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गन्ने के सर्वे से जिले की चीनी मिलों ने खींचे हाथ
Updated Wed, 06 Jun 2018 11:34 PM IST
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गन्ने के सर्वे से जिले की चीनी मिलों ने खींचे हाथ
- चीनी के कम दाम और पर्ची जारी करने का काम छीनने के विरोध में लिया निर्णय
- जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों ने संभाली गन्ना सर्वे की कमान
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जिले में गन्ने के रकबे के सर्वे पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिले की चीनी मिलों ने सर्वे से हाथ खींच लिए हैं। इसका कारण चीनी के कम दाम और पर्ची जारी करने का काम चीनी मिलों से छीन लेना बताया जा रहा है। ऐसे में जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों ने सर्वे की कमान संभाल ली है।
जिले में गन्ना पेराई सत्र 2018-19 के लिए रकबे का सर्वे एक जून से शुरू हुआ। इसकी जिम्मेदारी वेव, अनामिका, साबितगढ़ और अनूपशहर शुगर मिल को दी गई, लेकिन चीनी मिलों ने इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के आह्वान पर सर्वे से हाथ खींच लिए। अधिकारियों के मुताबिक चीनी मिलों की मांग है कि चीनी केे दाम बढ़ाए जाएं। साथ ही पर्ची जारी करने का काम उन्हें ही दिया जाए, जबकि शासन ने हाल ही में आदेश जारी कर यह काम सहकारी गन्ना समिति को दे दिया था। मिलों की यह भी मांग है कि गन्ने का रेट और न बढ़ाया जाए। चीनी मिलें मांग पूरी न होने पर आगामी सत्र में मिल न चलाने की भी चेतावनी दे रही हैं। मिलों के विरोध के बाद अब शासन ने आदेश जारी किए हैं कि सर्वे का काम जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से करवाया जाए। इसके लिए कार्यालय के 29 सुपरवाइजरों की टीम बनाकर सर्वे का काम करवाया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर चीनी मिलों की शासन जल्द ही बैठक लेकर उनकी मांग पर विचार-विमर्श करेगा।
सर्वे में होगी देरी, फीता से की जा रही नाप
प्रदेश सरकार के आदेश है कि गन्ना रकबे का सर्वे पीजीएस से किया जाए, लेकिन चीनी मिलों द्वारा सर्वे से हाथ खींच लेने पर अब जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के सुपरवाइजर फीते से सर्वे का काम कर रहे हैं। ऐसे में सर्वे में देरी की आशंका है। इस बार जिले में गन्ना उत्पादन का रकबा 60 हजार हेक्टेयर से अधिक आंका जा रहा है। विगत वर्ष यह रकबा 54 हजार के आसपास था। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी ने बताया कि चीनी मिलों द्वारा गन्ना रकबे के सर्वे से हाथ खींच लेने पर शासन के आदेश पर विभाग के सुपरवाइजरों से मैनुअल सर्वे करवाया जा रहा है। जल्द ही शासन चीनी मिलों के साथ बैठक कर कोई न कोई निर्णय लेगा। जिससे यह समस्या दूर होगी।
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- चीनी के कम दाम और पर्ची जारी करने का काम छीनने के विरोध में लिया निर्णय
- जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों ने संभाली गन्ना सर्वे की कमान
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जिले में गन्ने के रकबे के सर्वे पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिले की चीनी मिलों ने सर्वे से हाथ खींच लिए हैं। इसका कारण चीनी के कम दाम और पर्ची जारी करने का काम चीनी मिलों से छीन लेना बताया जा रहा है। ऐसे में जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों ने सर्वे की कमान संभाल ली है।
जिले में गन्ना पेराई सत्र 2018-19 के लिए रकबे का सर्वे एक जून से शुरू हुआ। इसकी जिम्मेदारी वेव, अनामिका, साबितगढ़ और अनूपशहर शुगर मिल को दी गई, लेकिन चीनी मिलों ने इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के आह्वान पर सर्वे से हाथ खींच लिए। अधिकारियों के मुताबिक चीनी मिलों की मांग है कि चीनी केे दाम बढ़ाए जाएं। साथ ही पर्ची जारी करने का काम उन्हें ही दिया जाए, जबकि शासन ने हाल ही में आदेश जारी कर यह काम सहकारी गन्ना समिति को दे दिया था। मिलों की यह भी मांग है कि गन्ने का रेट और न बढ़ाया जाए। चीनी मिलें मांग पूरी न होने पर आगामी सत्र में मिल न चलाने की भी चेतावनी दे रही हैं। मिलों के विरोध के बाद अब शासन ने आदेश जारी किए हैं कि सर्वे का काम जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से करवाया जाए। इसके लिए कार्यालय के 29 सुपरवाइजरों की टीम बनाकर सर्वे का काम करवाया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर चीनी मिलों की शासन जल्द ही बैठक लेकर उनकी मांग पर विचार-विमर्श करेगा।
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सर्वे में होगी देरी, फीता से की जा रही नाप
प्रदेश सरकार के आदेश है कि गन्ना रकबे का सर्वे पीजीएस से किया जाए, लेकिन चीनी मिलों द्वारा सर्वे से हाथ खींच लेने पर अब जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के सुपरवाइजर फीते से सर्वे का काम कर रहे हैं। ऐसे में सर्वे में देरी की आशंका है। इस बार जिले में गन्ना उत्पादन का रकबा 60 हजार हेक्टेयर से अधिक आंका जा रहा है। विगत वर्ष यह रकबा 54 हजार के आसपास था। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी ने बताया कि चीनी मिलों द्वारा गन्ना रकबे के सर्वे से हाथ खींच लेने पर शासन के आदेश पर विभाग के सुपरवाइजरों से मैनुअल सर्वे करवाया जा रहा है। जल्द ही शासन चीनी मिलों के साथ बैठक कर कोई न कोई निर्णय लेगा। जिससे यह समस्या दूर होगी।
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