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होने लगी है शहर में, हलचल संभालिए......
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:24 PM IST
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होने लगी है शहर में, हलचल संभालिए......
- जिला प्रदर्शनी में देर रात तक कमाल खान की गजलों पर झूमे श्रोता
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। नुमाईश प्रदर्शनी में सोमवार की रात गजल के नाम रही। देर रात तक कमाल खान की गजलों को सुनकर श्रोता झूम उठे। कमाल खान की गजलों ने लोगों के दिलों में मिठास भर दी।
नुमाईश प्रदर्शनी के रविंद्र नाट्यशाला में हुए गजल का शुभारंभ सदर नाजिर प्रदीप शर्मा और अधिवक्ता अनुराग तिवारी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप जलाकर किया। इसके बाद गजल गायक कमाल खान ने अपने सुर का ऐसा सरगम छेड़ा कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल। चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है। होने लगी है शहर में, हलचल संभालिए, दिन आ गए है शबाव के, आंचल संभालिए। नजर-नजर से मिलाकर शराब पीते हैं, हमको पास बैठा कर शराब पीते हैं। हम तेरे शहर में आए हैं, मुसाफिर की तरहा आदि गजलों को सुनकर श्रोता तालियां बजाने लगे। रेडियो आकाशवाणी शो की गायिका तृप्ति त्रिपाठी की इन आंखों की मस्ती के दीवाने हजाराें है और अगर हम कहें को सुनकर श्रोता झूम उठे।
बैठे रहे श्रोता तो दोबारा लौटे कलाकार
- कमाल खान गजल कार्यक्रम के आयोजक मदन मोहन ने बताया कि देर रात करीब 11 बजे कार्यक्रम समाप्त कर दिया गया। कलाकार जाने लगे, लेकिन श्रोता के बैठे रहने पर कलाकार वापस लौटे और पुन: गजल सुनाकर कार्यक्रम शुरू किया। कमाल खान ने मेरे रश्के कमर, तूने पहली नजर, जब तूने नजर मिलाई, मजा आ गया गाया तो श्रोता खड़े हो कर थिरकने को मजबूर हो गए।
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- जिला प्रदर्शनी में देर रात तक कमाल खान की गजलों पर झूमे श्रोता
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। नुमाईश प्रदर्शनी में सोमवार की रात गजल के नाम रही। देर रात तक कमाल खान की गजलों को सुनकर श्रोता झूम उठे। कमाल खान की गजलों ने लोगों के दिलों में मिठास भर दी।
नुमाईश प्रदर्शनी के रविंद्र नाट्यशाला में हुए गजल का शुभारंभ सदर नाजिर प्रदीप शर्मा और अधिवक्ता अनुराग तिवारी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप जलाकर किया। इसके बाद गजल गायक कमाल खान ने अपने सुर का ऐसा सरगम छेड़ा कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल। चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है। होने लगी है शहर में, हलचल संभालिए, दिन आ गए है शबाव के, आंचल संभालिए। नजर-नजर से मिलाकर शराब पीते हैं, हमको पास बैठा कर शराब पीते हैं। हम तेरे शहर में आए हैं, मुसाफिर की तरहा आदि गजलों को सुनकर श्रोता तालियां बजाने लगे। रेडियो आकाशवाणी शो की गायिका तृप्ति त्रिपाठी की इन आंखों की मस्ती के दीवाने हजाराें है और अगर हम कहें को सुनकर श्रोता झूम उठे।
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बैठे रहे श्रोता तो दोबारा लौटे कलाकार
- कमाल खान गजल कार्यक्रम के आयोजक मदन मोहन ने बताया कि देर रात करीब 11 बजे कार्यक्रम समाप्त कर दिया गया। कलाकार जाने लगे, लेकिन श्रोता के बैठे रहने पर कलाकार वापस लौटे और पुन: गजल सुनाकर कार्यक्रम शुरू किया। कमाल खान ने मेरे रश्के कमर, तूने पहली नजर, जब तूने नजर मिलाई, मजा आ गया गाया तो श्रोता खड़े हो कर थिरकने को मजबूर हो गए।
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