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मिलावट की बदसूरत तस्वीर को खूबसूरत बना रहा एल्युमीनियम
Updated Mon, 10 Jul 2017 11:15 PM IST
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नहीं थम रही मिलावट, 85 में 46 नमूने फेल
खाद्य सामग्री में मिलावट करने से मिलावटखोर बाज नहीं आ रहे हैं। फूड सेफ्टी विभाग द्वारा बीस दिन पूर्व जिले में अनेक स्थानों से सैंपल भरकर जांच के लिए भेजे गए 85 नमूनों में से 46 मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
जांच में आठ नमूने जहां अनसेफ मिले, वहीं 36 नमूने अधोमानक पाए गए। दो नमूनों में मिस ब्रांडिंग का मामला सामने आया। विभाग संबंधितों के खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी कर रहा है।
फूड सेफ्टी विभाग ने नमूनों की प्रयोगशाला में हुई जांच के आधार पर जिले में चल रही मिलावट की डर्टी पिक्चर का खुलासा किया है। जांच में पाया गया है कि रसगुल्ला, आइसक्रीम, मटर नमकीन, लड्डू को चटक रंग देकर खूबसूरत बनाने के लिए रासायनिक रंगों का इस्तेमाल किया गया।
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जिले में लगभग 4.48 लाख परिवारों में रोजना दूध का इस्तेमाल होता है। मासूम बच्चों की सेहत भी दूध की गुणवत्ता पर टिकी है। लेकिन इस बार हुई जांच में दूध के 17 नमूने शुद्धता की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए।
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूध में किस स्तर पर मिलावट का धंधा फलफूल रहा है। बर्फी को चमकदार बनाने के लिए सिल्वर फॉइल के बजाय एल्युमीनियम फॉइल का इस्तेमाल किया गया।
नमकीन, रस्क, छाछ, आइसक्रीम के नमूने अधोमानक निकले हैं। इसके अलावा आइसक्रीम के तीन नमूनों में रासायनिक रंग पाए गए। डीओ ने बताया कि 20 दिन पूर्व नमूने जांच को प्रयोगशाला भेजे गए थे। नमूने बुलंदशहर, खुर्जा, सिकंदराबाद, स्याना, अनूपशहर और शिकारपुर तहसील क्षेत्र से उठाए गए थे।
50 फीसदी नमूने फेल
डेजिगनेटिड अफसर फूड सेफ्टी विभाग डा. गौरी शंकर ने बताया कि फूड सेफ्टी का प्रभावी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसी का ही कारण है कि अब जिले में 50 फीसदी नमूने फेल आ रहे हैं। ऐसा निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई के चलते संभव हुआ है।
100 दिन में दूध के लिए 45 नमूने
मुख्य फूड सेफ्टी अधिकारी कुंवर मनोज कुमार ने बताया कि फूड सेफ्टी विभाग ने 100 दिन में दूध के 45 नमूने लिए। 2000 लीटर दूध को नष्ट कराया गया।
33 स्थानों पर छापेमार कार्रवाई भी की गई। विशेष रूप से अभियान मिलावटी दूध की बिक्री और उत्पादन रोकना था। जगह जगह कैंप लगाकर 485 व्यापारियों ने जागरूक भी किया गया।
वर्जन
आठ नमूने अनसेफ और 38 नमूने अधोमानक व मिस ब्रांड पाए गए हैं। अनसेफ मामले में वाद सिविल कोर्ट में दायर किया जाएगा। अधोमानक मामले एडीएम न्याययिक की कोर्ट में दायर कराए जाएगे। फिलहाल नोटिस की कार्रवाई कर दी गई है।
- डा. गौरीशंकर, डेजिगनेटिड अफसर, फूड सेफ्टी
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खाद्य सामग्री में मिलावट करने से मिलावटखोर बाज नहीं आ रहे हैं। फूड सेफ्टी विभाग द्वारा बीस दिन पूर्व जिले में अनेक स्थानों से सैंपल भरकर जांच के लिए भेजे गए 85 नमूनों में से 46 मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
जांच में आठ नमूने जहां अनसेफ मिले, वहीं 36 नमूने अधोमानक पाए गए। दो नमूनों में मिस ब्रांडिंग का मामला सामने आया। विभाग संबंधितों के खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी कर रहा है।
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फूड सेफ्टी विभाग ने नमूनों की प्रयोगशाला में हुई जांच के आधार पर जिले में चल रही मिलावट की डर्टी पिक्चर का खुलासा किया है। जांच में पाया गया है कि रसगुल्ला, आइसक्रीम, मटर नमकीन, लड्डू को चटक रंग देकर खूबसूरत बनाने के लिए रासायनिक रंगों का इस्तेमाल किया गया।
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जिले में लगभग 4.48 लाख परिवारों में रोजना दूध का इस्तेमाल होता है। मासूम बच्चों की सेहत भी दूध की गुणवत्ता पर टिकी है। लेकिन इस बार हुई जांच में दूध के 17 नमूने शुद्धता की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए।
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूध में किस स्तर पर मिलावट का धंधा फलफूल रहा है। बर्फी को चमकदार बनाने के लिए सिल्वर फॉइल के बजाय एल्युमीनियम फॉइल का इस्तेमाल किया गया।
नमकीन, रस्क, छाछ, आइसक्रीम के नमूने अधोमानक निकले हैं। इसके अलावा आइसक्रीम के तीन नमूनों में रासायनिक रंग पाए गए। डीओ ने बताया कि 20 दिन पूर्व नमूने जांच को प्रयोगशाला भेजे गए थे। नमूने बुलंदशहर, खुर्जा, सिकंदराबाद, स्याना, अनूपशहर और शिकारपुर तहसील क्षेत्र से उठाए गए थे।
50 फीसदी नमूने फेल
डेजिगनेटिड अफसर फूड सेफ्टी विभाग डा. गौरी शंकर ने बताया कि फूड सेफ्टी का प्रभावी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसी का ही कारण है कि अब जिले में 50 फीसदी नमूने फेल आ रहे हैं। ऐसा निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई के चलते संभव हुआ है।
100 दिन में दूध के लिए 45 नमूने
मुख्य फूड सेफ्टी अधिकारी कुंवर मनोज कुमार ने बताया कि फूड सेफ्टी विभाग ने 100 दिन में दूध के 45 नमूने लिए। 2000 लीटर दूध को नष्ट कराया गया।
33 स्थानों पर छापेमार कार्रवाई भी की गई। विशेष रूप से अभियान मिलावटी दूध की बिक्री और उत्पादन रोकना था। जगह जगह कैंप लगाकर 485 व्यापारियों ने जागरूक भी किया गया।
वर्जन
आठ नमूने अनसेफ और 38 नमूने अधोमानक व मिस ब्रांड पाए गए हैं। अनसेफ मामले में वाद सिविल कोर्ट में दायर किया जाएगा। अधोमानक मामले एडीएम न्याययिक की कोर्ट में दायर कराए जाएगे। फिलहाल नोटिस की कार्रवाई कर दी गई है।
- डा. गौरीशंकर, डेजिगनेटिड अफसर, फूड सेफ्टी