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अब प्राथमिक विद्यालयों में भी चलेगी ‘संसद’
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:08 AM IST
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अब प्राथमिक विद्यालयों में भी चलेगी ‘संसद’
बुलंदशहर। निजी स्कूलों की तर्ज पर अब परिषदीय विद्यालयों में भी बाल संसद का गठन किया जाएगा। इसमें शामिल बच्चों को विद्यालय में सामाजिक सरोकारों से और व्यवहारिक जानकारी से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी।
राज्य परियोजना निदेशक ने प्राथमिक विद्यालयों में संसद के गठन के लिए प्रदेश के सभी बीएसए को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने बीएसए को निर्देश दिए हैं कि प्राइमरी स्कूलों में बाल संसद और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में मीना मंच का गठन किया जाए। सरकार की इस योजना का मकसद स्कूल के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ जिंदगी से जुड़े अन्य चीजों में भी हिस्सा लेने का मौका प्रदान करना है। बाल संसद का उद्देश्य बच्चों को पाठ्य पुस्तकों और कक्षा की पढ़ाई के साथ ही अन्य जानकारियां उपलब्ध कराना भी है। जिले में 2399 परिषदीय स्कूल हैं। बाल संसद का गठन इन सभी स्कूलों में किया जाना है, जिससे बच्चों की रुचि अन्य क्षेत्रों की तरफ भी बढ़े। इसमें प्रार्थना, योग, व्यायाम, स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, कक्षा की क्रियाएं, अनुशासन, मध्यान्ह भोजन वितरण व्यवस्था, मीना की कहानियां एवं पुस्तकालय की किताबों का वितरण एवं पाठन आदि शामिल होगा।
बाल संसद लोकसभा के मॉडल पर आधारित होगी। हर साल नई बाल संसद का गठन होगा, जिससे कि अधिक से अधिक बच्चों को इसमें प्रतिभाग करने और क्षमता दिखाने का मौका मिल सके। इसमें कैबिनेट के साथ ही विपक्ष भी होगा। संसद में विभिन्न समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा होगी। बाल संसद बच्चों के लिए सांस्कृतिक और सामाजिक दोनों तरह की योजनाएं तैयार करेगी। स्कूल के सभी मामले, निबंध प्रतियोगिता से लेकर वार्षिक खेलकूद तक में आखिरी फैसला बाल संसद का ही होगा। स्कूल के शिक्षक अपने सुझावों से उनकी मदद करेंगे। विपक्ष का काम स्कूल से जुड़ी समस्याओं को उठाना रहेगा। इसके माध्यम से बच्चों में दायित्व बोध और लोकतंत्र के प्रति निष्ठा उत्पन्न होगी। उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास होगा और वह आगे चलकर एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।
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कोट
जिले के सभी परिषदीय स्कूलों में बाल संसद के गठन की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सभी एबीएसए के साथ अन्य संबंधित अफसरों के अलावा स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी निर्देशित किया जा चुका है। बाल सांसद के गठन से बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। - अम्बरीष कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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बुलंदशहर। निजी स्कूलों की तर्ज पर अब परिषदीय विद्यालयों में भी बाल संसद का गठन किया जाएगा। इसमें शामिल बच्चों को विद्यालय में सामाजिक सरोकारों से और व्यवहारिक जानकारी से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी।
राज्य परियोजना निदेशक ने प्राथमिक विद्यालयों में संसद के गठन के लिए प्रदेश के सभी बीएसए को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने बीएसए को निर्देश दिए हैं कि प्राइमरी स्कूलों में बाल संसद और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में मीना मंच का गठन किया जाए। सरकार की इस योजना का मकसद स्कूल के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ जिंदगी से जुड़े अन्य चीजों में भी हिस्सा लेने का मौका प्रदान करना है। बाल संसद का उद्देश्य बच्चों को पाठ्य पुस्तकों और कक्षा की पढ़ाई के साथ ही अन्य जानकारियां उपलब्ध कराना भी है। जिले में 2399 परिषदीय स्कूल हैं। बाल संसद का गठन इन सभी स्कूलों में किया जाना है, जिससे बच्चों की रुचि अन्य क्षेत्रों की तरफ भी बढ़े। इसमें प्रार्थना, योग, व्यायाम, स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, कक्षा की क्रियाएं, अनुशासन, मध्यान्ह भोजन वितरण व्यवस्था, मीना की कहानियां एवं पुस्तकालय की किताबों का वितरण एवं पाठन आदि शामिल होगा।
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बाल संसद लोकसभा के मॉडल पर आधारित होगी। हर साल नई बाल संसद का गठन होगा, जिससे कि अधिक से अधिक बच्चों को इसमें प्रतिभाग करने और क्षमता दिखाने का मौका मिल सके। इसमें कैबिनेट के साथ ही विपक्ष भी होगा। संसद में विभिन्न समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा होगी। बाल संसद बच्चों के लिए सांस्कृतिक और सामाजिक दोनों तरह की योजनाएं तैयार करेगी। स्कूल के सभी मामले, निबंध प्रतियोगिता से लेकर वार्षिक खेलकूद तक में आखिरी फैसला बाल संसद का ही होगा। स्कूल के शिक्षक अपने सुझावों से उनकी मदद करेंगे। विपक्ष का काम स्कूल से जुड़ी समस्याओं को उठाना रहेगा। इसके माध्यम से बच्चों में दायित्व बोध और लोकतंत्र के प्रति निष्ठा उत्पन्न होगी। उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास होगा और वह आगे चलकर एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।
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जिले के सभी परिषदीय स्कूलों में बाल संसद के गठन की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सभी एबीएसए के साथ अन्य संबंधित अफसरों के अलावा स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी निर्देशित किया जा चुका है। बाल सांसद के गठन से बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। - अम्बरीष कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।