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Bulandshahar News: आरटीई में चयनित 1459 छात्रों ने नहीं कराया निजी स्कूलों में प्रवेश
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बुलंदशहर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत वर्ष 2025-26 के लिए चयनित 5621 बच्चों के सापेक्ष अब तक मात्र 4162 बच्चों ने ही दाखिला लिया है। 1459 बच्चों ने निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं कराया है। अधिकारियों के अनुसार स्कूल पसंद न होने पर अभिभावकों ने प्रवेश नहीं कराया।
सत्र 2025-26 के लिए चार चरणों में कुल आठ हजार से अधिक बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किए थे। इनमें से विभिन्न कारणों से करीब 500 बच्चों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। 5621 बच्चों का चयन किया गया था। इनमें से 4162 बच्चों का अब तक अलग-अलग स्कूलों में प्रवेश कराया जा चुका है। शेष 1459 बच्चों का अभी तक प्रवेश नहीं हो सका है।
आरटीई के तहत चयनित बच्चों को शासन की तरफ से निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। उन्हें कॉपी-किताब, यूनिफार्म आदि के लिए अभिभावकों के बैंक खातों में पांच हजार रुपये की धनराशि भेजी जाती है। इसके साथ ही निजी विद्यालयों को प्रति बच्चा साढ़े चार सौ रुपये महीने के हिसाब से फीस का भुगतान किया जाता है। फीस विद्यालय संचालक के खाते में भेजी जाती है।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी डाॅ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि प्रवेश से वंचित बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि जिन स्कूलों में उनके बच्चे का प्रवेश होना था। उन्हें वह स्कूल पसंद नहीं है। वहां वह पढ़ाना नहीं चाहते हैं।
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सत्र 2025-26 के लिए चार चरणों में कुल आठ हजार से अधिक बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किए थे। इनमें से विभिन्न कारणों से करीब 500 बच्चों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। 5621 बच्चों का चयन किया गया था। इनमें से 4162 बच्चों का अब तक अलग-अलग स्कूलों में प्रवेश कराया जा चुका है। शेष 1459 बच्चों का अभी तक प्रवेश नहीं हो सका है।
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आरटीई के तहत चयनित बच्चों को शासन की तरफ से निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। उन्हें कॉपी-किताब, यूनिफार्म आदि के लिए अभिभावकों के बैंक खातों में पांच हजार रुपये की धनराशि भेजी जाती है। इसके साथ ही निजी विद्यालयों को प्रति बच्चा साढ़े चार सौ रुपये महीने के हिसाब से फीस का भुगतान किया जाता है। फीस विद्यालय संचालक के खाते में भेजी जाती है।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी डाॅ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि प्रवेश से वंचित बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि जिन स्कूलों में उनके बच्चे का प्रवेश होना था। उन्हें वह स्कूल पसंद नहीं है। वहां वह पढ़ाना नहीं चाहते हैं।