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श्रीनगर से नहीं, दिल्ली से चलती है मुफ्ती सरकार: फारुख अब्दुल्ला
Updated Sat, 31 Mar 2018 10:29 PM IST
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श्रीनगर से नहीं, दिल्ली से
चलती है मुफ्ती सरकार
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम बोले- बातचीत से ही हल होंगी भारत-पाक की समस्याएं
बुगरासी में एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे फारूख अब्दुल्ला
अमर उजाला ब्यूरो
बुगरासी (बुलंदशहर)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि मुफ्ती सरकार श्रीनगर से नहीं, बल्कि दिल्ली से चलती है। दो साल से बंद अलगाववादियों को छोड़ने का फैसला दिल्ली दरबार से ही लिया गया है। उन्होंने कहा कि बातचीत से ही भारत-पाकिस्तान की समस्याएं हल होंगी। वह शुक्रवार की रात एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे।
पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर के हालात आज अच्छे नहीं हैं। जहां पाकिस्तान है उसे वह दे दिया जाए और जहां हम हैं हम रहें। यही लड़ाई के अंत का हल है। सेना पर पत्थरबाजी करने वाले नौजवानों को मुख्य धारा में जोड़ने के पहल के सवाल पर उन्होंने कहा कि भटके हुए नौजवानों को मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास चल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए दिनेश्वर शर्मा ऐसे नौजवानों से मिलकर बात कर रहे हैं। उन्होंने मित्र देशों द्वारा भारत-पाकिस्तान के मसले को बातचीत से हल करने की बात पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जब युुद्ध की स्थिति होती है तो मुस्लिमों पर सबसे पहले शक किया जाता है। तिरंगे को खड़ा रखने के लिए उनके चचेरे भाई समेत 1500 से भी ज्यादा वर्कर ने अपनी जान दी है। पूर्व सीएम ने कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान में जाना होता तो 1947 में कह देते। 2019 में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा के खिलाफ सभी दलों के लामबंद होने को फारूख अब्दुल्ला ने अच्छा चांस बताया। इससे विपक्ष को कामयाबी मिल सकती है।
अगर पूरा कश्मीर हमारा था तो फिर क्यों वापस की जमीन
बुगरासी। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को फारूख अब्दुल्ला ने पाकिस्तान का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जो हिस्सा हमारा नहीं है, उसके लिए हम लड़ रहे हैं। हमारे जनरल कहते हैं कि हथियार अच्छे नहीं हैं और हम युद्ध की बात करते हैं। पूरा कश्मीर हमारा था तो युद्ध के बाद जीता गया हाजीपीर और छम को मौजूदा सरकारों ने क्यों वापस कर दिया।
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...मैं तो नहीं होऊंगा प्रधानमंत्री
बुगरासी। विपक्ष के महागठबंधन होने पर संभावित प्रधानमंत्री के सवाल पर फारूख अब्दुल्ला ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कौन होगा यह तो समय बताएगा, लेकिन मैं तो नहीं होऊंगा प्रधानमंत्री।
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चलती है मुफ्ती सरकार
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम बोले- बातचीत से ही हल होंगी भारत-पाक की समस्याएं
बुगरासी में एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे फारूख अब्दुल्ला
अमर उजाला ब्यूरो
बुगरासी (बुलंदशहर)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि मुफ्ती सरकार श्रीनगर से नहीं, बल्कि दिल्ली से चलती है। दो साल से बंद अलगाववादियों को छोड़ने का फैसला दिल्ली दरबार से ही लिया गया है। उन्होंने कहा कि बातचीत से ही भारत-पाकिस्तान की समस्याएं हल होंगी। वह शुक्रवार की रात एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे।
पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर के हालात आज अच्छे नहीं हैं। जहां पाकिस्तान है उसे वह दे दिया जाए और जहां हम हैं हम रहें। यही लड़ाई के अंत का हल है। सेना पर पत्थरबाजी करने वाले नौजवानों को मुख्य धारा में जोड़ने के पहल के सवाल पर उन्होंने कहा कि भटके हुए नौजवानों को मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास चल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए दिनेश्वर शर्मा ऐसे नौजवानों से मिलकर बात कर रहे हैं। उन्होंने मित्र देशों द्वारा भारत-पाकिस्तान के मसले को बातचीत से हल करने की बात पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जब युुद्ध की स्थिति होती है तो मुस्लिमों पर सबसे पहले शक किया जाता है। तिरंगे को खड़ा रखने के लिए उनके चचेरे भाई समेत 1500 से भी ज्यादा वर्कर ने अपनी जान दी है। पूर्व सीएम ने कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान में जाना होता तो 1947 में कह देते। 2019 में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा के खिलाफ सभी दलों के लामबंद होने को फारूख अब्दुल्ला ने अच्छा चांस बताया। इससे विपक्ष को कामयाबी मिल सकती है।
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अगर पूरा कश्मीर हमारा था तो फिर क्यों वापस की जमीन
बुगरासी। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को फारूख अब्दुल्ला ने पाकिस्तान का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जो हिस्सा हमारा नहीं है, उसके लिए हम लड़ रहे हैं। हमारे जनरल कहते हैं कि हथियार अच्छे नहीं हैं और हम युद्ध की बात करते हैं। पूरा कश्मीर हमारा था तो युद्ध के बाद जीता गया हाजीपीर और छम को मौजूदा सरकारों ने क्यों वापस कर दिया।
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...मैं तो नहीं होऊंगा प्रधानमंत्री
बुगरासी। विपक्ष के महागठबंधन होने पर संभावित प्रधानमंत्री के सवाल पर फारूख अब्दुल्ला ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कौन होगा यह तो समय बताएगा, लेकिन मैं तो नहीं होऊंगा प्रधानमंत्री।