{"_id":"5bc4daa8bdec226993577bf1","slug":"1539627658172010-12-bulandshahr-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"2010-12 की जनणना के आधार पर जिला ओडीएफ घोषित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2010-12 की जनणना के आधार पर जिला ओडीएफ घोषित
Updated Mon, 15 Oct 2018 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
2010-12 की जनगणना के आधार पर जिला ओडीएफ घोषित
बुलंदशहर। वर्ष 2010-12 की जनगणना के आधार पर सोमवार जिले को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) कर दिया। जबकि, चौंकाने वाली बात यह है कि ओडीएफ होने के बाद भी जिले भर के गांवों में लोटा परेड जारी है। हालांकि, शासनादेश के बाद अफसर वंचित परिवारों के अब बेस लाइन सर्वे करने में जुट गए हैं, जिससे जनगणना के आंकड़ों के अलावा पात्र लोगों के शौचालय बनाए जा सकें।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर को खुले से शौच मुक्ति करने की घोषणा की थी। इसके तहत जिले में वर्ष 2010-12 की जनगणना के अनुसार चार लाख आठ हजार परिवारों में से दो लाख 67 हजार 896 परिवारों को पात्र बनाकर उनके घर शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इनमें से 26 हजार 600 परिवारों ने स्वयं शौचालय बनवा लिए थे। जबकि शेष दो लाख 41 हजार 289 परिवारों के शौचालय बनवाए गए हैं। यह काम पूरा होने पर जिले को ओडीएफ कर दिया गया है। इस पर डीएम ने भी मुहर लगा दी है। विभागीय अफसरों का कहना है कि अब बेस लाइन सर्वे कर शेष लोगों के शौचालय बनाए जाएंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले को ओडीएफ तो घोषित कर दिया। लेकिन जिले भर के गांवों में लोटा परेड जारी है। ऐसे में सवाल यह है कि जब सभी घरों में शौचालय नहीं बने तो जिले को कैसे ओडीएफ कर दिया गया। अफसरों का कहना है कि वर्ष 2010-12 की जनगणना के आधार पर निर्धारित लक्ष्य अनुसार शौचालय बनाकर शासन के आदेश पर जिले को ओडीएफ किया गया है।
प्रत्येक गांव में हैं 5 से 50 से अधिक घर शौचालय विहीन
जिले में 951 ग्राम पंचायत और 1176 राजस्व गांव हैं। जिले को बेशक ओडीएफ घोषित कर दिया हो। लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी प्रत्येक गांव में 5 से लेकर 50 से अधिक ऐसे घर हैं, जो शौचालय विहीन हैं। अभी तक बनकर तैयार हो चुके शौचालयों में से दो लाख 19 हजार 300 शौचालयों के ही फोटो अपलोड हुए हैं।
विज्ञापन
तीन दिन में तैयार होगी बेस लाइन सर्वे की रिपोर्ट
शासन के आदेश पर शौचालय विहीन घरों को चिन्हित करने के लिए बेस लाइन सर्वे का काम सोमवार को पूरा हो गया। लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं बनी है। अफसरों का कहना है कि शौचालय विहीन घरों का पता लगाने के लिए जिले भर के गांवों में चलाए गए सर्वे की रिपेार्ट आगामी तीन दिन में तैयार होगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए हैं। इसमें शामिल सभी घरों में शौचालय बनवाने के लिए जल्द ही शासन से राशि की डिमांड की जाएगी।
ओडीएफ के साथ इनको भूले अफसर
जिले को ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया। लेकिन अफसर सरकारी धन लेकर शौचालय न बनवाने वालों के साथ उन प्रधानों और ग्राम सचिव आदि अफसरों के कारनामों को भी भूल चुका है। जिन्होंने गड़बड़झाला कर पुराने शौचालयों को नया बना दिया। या फिर किन्हीं कारणों से अभी तक शौचालय अधूरे हैं। ऐसे गांवों में शफीनगर, बसी बागर, जालपी, खेड़ा अनेक गांव शामिल हैं। साथ ही शौचालय निर्माण विवादों में घिरा रहा। शिकायतों की भरमार रही और आज भी विभाग में अनेक शिकायत पेंडिंग पड़ी हैं।
नगर क्षेत्र अभी नहीं हुआ ओडीएफ
जिले का ग्रामीण क्षेत्र ओडीएफ घोषित कर दिया गया। लेकिन अभी नगर क्षेत्र ओडीएफ नहीं हुआ है। नगर पालिका ईओ एके सिंह का कहना है कि नगर क्षेत्र में शौचालय निर्माण को शतप्रतिशत करवाने के लिए काम अंतिम चरण में है। जल्द ही नगर क्षेत्र को ओडीएफ घोषित कर दिया जाएगा।
कोट
