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अध्यापकों और अभिभावकों के बीच सामंजस्य की कमी
Updated Tue, 29 Aug 2017 10:08 PM IST
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अध्यापकों और अभिभावकों के बीच सामंजस्य की कमी
- डीपीएस में आयोजित अधिवेशन में बच्चों की व्यवहारिक समस्याओं पर हुई चर्चा
- देहरादून परिक्षेत्र के 150 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने की शिरकत
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
दिल्ली पब्लिक स्कूल में मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड देहरादून के अधीन आने वाले विद्यालयाें के प्रधानाचार्यों का अधिवेशन आयोजित हुआ। इसका विषय ‘किशोरावस्था में बच्चों के व्यवहारिक समस्याओं का प्रबंधन’ रहा। इसका आयोजन डीपीएस बुलंदशहर और आईसीटीआरसी ने संयुक्त रूप से किया।
अधिवेशन का शुभारंभ आईसीटीआरसी के महाप्रबंधक वीएस रविंद्रन, जिला सीबीएसई विद्यालय संगठन के जिला उपाध्यक्ष अभिराग गर्ग, डीपीएस बुलंदशहर के प्रधानाचार्य डॉ. जगीदश चंद्र पंथ और प्रो. केशव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने शारदा वंदन किया। डॉ. रवि चंद्रन ने कहा कि विद्यालयों में आज भी अध्यापकों और अभिभावकों के बीच सामंजस्य की कमी है। इसकी वजह से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने में दोनों को ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आवश्यकता है कि अभिभावक और अध्यापक दोनों समान रूप से विद्यार्थियों के विकास पर योगदान करें। अधिवेशन में देहरादून परिक्षेत्र के करीब 150 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भागीदारी की गई। इसमें बच्चों में आ रहे परिवर्तन पर परिचर्चा की गई। बच्चों की बढ़ती एकलवृत्ति की भावना, पढ़ाई में ध्यान कम लगना, नैतिक मूल्यों का ह्रास आदि बिंदुओं पर भी परिचर्चा की गई। किशोरावस्था में शारीरिक व मानसिक बदलाव की स्थिति में बच्चों को आवश्यक सलाह और निर्देशों की आवश्यकता पर दिया गया। डॉ. जगदीश चंद्र पंथ ने कहा कि किशोरावस्था में बालकों के व्यवहार में आए अकस्मात परिवर्तन को पहचान कर उन्हें सही दिशा प्रदान करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। संस्थान का प्रमुख होने के कारण एक प्रधानाचार्य और अध्यापकों को इन परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ता है। इसलिए प्रधानाचार्यों को अपने अध्यापकों को इस बात के लिए तैयार करना अति आवश्यक है कि किशोरावस्था की ओर बढ़ते विद्यार्थियों के व्यवहार प्रबंध के द्वारा सही गति और दिशा प्रदान करें।
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- डीपीएस में आयोजित अधिवेशन में बच्चों की व्यवहारिक समस्याओं पर हुई चर्चा
- देहरादून परिक्षेत्र के 150 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने की शिरकत
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
दिल्ली पब्लिक स्कूल में मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड देहरादून के अधीन आने वाले विद्यालयाें के प्रधानाचार्यों का अधिवेशन आयोजित हुआ। इसका विषय ‘किशोरावस्था में बच्चों के व्यवहारिक समस्याओं का प्रबंधन’ रहा। इसका आयोजन डीपीएस बुलंदशहर और आईसीटीआरसी ने संयुक्त रूप से किया।
अधिवेशन का शुभारंभ आईसीटीआरसी के महाप्रबंधक वीएस रविंद्रन, जिला सीबीएसई विद्यालय संगठन के जिला उपाध्यक्ष अभिराग गर्ग, डीपीएस बुलंदशहर के प्रधानाचार्य डॉ. जगीदश चंद्र पंथ और प्रो. केशव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने शारदा वंदन किया। डॉ. रवि चंद्रन ने कहा कि विद्यालयों में आज भी अध्यापकों और अभिभावकों के बीच सामंजस्य की कमी है। इसकी वजह से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने में दोनों को ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आवश्यकता है कि अभिभावक और अध्यापक दोनों समान रूप से विद्यार्थियों के विकास पर योगदान करें। अधिवेशन में देहरादून परिक्षेत्र के करीब 150 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भागीदारी की गई। इसमें बच्चों में आ रहे परिवर्तन पर परिचर्चा की गई। बच्चों की बढ़ती एकलवृत्ति की भावना, पढ़ाई में ध्यान कम लगना, नैतिक मूल्यों का ह्रास आदि बिंदुओं पर भी परिचर्चा की गई। किशोरावस्था में शारीरिक व मानसिक बदलाव की स्थिति में बच्चों को आवश्यक सलाह और निर्देशों की आवश्यकता पर दिया गया। डॉ. जगदीश चंद्र पंथ ने कहा कि किशोरावस्था में बालकों के व्यवहार में आए अकस्मात परिवर्तन को पहचान कर उन्हें सही दिशा प्रदान करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। संस्थान का प्रमुख होने के कारण एक प्रधानाचार्य और अध्यापकों को इन परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ता है। इसलिए प्रधानाचार्यों को अपने अध्यापकों को इस बात के लिए तैयार करना अति आवश्यक है कि किशोरावस्था की ओर बढ़ते विद्यार्थियों के व्यवहार प्रबंध के द्वारा सही गति और दिशा प्रदान करें।
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