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युवा बोले- रोजगार पहली जरूरत, भर्तियों के खोखले दावे न हों
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चर्चा करते विद्यार्थी। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। अमर उजाला संवाद में एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज के छात्र छात्राओं ने रोजगार के मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। बीएड संकाय के विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर में संवाद के दौरान कहा कि युवाओं को सबसे बड़ी जरूरत रोजगार की है। कई बार वेकेंसी नहीं निकलती तो कई बार इतनी उलझाऊ प्रक्रिया हो जाती है कि नौकरी नहीं मिल पाती।
सहसवान निवासी छात्र राजीव कुमार ने कहा कि 2019 में पहला वोट डाला था। इस बार विधानसबा में पहली बार मतदान करेंगे। कहा कि रोजगार बड़ी समस्या है। युवाओं के लिए पढ़ाई और प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद नौकरी नहीं मिल रही यह दुखदायी स्थिति है। कोई पार्टी की सरकार बने, इस बारे में सोचना चाहिए।
- खेड़ा जलालपुर निवासी छात्र रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि कई भर्तियां काफी समय से लंबित हैं। सरकार की प्राथमिकता हो कि इन भर्तियों का निस्तारण जल्दी किया जाए। लेखपाल की भर्ती के लिए अभी तक नोटिफिकेशन ही जारी नहीं हो सका है। आचार संहिता लगी तो सब ठप हो जाएगा।
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- शहर की प्रोफेसर कॉलोनी निवासी वंदना तिवारी का कहना है कि न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत सरकार हर साल नई नौकरियां देने का वादा कर रही है। तमाम लोग हाल ही में पेट की पात्रता परीक्षा पास करके बैठे हैं पर दावों के मुताबिक नौकरी नहीं निकाली जा रहीं। सपा सरकार में भी ऐसा ही हाल था। तब कोर्ट के स्तर से तमाम मामलों में खामी मिलने पर भर्ती रद्द कर दी गईं। पारदर्शिता सरकार रखे, युवा क्यों परेशान हों।
- चूना मंडी निवासी गौरी गुप्ता ने कहा कि कई बार लंबे समय तक भर्ती नहीं निकलती। निकलती है तो रिजल्ट नहीं आता। कभी परीक्षा रद्द कर दी जाती है। ऐसी बातों से युवा भ्रमित और निराश होते हैं। रोजगार इस चुनाव में भी बड़ा मुद्दा बनकर सामने आएगा। युवाओं को भी वोट देते समय दल और प्रत्याशी की भावनाओं को परखना होगा।
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सहसवान निवासी छात्र राजीव कुमार ने कहा कि 2019 में पहला वोट डाला था। इस बार विधानसबा में पहली बार मतदान करेंगे। कहा कि रोजगार बड़ी समस्या है। युवाओं के लिए पढ़ाई और प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद नौकरी नहीं मिल रही यह दुखदायी स्थिति है। कोई पार्टी की सरकार बने, इस बारे में सोचना चाहिए।
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- खेड़ा जलालपुर निवासी छात्र रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि कई भर्तियां काफी समय से लंबित हैं। सरकार की प्राथमिकता हो कि इन भर्तियों का निस्तारण जल्दी किया जाए। लेखपाल की भर्ती के लिए अभी तक नोटिफिकेशन ही जारी नहीं हो सका है। आचार संहिता लगी तो सब ठप हो जाएगा।
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- शहर की प्रोफेसर कॉलोनी निवासी वंदना तिवारी का कहना है कि न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत सरकार हर साल नई नौकरियां देने का वादा कर रही है। तमाम लोग हाल ही में पेट की पात्रता परीक्षा पास करके बैठे हैं पर दावों के मुताबिक नौकरी नहीं निकाली जा रहीं। सपा सरकार में भी ऐसा ही हाल था। तब कोर्ट के स्तर से तमाम मामलों में खामी मिलने पर भर्ती रद्द कर दी गईं। पारदर्शिता सरकार रखे, युवा क्यों परेशान हों।
- चूना मंडी निवासी गौरी गुप्ता ने कहा कि कई बार लंबे समय तक भर्ती नहीं निकलती। निकलती है तो रिजल्ट नहीं आता। कभी परीक्षा रद्द कर दी जाती है। ऐसी बातों से युवा भ्रमित और निराश होते हैं। रोजगार इस चुनाव में भी बड़ा मुद्दा बनकर सामने आएगा। युवाओं को भी वोट देते समय दल और प्रत्याशी की भावनाओं को परखना होगा।