जिले को वर्ष 2010-12 की जनगणना के आधार पर शौचालय निर्माण के लक्ष्य को पूरा करते हुए ओडीएफ घोषित कर दिया है। इस पर जिला अधिकारी अनुज कुमार झा ने भी मुहर लगा दी है। अब शेष शौचालय विहीन घरों में बेस लाइन सर्वे के बाद शौचालय बनाए जाएंगे। - अमरजीत सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी, बुलंदशहर
विज्ञापन
बुलंदशहर। वर्ष 2010-12 की जनगणना के आधार पर सोमवार जिले को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) कर दिया। जबकि, चौंकाने वाली बात यह है कि ओडीएफ होने के बाद भी जिले भर के गांवों में लोटा परेड जारी है। हालांकि, शासनादेश के बाद अफसर वंचित परिवारों के अब बेस लाइन सर्वे करने में जुट गए हैं, जिससे जनगणना के आंकड़ों के अलावा पात्र लोगों के शौचालय बनाए जा सकें।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर को खुले से शौच मुक्ति करने की घोषणा की थी। इसके तहत जिले में वर्ष 2010-12 की जनगणना के अनुसार चार लाख आठ हजार परिवारों में से दो लाख 67 हजार 896 परिवारों को पात्र बनाकर उनके घर शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इनमें से 26 हजार 600 परिवारों ने स्वयं शौचालय बनवा लिए थे। जबकि शेष दो लाख 41 हजार 289 परिवारों के शौचालय बनवाए गए हैं। यह काम पूरा होने पर जिले को ओडीएफ कर दिया गया है। इस पर डीएम ने भी मुहर लगा दी है। विभागीय अफसरों का कहना है कि अब बेस लाइन सर्वे कर शेष लोगों के शौचालय बनाए जाएंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले को ओडीएफ तो घोषित कर दिया। लेकिन जिले भर के गांवों में लोटा परेड जारी है। ऐसे में सवाल यह है कि जब सभी घरों में शौचालय नहीं बने तो जिले को कैसे ओडीएफ कर दिया गया। अफसरों का कहना है कि वर्ष 2010-12 की जनगणना के आधार पर निर्धारित लक्ष्य अनुसार शौचालय बनाकर शासन के आदेश पर जिले को ओडीएफ किया गया है।
विज्ञापन
प्रत्येक गांव में हैं 5 से 50 से अधिक घर शौचालय विहीन
जिले में 951 ग्राम पंचायत और 1176 राजस्व गांव हैं। जिले को बेशक ओडीएफ घोषित कर दिया हो। लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी प्रत्येक गांव में 5 से लेकर 50 से अधिक ऐसे घर हैं, जो शौचालय विहीन हैं। अभी तक बनकर तैयार हो चुके शौचालयों में से दो लाख 19 हजार 300 शौचालयों के ही फोटो अपलोड हुए हैं।
विज्ञापन
तीन दिन में तैयार होगी बेस लाइन सर्वे की रिपोर्ट
शासन के आदेश पर शौचालय विहीन घरों को चिन्हित करने के लिए बेस लाइन सर्वे का काम सोमवार को पूरा हो गया। लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं बनी है। अफसरों का कहना है कि शौचालय विहीन घरों का पता लगाने के लिए जिले भर के गांवों में चलाए गए सर्वे की रिपेार्ट आगामी तीन दिन में तैयार होगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए हैं। इसमें शामिल सभी घरों में शौचालय बनवाने के लिए जल्द ही शासन से राशि की डिमांड की जाएगी।
ओडीएफ के साथ इनको भूले अफसर
जिले को ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया। लेकिन अफसर सरकारी धन लेकर शौचालय न बनवाने वालों के साथ उन प्रधानों और ग्राम सचिव आदि अफसरों के कारनामों को भी भूल चुका है। जिन्होंने गड़बड़झाला कर पुराने शौचालयों को नया बना दिया। या फिर किन्हीं कारणों से अभी तक शौचालय अधूरे हैं। ऐसे गांवों में शफीनगर, बसी बागर, जालपी, खेड़ा अनेक गांव शामिल हैं। साथ ही शौचालय निर्माण विवादों में घिरा रहा। शिकायतों की भरमार रही और आज भी विभाग में अनेक शिकायत पेंडिंग पड़ी हैं।
नगर क्षेत्र अभी नहीं हुआ ओडीएफ
जिले का ग्रामीण क्षेत्र ओडीएफ घोषित कर दिया गया। लेकिन अभी नगर क्षेत्र ओडीएफ नहीं हुआ है। नगर पालिका ईओ एके सिंह का कहना है कि नगर क्षेत्र में शौचालय निर्माण को शतप्रतिशत करवाने के लिए काम अंतिम चरण में है। जल्द ही नगर क्षेत्र को ओडीएफ घोषित कर दिया जाएगा।
कोट
जिले को वर्ष 2010-12 की जनगणना के आधार पर शौचालय निर्माण के लक्ष्य को पूरा करते हुए ओडीएफ घोषित कर दिया है। इस पर जिला अधिकारी अनुज कुमार झा ने भी मुहर लगा दी है। अब शेष शौचालय विहीन घरों में बेस लाइन सर्वे के बाद शौचालय बनाए जाएंगे। - अमरजीत सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी, बुलंदशहर