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चलन से दूर नहीं हो पा रहीं पॉलिथीन
Updated Tue, 04 Sep 2018 12:33 AM IST
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चलन से दूर नहीं हो पा रहीं पॉलिथीन
बुलंदशहर। शासन के सख्त आदेशों के बाद भी पॉलिथीन का चलन बंद नहीं हो पा रहा है। न केवल पतली पॉलिथीन बल्कि 50 माइक्रोन से मोटी पॉलिथीन का भी धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। जबकि अफसरों ने शुरुआत में ही खानापूर्ति कर पीछा छुड़ा लिया था।
शासन ने 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से पतली पॉलिथीन व 15 अगस्त से हर प्रकार की पॉलिथीन के प्रयोग पर बैन लगाने के आदेश दिए थे। 15 जुलाई से लागू शासन के आदेशों के बाद पालिका व प्रदूषण विभाग के अफसरों ने कुछ दिन तो अभियान चलाया, लेकिन इसके बाद पॉलिथीन का प्रयोग अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन गया। 15 अगस्त से पॉलिथीन बैन करने के आदेशों के बाद भी अफसरों ने इस पॉलिथीन की रोकथाम के लिए अभी तक कोई अभियान नहीं चलाया है। अब व्यापारी खुलेआम पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन अफसर सबकुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
पॉलिथीन के प्रयोग से होने वाली हानियां
पॉलिथीन जिस स्थान पर फेंकी जाती है वहां आसपास की जमीन को पूरी तरह से बंजर बना देती है। सैकड़ों वर्ष जमीन के अंदर दबे रहने के बाद भी यह न तो गलती है और न ही सड़ती है। बल्कि इससे निकलने वाली गैस लोगों में फेफड़े, सांस, त्वचा समेत अन्य रोग पैदा करती है। वहीं यदि यह पशुओं के पेट में पहुंच जाती है तो इससे उक्त पशु का पाचन तंत्र धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है और चंद दिनों में ही उसकी मौत हो जाती है।
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कुछ दुकानें पर लगे हैं नो पॉलिथीन के पोस्टर
पॉलिथीन के बैन के आदेशों के बाद कुछ लोग सजगता भी दिखा रहे हैं। शहर स्थित कुछ व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों पर नो पॉलिथीन के पोस्टर लगाकर लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं। जिला अस्पताल रोड स्थित दुकान संचालक महेश शर्मा ने बताया कि शासन के आदेशों के बाद प्रतिष्ठान पर पॉलिथीन का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। साथ ही लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है।
कोट-
शासन के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। आदेशों की अवहेलना करने वालों पर जुर्माना व कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही पॉलिथीन के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। - एके सिंह, ईओ नगर पालिका
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बुलंदशहर। शासन के सख्त आदेशों के बाद भी पॉलिथीन का चलन बंद नहीं हो पा रहा है। न केवल पतली पॉलिथीन बल्कि 50 माइक्रोन से मोटी पॉलिथीन का भी धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। जबकि अफसरों ने शुरुआत में ही खानापूर्ति कर पीछा छुड़ा लिया था।
शासन ने 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से पतली पॉलिथीन व 15 अगस्त से हर प्रकार की पॉलिथीन के प्रयोग पर बैन लगाने के आदेश दिए थे। 15 जुलाई से लागू शासन के आदेशों के बाद पालिका व प्रदूषण विभाग के अफसरों ने कुछ दिन तो अभियान चलाया, लेकिन इसके बाद पॉलिथीन का प्रयोग अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन गया। 15 अगस्त से पॉलिथीन बैन करने के आदेशों के बाद भी अफसरों ने इस पॉलिथीन की रोकथाम के लिए अभी तक कोई अभियान नहीं चलाया है। अब व्यापारी खुलेआम पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन अफसर सबकुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
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पॉलिथीन के प्रयोग से होने वाली हानियां
पॉलिथीन जिस स्थान पर फेंकी जाती है वहां आसपास की जमीन को पूरी तरह से बंजर बना देती है। सैकड़ों वर्ष जमीन के अंदर दबे रहने के बाद भी यह न तो गलती है और न ही सड़ती है। बल्कि इससे निकलने वाली गैस लोगों में फेफड़े, सांस, त्वचा समेत अन्य रोग पैदा करती है। वहीं यदि यह पशुओं के पेट में पहुंच जाती है तो इससे उक्त पशु का पाचन तंत्र धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है और चंद दिनों में ही उसकी मौत हो जाती है।
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कुछ दुकानें पर लगे हैं नो पॉलिथीन के पोस्टर
पॉलिथीन के बैन के आदेशों के बाद कुछ लोग सजगता भी दिखा रहे हैं। शहर स्थित कुछ व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों पर नो पॉलिथीन के पोस्टर लगाकर लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं। जिला अस्पताल रोड स्थित दुकान संचालक महेश शर्मा ने बताया कि शासन के आदेशों के बाद प्रतिष्ठान पर पॉलिथीन का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। साथ ही लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है।
कोट-
शासन के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। आदेशों की अवहेलना करने वालों पर जुर्माना व कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही पॉलिथीन के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। - एके सिंह, ईओ नगर पालिका