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Budaun News: तीरंदाजी में हुनर निखार रहे युवा
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जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में तीरंदाजी में निशाना साधता बालक। स्रोत-स्वयं
बदायूं। बैडमिंटन के स्थान पर अब तीरंदाजी को एक जिला एक खेल में चयनित कर तीस बच्चों को चुना गया है। उन्हें खेल प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में वे तीरंदाजी में नाम रोशन कर सकें, इसकी ही तैयारी है। स्टेडियम में हर रोज ढाई घंटे का अभ्यास कराया जा रहा है।
खेल निदेशालय की ओर से पहले एक जिला एक खेल के तहत बैडमिंटन को चुना गया था। कोच न मिलने और खिलाड़ियों की संख्या कम होने के कारण बदलाव की मांग जिले के खेल विभाग की ओर से की गई थी। इसके बाद में तीरंदाजी को चुना गया। तीरंदाजी में बदायूं जिले के उझानी में व्यक्तिगत स्तर पर एक कोच सिखाते थे और कुछ बच्चे रुचि ले रहे थे।
इसी को ध्यान में रखकर दिसंबर 2023 में तीरंदाजी खेल को मंजूरी मिली। साथ ही कोच के रूप में सोमेंद्र शर्मा को नियुक्त किया गया है। इनके द्वारा 15 वर्ष तक की आयु के 30 बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें 17 लड़के और 13 लड़कियां हैं। कोच के अनुसार यहां पर तीरंदाजी को युवा काफी पंसद कर रहे हैं। यहीं वजह है कि तीरंदाजी का खेल जिले में आते ही खिलाड़ी ट्रेनिंग लेने के लिए पहुंचने लगे थे। कोच के अनुसार कोचिंग लेने वाले बच्चों के लिए स्पोर्ट्स किट में एक जोड़ी ट्रैक्टर, टी शर्ट, हाफ निकर व जूते और तीरंदाजी की किट भी दी जा रही है। शाम को साढ़े तीन से साढ़े छह बजे तक अभ्यास कराया जाता है।
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तीरंदाजी में कशिश कर चुकी हैं जिले का नाम रोशन
उझानी निवासी कशिश खान बचपन से ही तीरंदाजी पसंद करती आ रही हैं। वह स्कूल में पढ़ाई करने के बाद उझानी में ही तीरंदाजी का अभ्यास करती थीं। इसके बाद में उन्होंने इसको अपना मुख्य खेल चुना और आगे बढ़ती गईं। कशिश ने तीरंदाजी में जिले का नाम प्रदेश स्तर पर रोशन किया। भारत तिब्बत सीमा पुलिस में खेल कोटे से नौकरी भी हासिल की, जो खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा में बन रही है।
सभी बच्चे मन लगाकर अभ्यास कर रहे हैं। कोच के द्वारा बच्चों को अभ्यास शाम साढ़े तीन बजे से छह बजे तक कराया जा रहा है। अगर कोई बच्चा 10 दिन तक लगातार गैरहाजिर रहता है तो उसका नाम कैंप से हटा दिया जाता है। साथ ही जो भी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, वह वापस ले ली जाती हैं। -अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ाधिकारी
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खेल निदेशालय की ओर से पहले एक जिला एक खेल के तहत बैडमिंटन को चुना गया था। कोच न मिलने और खिलाड़ियों की संख्या कम होने के कारण बदलाव की मांग जिले के खेल विभाग की ओर से की गई थी। इसके बाद में तीरंदाजी को चुना गया। तीरंदाजी में बदायूं जिले के उझानी में व्यक्तिगत स्तर पर एक कोच सिखाते थे और कुछ बच्चे रुचि ले रहे थे।
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इसी को ध्यान में रखकर दिसंबर 2023 में तीरंदाजी खेल को मंजूरी मिली। साथ ही कोच के रूप में सोमेंद्र शर्मा को नियुक्त किया गया है। इनके द्वारा 15 वर्ष तक की आयु के 30 बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें 17 लड़के और 13 लड़कियां हैं। कोच के अनुसार यहां पर तीरंदाजी को युवा काफी पंसद कर रहे हैं। यहीं वजह है कि तीरंदाजी का खेल जिले में आते ही खिलाड़ी ट्रेनिंग लेने के लिए पहुंचने लगे थे। कोच के अनुसार कोचिंग लेने वाले बच्चों के लिए स्पोर्ट्स किट में एक जोड़ी ट्रैक्टर, टी शर्ट, हाफ निकर व जूते और तीरंदाजी की किट भी दी जा रही है। शाम को साढ़े तीन से साढ़े छह बजे तक अभ्यास कराया जाता है।
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तीरंदाजी में कशिश कर चुकी हैं जिले का नाम रोशन
उझानी निवासी कशिश खान बचपन से ही तीरंदाजी पसंद करती आ रही हैं। वह स्कूल में पढ़ाई करने के बाद उझानी में ही तीरंदाजी का अभ्यास करती थीं। इसके बाद में उन्होंने इसको अपना मुख्य खेल चुना और आगे बढ़ती गईं। कशिश ने तीरंदाजी में जिले का नाम प्रदेश स्तर पर रोशन किया। भारत तिब्बत सीमा पुलिस में खेल कोटे से नौकरी भी हासिल की, जो खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा में बन रही है।
सभी बच्चे मन लगाकर अभ्यास कर रहे हैं। कोच के द्वारा बच्चों को अभ्यास शाम साढ़े तीन बजे से छह बजे तक कराया जा रहा है। अगर कोई बच्चा 10 दिन तक लगातार गैरहाजिर रहता है तो उसका नाम कैंप से हटा दिया जाता है। साथ ही जो भी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, वह वापस ले ली जाती हैं। -अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ाधिकारी