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लगातार मौतों के बाद भी नहीं जाग रहा स्वास्थ्य विभाग
Updated Mon, 17 Sep 2018 12:27 AM IST
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लगातार मौतों के बाद भी नहीं जाग रहा स्वास्थ्य विभाग
बुलंदशहर। लगातार हो रही मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं खुल रही। जिले में अफसरों की लापरवाही के चलते अपंजीकृत अस्पतालों का खुलेआम संचालन हो रहा है। आलम यह है कि एक माह से बुखार के अधिकांश पीड़ितों कि मौत इन्हीं अस्पतालों में उपचार के दौरान हुई है। बावजूद इसके अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की साठगांठ के चलते सैकड़ों की संख्या में अपंजीकृत चिकित्सक नर्सिंगहोम/अस्पताल/क्लीनिक खोलकर मरीजों की सेहत और जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। गत अगस्त माह में बुखार से पीड़ित दर्जनों लोगों की अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार कराने के दौरान मौत हो चुकी है और अभी भी हजारों लोग अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार करा रहे है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अफसर और जिला प्रशासन आंख बंद किए हुए है। जानकारी के अनुसार जिले में खुलेआम सैकड़ों की संख्या में नर्सिंगहोम/अस्पताल/क्लीनिक खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इनमें न तो पंजीकृत चिकित्सक हैं और न ही पंजीकृत नर्स इनमें नजर आती हैं। इसके बावजूद इन अवैध अस्पतालों में खुलेआम चिकित्सीय कार्य किया जा रहा है और जब किसी की जान चली जाती है या हालत गंभीर हो जाती है तो पैसा देकर मामले को दबा दिया जाता है। अपंजीकृत अस्पतालों के फैले जाल कि सबसे बड़ी बात यह कि ऐसे चिकित्सकों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर नही पड़ती है। सीएमओ डॉ. केएन तिवारी ने बताया कि अपंजीकृत अस्पतालों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। अपंजीकृत अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। बताया कि अभी तक जिले में 105 नर्सिंग होम और हॉस्पीटल, 124 क्लीनिक, 59 अल्ट्रासाउंड सेंटर और 34 पैथोलॉजी लैब कार्यालय में पंजीकृत है।
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बुलंदशहर। लगातार हो रही मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं खुल रही। जिले में अफसरों की लापरवाही के चलते अपंजीकृत अस्पतालों का खुलेआम संचालन हो रहा है। आलम यह है कि एक माह से बुखार के अधिकांश पीड़ितों कि मौत इन्हीं अस्पतालों में उपचार के दौरान हुई है। बावजूद इसके अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की साठगांठ के चलते सैकड़ों की संख्या में अपंजीकृत चिकित्सक नर्सिंगहोम/अस्पताल/क्लीनिक खोलकर मरीजों की सेहत और जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। गत अगस्त माह में बुखार से पीड़ित दर्जनों लोगों की अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार कराने के दौरान मौत हो चुकी है और अभी भी हजारों लोग अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार करा रहे है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अफसर और जिला प्रशासन आंख बंद किए हुए है। जानकारी के अनुसार जिले में खुलेआम सैकड़ों की संख्या में नर्सिंगहोम/अस्पताल/क्लीनिक खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इनमें न तो पंजीकृत चिकित्सक हैं और न ही पंजीकृत नर्स इनमें नजर आती हैं। इसके बावजूद इन अवैध अस्पतालों में खुलेआम चिकित्सीय कार्य किया जा रहा है और जब किसी की जान चली जाती है या हालत गंभीर हो जाती है तो पैसा देकर मामले को दबा दिया जाता है। अपंजीकृत अस्पतालों के फैले जाल कि सबसे बड़ी बात यह कि ऐसे चिकित्सकों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर नही पड़ती है। सीएमओ डॉ. केएन तिवारी ने बताया कि अपंजीकृत अस्पतालों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। अपंजीकृत अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। बताया कि अभी तक जिले में 105 नर्सिंग होम और हॉस्पीटल, 124 क्लीनिक, 59 अल्ट्रासाउंड सेंटर और 34 पैथोलॉजी लैब कार्यालय में पंजीकृत है।
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