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दर्द से तड़पता रहा मासूम, डॉक्टरों का नहीं पसीजा ‘कलेजा’

Sat, 02 Sep 2017 10:52 PM IST
Updated Sat, 02 Sep 2017 10:52 PM IST
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दर्द से तड़पता रहा मासूम, डॉक्टरों का नहीं पसीजा ‘कलेजा’
दर्द से तड़पता रहा मासूम, डॉक्टरों का नहीं पसीजा ‘कलेजा’
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- जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आया था दूध से जला मासूम
- इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने पिता से कहा पहले पानी से करो साफ
- दर्द से कराह रहे मासूम पर भी चिकित्सकों को नहीं आई दया
- गोरखपुर अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद भी नहीं सुधर रहे जिले के चिकित्सक
अमर उजाला ब्यूरो।
बुलंदशहर। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में शुक्रवार को गर्म दूध से जले एक मासूम को चिकित्सकों ने देखने तक की जहमत नहीं उठाई। जब परिजनों ने चिकित्सक से गुहार लगाई तो चिकित्सक ने दर्द से तड़पते मासूम की ओर देखना भी उचित नहीं समझा और बिना देखे ही उसके परिजनों को शरीर के जले हुए हिस्से को बाहर पानी से धोने के आदेश दे दिए।
शुक्रवार की देर शाम राधा नगर निवासी फैमुद्दीन का डेढ़ साल का मासूम गर्म दूध से जल गया था। फैमुद्दीन अपने बेटे को लेकर तुरंत जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। जहां मौजूद स्टाफ ने पहले तो मासूम की ओर देखना भी गंवारा नहीं समझा। जब मासूम दर्द से तड़पता रहा तो बेबस पिता से नहीं रहा गया और ड्यूटी पर तैनात ईएमओ से बच्चे को देखने की गुहार लगाने लगा। काफी देर बाद डॉक्टर साहब ने बच्चे की ओर एक नजर देखा और सीट से हिले बिना ही फैमुद्दीन से बोल दिया कि पहले बाहर जाओ और बच्चे के जले हुए हिस्से को पानी से धोकर लाओ। पानी से धोने की बात सुनकर फैमुद्दीन अचंभित रह गया। फिर भी वह बाहर टंकी पर गया और बच्चे के शरीर को पानी से धो लाया। बाद में डॉक्टर साहब ने फैमुद्दीन से कहा कि अब इसे एक कपड़े से साफ कर दो। जबकि शरीर के किसी भी जले हुए अंग को केवल कॉटन से साफ किया जाना चाहिए, लेकिन डॉक्टर ने न तो फैमुद्दीन को कॉटन दी और न ही खुद उठकर बच्चे को देखना उचित समझा। बाद में डॉक्टर साहब ने फार्मासिस्ट को आदेश देकर बच्चे की पीठ पर एक मरहम लगा दिया और घर जाने के लिए बोल दिया।
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लापरवाही के लिए चर्चित हैं चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग में तैनात चिकित्सक लापरवाही के लिए काफी चर्चित हैं। आए दिन चिकित्सकों की लापरवाही का कोई न कोई उदाहरण सामने आता रहता है। कभी लापरवाही से ऑपरेशन करना, तो कभी लापरवाही करते हुए मरीजों की ओर कोई ध्यान नहीं देना। कई बार तो चिकित्सकों की लापरवाही से मरीज की मौत भी हो चुकी है। मगर स्वास्थ्य अफसरों ने ऐसे लापरवाह चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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गोरखपुर हादसे से भी नहीं लिया सबक
हाल ही में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लापरवाही के कारण हुई बच्चों व लोगों की मौत से जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने कोई सबक नहीं लिया है। लापरवाह चिकित्सकों के रवैये से परेशान होकर कई बार तो मरीज निजी अस्पतालों की ओर रुख कर जाते हैं।
कोट--
मामले की जानकारी की जा रही है। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है ड्यूटी पर तैनात ईएमओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -- डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
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स्टाफ की लापरवाही से लाखों की डेंटल चेयर कबाड़
शिकारपुर। अस्पतालों में तैनात स्टाफ की लापरवाही के कारण लाखों के उपकरण व अन्य सामान कबाड़ हो चुका है। ताजा मामला सीएचसी शिकारपुर का है जहां लाखों की कीमत वाली डेंटल चेयर स्टाफ की लापरवाही से कबाड़ में तब्दील हो चुकी है।

शिकारपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में दंत चिकित्सक की तैनाती है। शासन ने दंत रोगियों को देखने के लिए डेंटल चेयर अस्पताल मुहैया कराई थी। स्टाफ की लापरवाही तथा रख-रखाव के अभाव में चेअर पूरी तरह से कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। सीएचसी प्रभारी डा.विकास राय का कहना है कि डेंटल चेयर को ठीक करानेके लिए जिला मुख्यालय को पत्र भेजा गया है।
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