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बैंकों के नोडल अधिकारी करेंगे किसानों का कर्ज माफ
Updated Thu, 03 Aug 2017 11:11 PM IST
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बैंकों के नोडल अधिकारी करेंगे किसानों का कर्ज माफ
- नए शासनादेश के मुताबिक जिला कृषि अधिकारियों की नहीं होगी भूमिका
- 10 अगस्त तक जनपद के 14,500 किसानों का सत्यापन कर शासन को भेजी जाएगी सूची
- सत्यापन सूची के बाद नोडल अधिकारियों के केंद्रीकृत खाते में शासन भेजेगा धनराशि
- शासन से खाते में रुपये आने के बाद बैंक ऋण मोचन का प्रमाणपत्र किसानों को करेंगे जारी
- डीएम ने एसडीएम, तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक को दिए हैं पारदर्शिता से सत्यापन के निर्देश
गौरव भारद्वाज
बुलंदशहर।
सरकार की ओर से किसानों की ऋण माफी योजना में बदलाव करते हुए पारदर्शिता बरतने की कोशिश की जा रही है। शासन ने आदेश जारी कर धनराशि ट्रांजेक्शन में जिला कृषि अधिकारियों की भूमिका समाप्त कर दी है। शासन अब प्रशासन द्वारा सत्यापित सूची के आधार पर बैंकों के नोडल अधिकारियों के केंद्रीकृत खातों में रुपये ट्रांसफर करेगा। रुपये मिलने के बाद बैंकों की ब्रांच किसानों को प्रशासन के माध्यम से 15 अगस्त को ऋण मोचन का प्रमाणपत्र सौंपेंगे।
जनपद में किसानों की ऋण माफी का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। एसडीएम, तहसीलदार और लेखपाल द्वारा 14,500 किसानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। यह सत्यापन 10 अगस्त तक पूरा होना है। इसके बाद सत्यापित सूची को डीएम के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। शासन ने बैंकों के नोडल अधिकारियों को केंद्रीकृत खाते खोलने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही खाते खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैंकों की ओर से भेजी गई डिमांड के अनुसार धनराशि इन खातों में डाल दी जाएगी। इसके बाद जिन किसानों के खाते आधार से लिंक हो चुके हैं, उनका रिकॉर्ड सभी संबंधित ब्रांच को पहुंचा दिया जाएगा। जिला सलाहकार समिति की सहमति पर केंद्रीकृत खाते से धनराशि बैंक शाखाओं को पहुंचा दी जाएगी। रुपये मिलने के बाद बैंक अपने ब्रांच से कर्ज लेने वाले किसानों का ऋण मोचन प्रमाणपत्र जारी करेंगे। यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी करनी है।
गांव-गांव जाकर लेखपाल कर रहे सत्यापन
कर्जमाफी के दायरे में आने वाले प्रथम चरण के 14,500 किसानों के घर जाकर लेखपाल सत्यापन कर रहे हैं। इस दौरान वह सरकार की तय शर्तों के अनुसार किसान की पात्रता की जांच रिपोर्ट तैयार करके जिला प्रशासन को देंगे। इसके बाद किसानों का डाटा दस अगस्त तक लॉक किया जाएगा। शासन ने इस योजना को लेकर पूरी पारदर्शिता से काम करने के निर्देश दिए हैं। पहले जिला कृषि अधिकारी के माध्यम से किसानों का ऋण माफ किया जाता था, लेकिन इस बार यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है।
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दूसरे राज्यों में रहने वाले किसानों का कर्ज नहीं होगा माफ
जिले के बैंकों से शासन को मिले डाटा के अनुसार प्रशासन को कर्जमाफी के लिए एक लाख 68 हजार 303 किसानों की लिस्ट मिली थी। जिला स्तर पर इनमें से एक लाख 64 हजार 823 किसानों को शामिल किया गया। इनमें आधार कार्ड से लिंक किसानों की संख्या 51 हजार 703 हैं, जबकि एक लाख 16 हजार 600 किसानों के आधार कार्ड नहीं हैं। कृषि उपनिदेशक आरपी चौधरी ने बताया कि पहली लिस्ट में शामिल किसानों को 15 अगस्त तक कर्जमाफी की सौगात मिल जाएगी। सत्यापन के दौरान उन किसानों को आउट किया जाएगा जो दूसरे प्रदेश में रहते हैं और उनकी जमीन जिले में है। शासन ने ऐसे किसानों को कर्जमाफी में शामिल नहीं किया है।
कोट्स
नए शासनादेश के मुताबिक शासन जिला कृषि अधिकारी की जगह बैंकों के नोडल अधिकारियों के केंद्रीयकृत खातों में धनराशि भेजेगा। 10 अगस्त तक 14,500 किसानों के सत्यापन का काम पूरा कर लिया जाएगा। जिसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को पात्र किसानों की सूची भेजी जाएगी। - एके सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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- नए शासनादेश के मुताबिक जिला कृषि अधिकारियों की नहीं होगी भूमिका
