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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   19 children felt ill after taking pill for deworming during national compaign.

स्कूल में दवाई खाने के बाद 19 बच्चे पड़े बीमार

Thu, 11 Feb 2016 10:53 PM IST
अमर उजाला, बुलंदशहर
अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Thu, 11 Feb 2016 10:53 PM IST
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19 children felt ill after taking pill for deworming during national compaign.
शिकारपुर के गांव खखूंड़ा में कृमि मुक्ति दिवस के दौरान एलबेंडाजोल दवा खाने के बाद 19 बच्चों की हालत लंच के बाद बिगड़ी। एमपी पब्लिक स्कूल में कुछ बच्चे पेट दर्द, सिर दर्द और उल्टी की शिकायत करने लगे।
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बच्चों की तबीयत बिगड़ती देख स्कूल प्रबंधक ने एंबुलेंस बुलाई और बच्चों को अस्पताल भेजा और अधिकारियों को सूचना दी। इसकी सूचना पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान सीएचसी पहुंचे और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। एसीएमओ ने बताया कि गोली खाने से बच्चों की हालत नहीं बिगड़ी। दरअसल उन्होंने भंडारे का खाना खा लिया था।
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इसके कारण पेट खराब हुआ और पेट दर्द व उल्टी की शिकायत हुई। डिप्टी सीएमओ ने गांव में कैंप लगवाकर अन्य बच्चों का मेडिकल चेकअप कराया गया, जिसमें सभी की हालत ठीक मिली।

स्कूल प्रबंधक अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि लंच के बाद कुछ बच्चे पेट दर्द, सिर दर्द और उल्टी की शिकायत करने लगे।  वहीं आशा गीतेश ने बताया कि उसके बेटे नरेन्द्र ने भी दवा खाई थी।

घर पहुंचने के बाद उसने सिर दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे गांव के ही एक डॉक्टर से दवा दिलाई गई थी।

ये बच्चे हुए बीमार
अवनीश पुत्र बिजेन्द्र, नरेन्द्र पुत्र विजेन्द्र शर्मा, अमित पुत्र परमानन्द शर्मा, करन पुत्र अतुल, अनमोल पुत्र डाली, संगीता पुत्री बच्चू सिंह, पायल पुत्री रामदत्त, प्रिया पुत्री योगेन्द्र, पुनीत पुत्र मोहन, नंदिनी पुत्री रवि चौधरी, पूजा पुत्री जितेन्द्र, गगन पुत्र सुभाष, डॉली पुत्री योगेंद्र, ललित पुत्र योगेन्द्र, शिल्पी पुत्री मदनलाल, उमा पुत्री सुशील, रीनू पुत्री दीनदयाल, गायत्री पुत्री छोटेलाल, सपना पुत्री राजेश।

दोबारा अस्पताल पहुंचे 4 छात्र
जानकारी के मुताबिक अस्पताल से इलाज कराने के बाद घर पहुंचे बच्चों में से अवनीश, डोली, करन और शिवा को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

एक्सपायर नहीं थी दवा
खखूंड़ा गांव के बच्चों को पेट के कीड़े मारने की जो गोलियां दी गईं, वह एक्सपायरी डेट की नहीं थी। सीडीपीओ किरन सिंह ने बताया कि गोली जुलाई 15 में बनी हुई थी और जून 17 में एक्सपायर होनी थी।

क्या काम करती है यह दवा

एलबेंडाजोल पेट के कीड़ने मारने के लिए काम में आती है। किसी-किसी को इस दवा के खाने से घबराहट हो जाती है। इस दवा के खाने से कुछ मरीजों को बेचैनी भी हो जाती है और उल्टी की शिकायत हो जाती है।

हालांकि इस दवा का कोई ऐसा साइड इफेक्ट नहीं होता कि मरीज को ज्यादा नुकसान हो। इस दवा को गर्भवती महिला और नवजात शिशु को नहीं दिया जाता है। इसके अलावा जिन्हें लीवर के मरीजों को भी नहीं दिया जाता।


चार लाख ने खाई दवा
कृमि मुक्ति दिवस के दौरान जनपद में करीब चार लाख बच्चों ने एलबेंडाजोल की दवा खाई थी। जबकि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य सात लाख बच्चों को दवा खिलाने का था। अभी तीन लाख बच्चों को 15 फरवरी को दवा खिलाई जाएगी।


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