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अब गांवों में बनेगा ‘महिला चेतना उपवन’
Updated Fri, 15 Dec 2017 10:13 PM IST
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अब गांवों में बनेगा ‘महिला चेतना उपवन’
- महिलाओं व युवतियों को खुले में बैठने और घूमने के लिए बनेगा पार्क
- बच्चों के लिए बनेगा पार्क, रोपे जाएंगे पौधे और बैठने को बनेगी बेंच
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं अब घर की चहारदीवारी तक ही सीमित नहीं रहेंगी। उन्हें घर से बाहर खुली हवा में बैठने और घूमने का अवसर उनके की ही गांव में सरकार उपलब्ध कराने जा रही है। इसके लिए गांव में अब ‘महिला चेतना उपवन’ बनेंगे। इसका पूरा खर्च मनरेगा से उठाया जाएगा।
गांवों में रहने वाली महिलाओं, युवतियों और बच्चों को पार्क आदि स्थान न होने की वजह से घर की चहारदीवारी में ही कैद होना पड़ता है। सरकार का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अपने आवासीय स्थान के अतिरिक्त गांव में भ्रमण करने और समूह के रूप में अपने सामाजिक अथवा अन्य कार्यों को निपटाने के अलावा सुबह-शाम खुली हवा में बैठने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए सरकार ने सभी गांवों में महिला चेतना उपवन बनवाने का आदेश जारी किया है। इसके निर्माण के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही इसके लिए भूमि चिन्ह्ति करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को दी गई है। जबकि महिला चेतना उपवन को बनाने का काम काम मनरेगा की ओर से किया जाएगा। इससे महिलाओं व युवतियों को खुले में बैठने और घूमने की आजादी मिलेगी। बच्चों के लिए पार्क बनेगा और चारों ओर पौधे रोपित किए जाएंगे। इतना ही नहीं लोगों के बैठने के लिए बेंच भी बनाई जाएंगी। इस संबंध में मनरेगा उपायुक्त दयाराम यादव का कहना है कि जिले में प्रस्तावित मनरेगा के अंतर्गत ‘महिला चेतना उपवन’ योजना अब सभी जिलों में लागू की गई है। इस संबंध में शासन का आदेश भी आ गया है। जिले के सभी गांवों में भूमि चिह्नित करने के लिए राजस्व विभाग को कहा गया है। इस संबंध में प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही इसे लेकर बैठक भी होगी।
ऐसे बनेगा महिला चेतना उपवन और ये होंगी सुविधाएं
- उपवन के लिए चिन्ह्ति जगह में मनरेगा के तहत खाई खोदकर उसकी मिट्टी ऊपर बंधे के रूप में लगाई जाएगी और चारों ओर पौधे लगाए जाएंगे।
- मुख्यद्वार पर गांव के नाम के अनुसार महिला चेतना उपवन लिखा जाएगा।
- स्थल को स्वच्छ एवं हरा भरा बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश भी उपवन के मुख्यद्वार के पास बोर्ड पर लिखे जाएंगे।
- विकसित उपवन की देखरेख का दायित्व ग्राम पंचायत की महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया जाएगा।
- महिला चेतना उपवन में केवल महिलाओं, युवतियों व बालिकाओं के अलावा कोई प्रवेश नहीं कर सकता।
- ग्राम पंचायतें इस कार्य को कार्य योजना में शामिल करेंगी।
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- महिलाओं व युवतियों को खुले में बैठने और घूमने के लिए बनेगा पार्क
- बच्चों के लिए बनेगा पार्क, रोपे जाएंगे पौधे और बैठने को बनेगी बेंच
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं अब घर की चहारदीवारी तक ही सीमित नहीं रहेंगी। उन्हें घर से बाहर खुली हवा में बैठने और घूमने का अवसर उनके की ही गांव में सरकार उपलब्ध कराने जा रही है। इसके लिए गांव में अब ‘महिला चेतना उपवन’ बनेंगे। इसका पूरा खर्च मनरेगा से उठाया जाएगा।
गांवों में रहने वाली महिलाओं, युवतियों और बच्चों को पार्क आदि स्थान न होने की वजह से घर की चहारदीवारी में ही कैद होना पड़ता है। सरकार का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अपने आवासीय स्थान के अतिरिक्त गांव में भ्रमण करने और समूह के रूप में अपने सामाजिक अथवा अन्य कार्यों को निपटाने के अलावा सुबह-शाम खुली हवा में बैठने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए सरकार ने सभी गांवों में महिला चेतना उपवन बनवाने का आदेश जारी किया है। इसके निर्माण के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही इसके लिए भूमि चिन्ह्ति करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को दी गई है। जबकि महिला चेतना उपवन को बनाने का काम काम मनरेगा की ओर से किया जाएगा। इससे महिलाओं व युवतियों को खुले में बैठने और घूमने की आजादी मिलेगी। बच्चों के लिए पार्क बनेगा और चारों ओर पौधे रोपित किए जाएंगे। इतना ही नहीं लोगों के बैठने के लिए बेंच भी बनाई जाएंगी। इस संबंध में मनरेगा उपायुक्त दयाराम यादव का कहना है कि जिले में प्रस्तावित मनरेगा के अंतर्गत ‘महिला चेतना उपवन’ योजना अब सभी जिलों में लागू की गई है। इस संबंध में शासन का आदेश भी आ गया है। जिले के सभी गांवों में भूमि चिह्नित करने के लिए राजस्व विभाग को कहा गया है। इस संबंध में प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही इसे लेकर बैठक भी होगी।
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ऐसे बनेगा महिला चेतना उपवन और ये होंगी सुविधाएं
- उपवन के लिए चिन्ह्ति जगह में मनरेगा के तहत खाई खोदकर उसकी मिट्टी ऊपर बंधे के रूप में लगाई जाएगी और चारों ओर पौधे लगाए जाएंगे।
- मुख्यद्वार पर गांव के नाम के अनुसार महिला चेतना उपवन लिखा जाएगा।
- स्थल को स्वच्छ एवं हरा भरा बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश भी उपवन के मुख्यद्वार के पास बोर्ड पर लिखे जाएंगे।
- विकसित उपवन की देखरेख का दायित्व ग्राम पंचायत की महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया जाएगा।
- महिला चेतना उपवन में केवल महिलाओं, युवतियों व बालिकाओं के अलावा कोई प्रवेश नहीं कर सकता।
- ग्राम पंचायतें इस कार्य को कार्य योजना में शामिल करेंगी।