{"_id":"5a885e704f1c1b8e238b914e","slug":"15188867231347-bulandshahr-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसर-ठेकेदार के झमेले में अटका कर्मचारियों का 47 लाख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसर-ठेकेदार के झमेले में अटका कर्मचारियों का 47 लाख
Updated Sat, 17 Feb 2018 10:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अफसर-ठेकेदार के झमेले में अटका कर्मचारियों का 47 लाख
- सत्यता छुपाकर मेरठ की ब्लैक लिस्ट फर्म ने लिया था ठेका
- गत माह ठेका निरस्त कर, ठेकेदार के खिलाफ दर्ज कराई थी रिपोर्ट
- ठेकेदार पर कर्मचारियों का बकाया है दो माह का भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। पावर कॉरपोरेशन के अफसरों और ठेकेदारों के झमेले का नुकसान संविदा कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है। ठेकेदार ने कर्मचारियों का दो महीने का भुगतान नहीं किया और अफसरों ने उससे ठेका हटाकर अन्य ठेकेदार को ठेका दे दिया।
पावर कॉरपोरेशन के सिकंदराबाद खंड में एक ब्लैक लिस्ट फर्म के ठेकेदार ने तथ्य छुपाकर संविदा कर्मचारियों का ठेका लिया था। पूरा मामला अखबारों की सुर्खियां बना तो अफसरों ने आनन-फानन में ठेकेदार के दस्तावेजों की जांच करते हुए ठेकेदार से ठेका हटा दिया। इसके बाद अफसरों ने ठेकेदार के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद अब संविदा कर्मचारियों का 47 लाख रुपया फंसा पड़ा है। अब ठेकेदार न तो कर्मचारियों को वेतन और ईपीएफ का भुगतान कर रहा है और न ही अफसर इसके लिए खुद को अधिकृत बता रहे हैं। अफसरों को डर है कि यदि ठेकेदार को 47 लाख की धनराशि दे दी जाए और वह रकम लेकर भी भुगतान न करे तो ऐसी दशा में क्या किया जाएगा। अफसरों के इसी भय के चलते संविदा कर्मचारी काफी परेशान हैं। बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के महासचिव सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पूरे मामले में अफसरों ने शीघ्र भुगतान का आश्वासन दिया है। वेतन न मिलने पर आंदोलन किया जाएगा।
विज्ञापन
- सत्यता छुपाकर मेरठ की ब्लैक लिस्ट फर्म ने लिया था ठेका
- गत माह ठेका निरस्त कर, ठेकेदार के खिलाफ दर्ज कराई थी रिपोर्ट
- ठेकेदार पर कर्मचारियों का बकाया है दो माह का भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। पावर कॉरपोरेशन के अफसरों और ठेकेदारों के झमेले का नुकसान संविदा कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है। ठेकेदार ने कर्मचारियों का दो महीने का भुगतान नहीं किया और अफसरों ने उससे ठेका हटाकर अन्य ठेकेदार को ठेका दे दिया।
पावर कॉरपोरेशन के सिकंदराबाद खंड में एक ब्लैक लिस्ट फर्म के ठेकेदार ने तथ्य छुपाकर संविदा कर्मचारियों का ठेका लिया था। पूरा मामला अखबारों की सुर्खियां बना तो अफसरों ने आनन-फानन में ठेकेदार के दस्तावेजों की जांच करते हुए ठेकेदार से ठेका हटा दिया। इसके बाद अफसरों ने ठेकेदार के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद अब संविदा कर्मचारियों का 47 लाख रुपया फंसा पड़ा है। अब ठेकेदार न तो कर्मचारियों को वेतन और ईपीएफ का भुगतान कर रहा है और न ही अफसर इसके लिए खुद को अधिकृत बता रहे हैं। अफसरों को डर है कि यदि ठेकेदार को 47 लाख की धनराशि दे दी जाए और वह रकम लेकर भी भुगतान न करे तो ऐसी दशा में क्या किया जाएगा। अफसरों के इसी भय के चलते संविदा कर्मचारी काफी परेशान हैं। बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के महासचिव सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पूरे मामले में अफसरों ने शीघ्र भुगतान का आश्वासन दिया है। वेतन न मिलने पर आंदोलन किया जाएगा।
विज्ञापन