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जोर आजमाइश बेकार, नहीं धुल पाया ‘काली’ का दाग
Updated Fri, 20 Apr 2018 11:17 PM IST
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जोर आजमाइश बेकार, नहीं धुल पाया ‘काली’ का दाग
- शहर से गुजर रही काली नदी का पानी हो चुका है जहरीला
- लाख कोशिश के बाद भी नहीं हो पाया काली नदी का पानी साफ
- एनजीटी ने काली की गंदगी को लेकर जताई थी नाराजगी
- काली नदी में नालों से अभी भी गिर रहा है गंदा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। नगर क्षेत्र से गुजरने वाली काली नदी को साफ करने की सारी भागदौड़ बेकार हो चुकी है। आलम यह है कि काली नदी के आस पास के लोगों के घरों में दूषित पानी आ रहा है। जिसे पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। एनजीटी के आदेश पर अफसरों ने भाग-दौड़ खूब करने का दावा किया, लेकिन काली की सेहत में कोई सुधार नहीं हो सका है।
शहर के बीचोंबीच गुजर रही काली नदी पूरी तरह से एक गंदे नाले के रूप में परिवर्तित हो गई है। वर्तमान में आलम यह है कि काली नदी नाम के अनुसार नदी का पानी पूरा काला हो चुका है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला गंदा पानी तथा कूड़ा कचरा इतनी मात्रा में गिरता है कि इसमें क्या बह रहा है यह भी दिखना मुश्किल है। एनजीटी ने दो वर्ष पूर्व काली नदी को साफ करने के अफसरों को आदेश दिए तो उन्होंने इसके लिए भाग-दौड़ अवश्य की, लेकिन अफसरों की भाग दौड़ महज एक दिखावा भर रही। नगर क्षेत्र से निकलने वाले तीन दर्जन से अधिक छोटे-बड़े नाले नदी मेें सीधे गिरकर उसकी हालत और खराब करने में लगे हुए हैं। मेरठ, गाजियाबाद का सफर करती हुई बुलंदशहर पहुंच रही काली का अस्तित्व इन दिनों पूरी तरह से खतरे में हैं।
गुलावठी से जिले में प्रवेश करती है काली नदी
काली नदी गुलावठी क्षेत्र से जिले में प्रवेश करती है। गुलावठी में करीब तीन किलोमीटर घूमने के बाद नदी आगे बढ़ती है, लेकिन इसी बीच में काली में इतना कूड़ा भर दिया जाता है, कि यह नदी कम एक बड़ा नाला अधिक दिखाई देती है।
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करीब 300 किमी है काली नदी का सफर
मुजफ्फरनगर से प्रारंभ होकर काली नदी मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, फर्रुखाबाद, एटा होते हुए कन्नौज में जाकर समाप्त होती है। यहां काली का मेल गंगा में होता है। नदी में कूड़ा-कचरा, सड़े गले जानवर समेत अन्य अपशिष्ट गंगा में मिलकर गंगा को भी दूषित कर रहे हैं।
एनजीटी ने दिए थे नालों पर जाल लगाने के आदेश
काली नदी के असितत्व को बचाने और लोगों को दूषित पानी से बचाने के लिए एनजीटी ने सभी नगर पालिकाओं को अपने नालों पर जाल लगाने के आदेश दिए थे। एनजीटी के आदेश पर नगर पालिका द्वारा जाल तो लगा दिए, लेकिन करीब एक वर्ष बीतते-बीतते लोहे के जाल गल गए, और पूर्व की तरह पूरा कूड़ा काली नदी में गिर रहा है।
नलों से निकलता है दूषित पानी
काली नदी जहां-जहां से होकर गुजरती है वहां के आस-पास की कालोनियों में नलों से गंदा पानी आता है। जिसे पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। लोगों ने कई बार इसकी शिकायत अफसरों से की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
लोग बोले
काली नदी पूरी तरह से दूषित हो चुकी है। पानी से बदबू आने के लोग पास में खड़े भी नहीं हो पाते हैं। नदी में कूड़ा गिरने से भी काफी बदबू आती है। - नौशाद
काली नदी की सेहत लगातार बिगड़ रही है। इससे पास की कालोनी के लोगों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। अफसरों की लापरवाही से पूरी नदी कूड़े से भरी हुई है। - भूरा
करीब 40 वर्ष पूर्व नदी पूरी तरह से साफ थी। बढ़ती जनसंख्या और लोगों की लापरवाही से नदी की सेहत बिगड़ रही है। बदबू आने के चलते लोग काफी परेशान रहते हैं। - सोनू
काली नदी मैली हो चुकी है। इसको साफ रखने के लिए अफसर कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। लोग भी घरे के कूड़े को काली नदी में फेंक रहे हैं। - रहीस
कोट-
एनजीटी के आदेश पर अमल किया गया था। यदि किसी नाले का जाल खराब हो गया है तो उसे बदलवा दिया जाएगा। काली नदी को प्रदूषित होने से बचाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। - अरविंद मिश्र, एडीएम प्रशासन
