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अफसरों को चढ़ता है चढ़ावा तो बिना जांच मिल जाती है एनओसी
Updated Thu, 01 Feb 2018 12:10 AM IST
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अफसरों को चढ़ता है चढ़ावा तो बिना जांच मिल जाती है एनओसी
बुलंदशहर। प्रदूषण विभाग के अफसरों पर रिश्वतखोरी के स्टिंग ऑपरेशन के बाद हुई कार्रवाई से अफसर सहमे हुए हैं। अब विभागीय अफसरों व कर्मचारियों का यह सच खुलकर सामने आया है कि बिना रुपये दिए विभाग में कोई काम नहीं किया जाता था। विभाग के बाबू द्वारा वीडियो में इसको कबूल किया गया है। अब कई अन्य अफसर भी इसकी जांच में घिरते नजर आ रहे हैं।
प्रदूषण विभाग के अफसर-कर्मचारियों की ईमानदारी की पोल स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आ गई है। स्टिंग से पहले जो अफसर चीख-चीखकर अपनी ईमानदारी का दिखावा करते रहते थे, वह अब कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। स्टिंग ऑपरेशन के बाद कई अन्य अफसर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। वीडियो में बाबू फैक्ट्री संचालक से कहता दिख रहा है कि तय की गई रिश्वत का 50 फीसदी हिस्सा पहले ही देना होगा। बाबू के अनुसार दफ्तर में बैठने वाले अफसर किसी भी फाइल कर हस्ताक्षर करने से पहले धनराशि की मांग कर रहे हैं। बाबू आगे कहता है कि वह अपना हिस्सा बाद में ले लेगा, जबकि अन्य अफसरों का हिस्सा मौके पर निरीक्षण के दौरान दे दिया जाएगा। मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी जीएस श्रीवास्तव ने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए खुद को पूरे प्रकरण से अनजान बताया है।
तहसील अफसरों की नहीं होती चेकिंग की जिम्मेदारी
प्रदूषण विभाग के अफसर अवैध वसूली के समय फैक्ट्री व अस्पताल संचालकों को स्पष्ट कर देते हैं कि इस धनराशि में सिर्फ प्रदूषण विभाग के अफसरों की जिम्मेदारी ली गई है। वीडियो में बाबू ने साफ कहा है कि यदि जिला प्रशासन या तहसील अफसर मौके पर पहुंचकर जांच करते हैं तो इसकी जिम्मेदारी उन्हें स्वयं वहन करनी होगी।
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बुलंदशहर। प्रदूषण विभाग के अफसरों पर रिश्वतखोरी के स्टिंग ऑपरेशन के बाद हुई कार्रवाई से अफसर सहमे हुए हैं। अब विभागीय अफसरों व कर्मचारियों का यह सच खुलकर सामने आया है कि बिना रुपये दिए विभाग में कोई काम नहीं किया जाता था। विभाग के बाबू द्वारा वीडियो में इसको कबूल किया गया है। अब कई अन्य अफसर भी इसकी जांच में घिरते नजर आ रहे हैं।
प्रदूषण विभाग के अफसर-कर्मचारियों की ईमानदारी की पोल स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आ गई है। स्टिंग से पहले जो अफसर चीख-चीखकर अपनी ईमानदारी का दिखावा करते रहते थे, वह अब कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। स्टिंग ऑपरेशन के बाद कई अन्य अफसर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। वीडियो में बाबू फैक्ट्री संचालक से कहता दिख रहा है कि तय की गई रिश्वत का 50 फीसदी हिस्सा पहले ही देना होगा। बाबू के अनुसार दफ्तर में बैठने वाले अफसर किसी भी फाइल कर हस्ताक्षर करने से पहले धनराशि की मांग कर रहे हैं। बाबू आगे कहता है कि वह अपना हिस्सा बाद में ले लेगा, जबकि अन्य अफसरों का हिस्सा मौके पर निरीक्षण के दौरान दे दिया जाएगा। मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी जीएस श्रीवास्तव ने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए खुद को पूरे प्रकरण से अनजान बताया है।
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तहसील अफसरों की नहीं होती चेकिंग की जिम्मेदारी
प्रदूषण विभाग के अफसर अवैध वसूली के समय फैक्ट्री व अस्पताल संचालकों को स्पष्ट कर देते हैं कि इस धनराशि में सिर्फ प्रदूषण विभाग के अफसरों की जिम्मेदारी ली गई है। वीडियो में बाबू ने साफ कहा है कि यदि जिला प्रशासन या तहसील अफसर मौके पर पहुंचकर जांच करते हैं तो इसकी जिम्मेदारी उन्हें स्वयं वहन करनी होगी।
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