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Bulandshahar News: राष्ट्रीय लोक अदालत में 82 हजार वादों का हुआ सुलह-समझौते से निस्तारण

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 09 Dec 2023 11:08 PM IST
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82 thousand cases settled in National Lok Adalat through conciliation agreement
संवाद न्यूज एजेंसी
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बुलंदशहर।
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को दीवानी न्यायालय, जनपद बुलंदशहर व वाह्य स्थित न्यायालय खुर्जा, अनूपशहर और ग्रामीण न्यायालय स्याना व डिबाई समेत सभी तहसीलों पर किया गया। इस दौरान कुल 82016 वादों का निस्तारण सुलह समझौतों के आधार पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला जज और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के वरिष्ठ लिपिक पंकज कुमार जौहरी ने बताया कि लोक अदालत में आपराधिक मामले के 7194 वादों में 6,64,940 रुपये अर्थदंड भी वसूल किया गया। जबकि, 50 मोटर दुर्घटना प्रतिकर वादों का निस्तारण किया गया। इसमें 3,46,48,000 रुपये का मुआवजा दिलाया गया। वहीं, परिवार न्यायालयों द्वारा कुल 122 वैवाहिक वाद निस्तारित किए गए। 138 एनआई एक्ट के आठ वाद निस्तारित कर 86,10,160 रुपये की धनराशि वसूल की गई। वहीं, 64 सिविल वाद निस्तारित किए गए। 260 (153 एफआर और 107 विद्युत) विद्युत वाद में 1,07,300 रुपये की धनराशि वसूल की गई। स्थायी लोक अदालत ने 1,22,000 के छह वाद, अन्य प्रकृति के 20 वाद निस्तारित किए। साथ ही छह वाद डीएलएसए वैवाहिक प्री-लिटिगेशन के निस्तारित हुए। 696 बैंक प्रीलिटिगेशन विवादों में लोन की धनराशि 11,92,05,344 रुपये थी, जिसमें 7,32,76,002 रुपये की धनराशि पर समझौता कराकर उसी समय नकद 1,58,19,311 की धनराशि जमा कराई गई। साथ ही 73590 अन्य प्रीलिटिगेशन वाद 2,50,806 रुपये के प्रशासन द्वारा निस्तारित किए गए हैं। लोक अदालत के अंत में जनपद न्यायाधीश ने राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए सभी न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, बीमा कंपनी व बैंक के अधिकारी, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादकारियों को धन्यवाद कहा।
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छह साल में सुलझा मकान का विवाद

अधिवक्ता पुनीत कुमार राघव ने बताया कि वादी अंचन शर्मा निवासी गांव अमरगढ़ थाना जहांगीराबाद ने सात जुलाई 2014 को एक मुकदमा लघुवाद न्यायालय में दायर किया था। इसमें उसने बताया था कि वर्ष 2014 में गांव निवासी कैलाश व राकेश से उसका मकान की खरीद को लेकर सौदा हुआ था। यह सौदा 1.20 लाख रुपये में तय हुआ। इसपर उसने एक लाख रुपये आरोपियों को दे दिए और उसका आरोपियों ने एग्रीमेंट कर दिया। लेकिन, अब एग्रीमेंट की समय सीमा समाप्त हो गई, लेकिन आरोपियों ने न तो बैनामा किया और न ही उसके रुपये लौटाए। मामला न्यायालय के समक्ष आने पर शनिवार को दोनों पक्ष लोक अदालत में आए और आपसी सुलह समझौते से वाद का निस्तारण कर लिया है।
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तीन साल बाद हो सका निर्णय
अधिवक्ता अमित चौहान ने बताया कि नगर निवासी लोकेश कुमार ने वर्ष 2021 में नगर कोतवाली में एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उसे कुछ रुपयों की आवश्यकता थी। उस दौरान नगर निवासी जीतपाल ने उसे लोन दिलाने का झांसा दिया। साथ ही इसके एवज में उससे चार ब्लैंक चेक और एक शपथपत्र ले लिया था। लेकिन, आरोपी ने उसका लोन नहीं कराया। बल्कि उसके चेक का गलत इस्तेमाल किया। चेक पर रकम भरकर बैंक से बाउंस करा दिए गए और पीड़ित के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया था। जबकि, पीड़ित के मुकदमे में नगर कोतवाली पुलिस ने एफआर लगा दी थी। वहीं, अब शनिवार को लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच हुए सुलह समझौते के आधार पर फैसला हो गया है। लोकेश ने जीतपाल के खिलाफ 2021 में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। लेकिन, पुलिस ने मामला एफआर लगाकर बंद कर दिया।
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