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- शहर से गुजर रही काली नदी का पानी हो चुका है जहरीला
- लाख कोशिश के बाद भी नहीं हो पाया काली नदी का पानी साफ
- एनजीटी ने काली की गंदगी को लेकर जताई थी नाराजगी
- काली नदी में नालों से अभी भी गिर रहा है गंदा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। नगर क्षेत्र से गुजरने वाली काली नदी को साफ करने की सारी भागदौड़ बेकार हो चुकी है। आलम यह है कि काली नदी के आस पास के लोगों के घरों में दूषित पानी आ रहा है। जिसे पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। एनजीटी के आदेश पर अफसरों ने भाग-दौड़ खूब करने का दावा किया, लेकिन काली की सेहत में कोई सुधार नहीं हो सका है।
शहर के बीचोंबीच गुजर रही काली नदी पूरी तरह से एक गंदे नाले के रूप में परिवर्तित हो गई है। वर्तमान में आलम यह है कि काली नदी नाम के अनुसार नदी का पानी पूरा काला हो चुका है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला गंदा पानी तथा कूड़ा कचरा इतनी मात्रा में गिरता है कि इसमें क्या बह रहा है यह भी दिखना मुश्किल है। एनजीटी ने दो वर्ष पूर्व काली नदी को साफ करने के अफसरों को आदेश दिए तो उन्होंने इसके लिए भाग-दौड़ अवश्य की, लेकिन अफसरों की भाग दौड़ महज एक दिखावा भर रही। नगर क्षेत्र से निकलने वाले तीन दर्जन से अधिक छोटे-बड़े नाले नदी मेें सीधे गिरकर उसकी हालत और खराब करने में लगे हुए हैं। मेरठ, गाजियाबाद का सफर करती हुई बुलंदशहर पहुंच रही काली का अस्तित्व इन दिनों पूरी तरह से खतरे में हैं।
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गुलावठी से जिले में प्रवेश करती है काली नदी
काली नदी गुलावठी क्षेत्र से जिले में प्रवेश करती है। गुलावठी में करीब तीन किलोमीटर घूमने के बाद नदी आगे बढ़ती है, लेकिन इसी बीच में काली में इतना कूड़ा भर दिया जाता है, कि यह नदी कम एक बड़ा नाला अधिक दिखाई देती है।
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करीब 300 किमी है काली नदी का सफर
मुजफ्फरनगर से प्रारंभ होकर काली नदी मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, फर्रुखाबाद, एटा होते हुए कन्नौज में जाकर समाप्त होती है। यहां काली का मेल गंगा में होता है। नदी में कूड़ा-कचरा, सड़े गले जानवर समेत अन्य अपशिष्ट गंगा में मिलकर गंगा को भी दूषित कर रहे हैं।
एनजीटी ने दिए थे नालों पर जाल लगाने के आदेश
काली नदी के असितत्व को बचाने और लोगों को दूषित पानी से बचाने के लिए एनजीटी ने सभी नगर पालिकाओं को अपने नालों पर जाल लगाने के आदेश दिए थे। एनजीटी के आदेश पर नगर पालिका द्वारा जाल तो लगा दिए, लेकिन करीब एक वर्ष बीतते-बीतते लोहे के जाल गल गए, और पूर्व की तरह पूरा कूड़ा काली नदी में गिर रहा है।
नलों से निकलता है दूषित पानी
काली नदी जहां-जहां से होकर गुजरती है वहां के आस-पास की कालोनियों में नलों से गंदा पानी आता है। जिसे पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। लोगों ने कई बार इसकी शिकायत अफसरों से की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
लोग बोले
काली नदी पूरी तरह से दूषित हो चुकी है। पानी से बदबू आने के लोग पास में खड़े भी नहीं हो पाते हैं। नदी में कूड़ा गिरने से भी काफी बदबू आती है। - नौशाद
काली नदी की सेहत लगातार बिगड़ रही है। इससे पास की कालोनी के लोगों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। अफसरों की लापरवाही से पूरी नदी कूड़े से भरी हुई है। - भूरा
करीब 40 वर्ष पूर्व नदी पूरी तरह से साफ थी। बढ़ती जनसंख्या और लोगों की लापरवाही से नदी की सेहत बिगड़ रही है। बदबू आने के चलते लोग काफी परेशान रहते हैं। - सोनू
काली नदी मैली हो चुकी है। इसको साफ रखने के लिए अफसर कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। लोग भी घरे के कूड़े को काली नदी में फेंक रहे हैं। - रहीस
कोट-
एनजीटी के आदेश पर अमल किया गया था। यदि किसी नाले का जाल खराब हो गया है तो उसे बदलवा दिया जाएगा। काली नदी को प्रदूषित होने से बचाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। - अरविंद मिश्र, एडीएम प्रशासन