- 10 अगस्त तक जनपद के 14,500 किसानों का सत्यापन कर शासन को भेजी जाएगी सूची
- सत्यापन सूची के बाद नोडल अधिकारियों के केंद्रीकृत खाते में शासन भेजेगा धनराशि
- शासन से खाते में रुपये आने के बाद बैंक ऋण मोचन का प्रमाणपत्र किसानों को करेंगे जारी
- डीएम ने एसडीएम, तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक को दिए हैं पारदर्शिता से सत्यापन के निर्देश
गौरव भारद्वाज
बुलंदशहर।
सरकार की ओर से किसानों की ऋण माफी योजना में बदलाव करते हुए पारदर्शिता बरतने की कोशिश की जा रही है। शासन ने आदेश जारी कर धनराशि ट्रांजेक्शन में जिला कृषि अधिकारियों की भूमिका समाप्त कर दी है। शासन अब प्रशासन द्वारा सत्यापित सूची के आधार पर बैंकों के नोडल अधिकारियों के केंद्रीकृत खातों में रुपये ट्रांसफर करेगा। रुपये मिलने के बाद बैंकों की ब्रांच किसानों को प्रशासन के माध्यम से 15 अगस्त को ऋण मोचन का प्रमाणपत्र सौंपेंगे।
जनपद में किसानों की ऋण माफी का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। एसडीएम, तहसीलदार और लेखपाल द्वारा 14,500 किसानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। यह सत्यापन 10 अगस्त तक पूरा होना है। इसके बाद सत्यापित सूची को डीएम के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। शासन ने बैंकों के नोडल अधिकारियों को केंद्रीकृत खाते खोलने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही खाते खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैंकों की ओर से भेजी गई डिमांड के अनुसार धनराशि इन खातों में डाल दी जाएगी। इसके बाद जिन किसानों के खाते आधार से लिंक हो चुके हैं, उनका रिकॉर्ड सभी संबंधित ब्रांच को पहुंचा दिया जाएगा। जिला सलाहकार समिति की सहमति पर केंद्रीकृत खाते से धनराशि बैंक शाखाओं को पहुंचा दी जाएगी। रुपये मिलने के बाद बैंक अपने ब्रांच से कर्ज लेने वाले किसानों का ऋण मोचन प्रमाणपत्र जारी करेंगे। यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी करनी है।
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गांव-गांव जाकर लेखपाल कर रहे सत्यापन
कर्जमाफी के दायरे में आने वाले प्रथम चरण के 14,500 किसानों के घर जाकर लेखपाल सत्यापन कर रहे हैं। इस दौरान वह सरकार की तय शर्तों के अनुसार किसान की पात्रता की जांच रिपोर्ट तैयार करके जिला प्रशासन को देंगे। इसके बाद किसानों का डाटा दस अगस्त तक लॉक किया जाएगा। शासन ने इस योजना को लेकर पूरी पारदर्शिता से काम करने के निर्देश दिए हैं। पहले जिला कृषि अधिकारी के माध्यम से किसानों का ऋण माफ किया जाता था, लेकिन इस बार यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है।
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दूसरे राज्यों में रहने वाले किसानों का कर्ज नहीं होगा माफ
जिले के बैंकों से शासन को मिले डाटा के अनुसार प्रशासन को कर्जमाफी के लिए एक लाख 68 हजार 303 किसानों की लिस्ट मिली थी। जिला स्तर पर इनमें से एक लाख 64 हजार 823 किसानों को शामिल किया गया। इनमें आधार कार्ड से लिंक किसानों की संख्या 51 हजार 703 हैं, जबकि एक लाख 16 हजार 600 किसानों के आधार कार्ड नहीं हैं। कृषि उपनिदेशक आरपी चौधरी ने बताया कि पहली लिस्ट में शामिल किसानों को 15 अगस्त तक कर्जमाफी की सौगात मिल जाएगी। सत्यापन के दौरान उन किसानों को आउट किया जाएगा जो दूसरे प्रदेश में रहते हैं और उनकी जमीन जिले में है। शासन ने ऐसे किसानों को कर्जमाफी में शामिल नहीं किया है।
कोट्स
नए शासनादेश के मुताबिक शासन जिला कृषि अधिकारी की जगह बैंकों के नोडल अधिकारियों के केंद्रीयकृत खातों में धनराशि भेजेगा। 10 अगस्त तक 14,500 किसानों के सत्यापन का काम पूरा कर लिया जाएगा। जिसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को पात्र किसानों की सूची भेजी जाएगी। - एके सिंह, जिला कृषि अधिकारी