच्चों का वजन किया गया। इनमें से 4195 बच्चे कुपोषण की लाल श्रेणी में पाए गए। जबकि 11,350 बच्चे कुपोषण की पीली श्रेणी में मिले। इसी तरह 3,13,470 बच्चे हरी श्रेणी में स्वस्थ पाए गए। कुपोषित बच्चों की कुल संख्या 16,430 है। जबकि इससे पहले कुपोषित बच्चों की संख्या 17,315 थी। इस तरह से अब 885 बच्चे कुपोषण से निजात पा चुके हैं।
जनपद में पांच साल तक के बच्चों की स्थिति
कुल बच्चों की संख्या: 3,29,016
स्वस्थ बच्चों की संख्या: 3,13,470
कुपोषण की लाल श्रेणी में शामिल बच्चे: 4195
कुपोषण की पीली श्रेणी में शामिल बच्चे: 11,350
केस:1
गांव शेखपुर निवासी देवी शर्मा ने बताया कि मेरा पुत्र यक्षित इस समय 11 माह का है। जिस समय उसने जन्म लिया था तो वह काफी कमजोर था। जब जांच कराई तो पता चला कि वह कुपोषित है। इसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर उसे दवा के साथ दूध, दलिया और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ दिए गए। आशा और एएनएम भी समय-समय पर उसकी जांच करती रहीं। इसी का नतीजा रहा कि अब मेरा बच्चा स्वस्थ है।
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केस:2
गांव औलीना निवासी डिंपल के ताऊ राजू ने बताया कि मेरी भतीजी दो साल की है। वह बचपन से ही कुपोषित थी और उसमें खून की कमी थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग और बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से किए गए प्रयास के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया और समय-समय पर दूध, दलिया और पौष्टिक आहार के साथ समय पर दवा भी दी गई। डिंपल के स्वस्थ होने पर परिवार में खुशी है।
केस:3
गांव धारकपुर निवासी प्रमोद ने बताया कि मेरा बेटा त्रिलोकी चार साल का है। जब हमें पता चला कि वह कुपोषण का शिकार है तो उसके स्वास्थ्य की चिंता सताने लगी थी। एएनएम और आशा की ओर से समय पर दवाई मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से पोषाहार मिला, जिसे समय पर खिलाने से अब त्रिलोकी लगभग पूरी तरह स्वस्थ है। अब चिकित्सकाें ने एक बार और दिवाली के बाद जांच के लिए बुलाया है।
जिले को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। स्वास्थ्य विभाग और बाल एवं पुष्टाहार विभाग मिलकर कुपोषित बच्चों का बराबर ध्यान रखने के साथ समय पर दवा और पोषाहार उपलब्ध करवा रहे हैं। प्रयास है कि जिला जल्द ही कुपोषण से मुक्त हो जाए। - हरिओम वाजपेयी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल एवं पुष्टाहार विभाग
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बुलंदशहर। जिले के 885 बच्चों ने कुपोषण से जंग जीत ली है। कुपोषण से मुक्ति पा चुके बच्चों के परिजनों में खुशी की लहर है। वहीं, दूसरी ओर जो बच्चे अभी भी कुपोषित हैं, उनका इलाज चल रहा है। साथ ही बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से दिए जाने वाला पोषाहार उपलब्ध करवाया जा रहा है। अफसरों का दावा है कि जनपद को जल्द से जल्द कुपोषण मुक्त करने पर काम चल रहा है।
शासन की ओर से कुपोषित बच्चों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर ऐसे बच्चों का उपचार किया जाता है। जबकि बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से पोषाहार दिया जाता है। साथ ही समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्र पर पंजीकृत पांच साल तक के बच्चों का वजन किया जाता है। इसके माध्यम से ही कुपोषित और स्वस्थ बच्चों का पता चलता है। अक्तूबर माह में जिले में पोषण माह के तहत बच्चों का वजन किया गया। इस दौरान 3,29,016 बच्चों का वजन किया गया। इनमें से 4195 बच्चे कुपोषण की लाल श्रेणी में पाए गए। जबकि 11,350 बच्चे कुपोषण की पीली श्रेणी में मिले। इसी तरह 3,13,470 बच्चे हरी श्रेणी में स्वस्थ पाए गए। कुपोषित बच्चों की कुल संख्या 16,430 है। जबकि इससे पहले कुपोषित बच्चों की संख्या 17,315 थी। इस तरह से अब 885 बच्चे कुपोषण से निजात पा चुके हैं।
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जनपद में पांच साल तक के बच्चों की स्थिति
कुल बच्चों की संख्या: 3,29,016
स्वस्थ बच्चों की संख्या: 3,13,470
कुपोषण की लाल श्रेणी में शामिल बच्चे: 4195
कुपोषण की पीली श्रेणी में शामिल बच्चे: 11,350
केस:1
गांव शेखपुर निवासी देवी शर्मा ने बताया कि मेरा पुत्र यक्षित इस समय 11 माह का है। जिस समय उसने जन्म लिया था तो वह काफी कमजोर था। जब जांच कराई तो पता चला कि वह कुपोषित है। इसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर उसे दवा के साथ दूध, दलिया और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ दिए गए। आशा और एएनएम भी समय-समय पर उसकी जांच करती रहीं। इसी का नतीजा रहा कि अब मेरा बच्चा स्वस्थ है।
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केस:2
गांव औलीना निवासी डिंपल के ताऊ राजू ने बताया कि मेरी भतीजी दो साल की है। वह बचपन से ही कुपोषित थी और उसमें खून की कमी थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग और बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से किए गए प्रयास के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया और समय-समय पर दूध, दलिया और पौष्टिक आहार के साथ समय पर दवा भी दी गई। डिंपल के स्वस्थ होने पर परिवार में खुशी है।
केस:3
गांव धारकपुर निवासी प्रमोद ने बताया कि मेरा बेटा त्रिलोकी चार साल का है। जब हमें पता चला कि वह कुपोषण का शिकार है तो उसके स्वास्थ्य की चिंता सताने लगी थी। एएनएम और आशा की ओर से समय पर दवाई मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से पोषाहार मिला, जिसे समय पर खिलाने से अब त्रिलोकी लगभग पूरी तरह स्वस्थ है। अब चिकित्सकाें ने एक बार और दिवाली के बाद जांच के लिए बुलाया है।
जिले को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। स्वास्थ्य विभाग और बाल एवं पुष्टाहार विभाग मिलकर कुपोषित बच्चों का बराबर ध्यान रखने के साथ समय पर दवा और पोषाहार उपलब्ध करवा रहे हैं। प्रयास है कि जिला जल्द ही कुपोषण से मुक्त हो जाए। - हरिओम वाजपेयी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल एवं पुष्टाहार विभाग