{"_id":"592c68314f1c1ba915bdbd84","slug":"wow-you-have-done-great-things","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाह, वैभव तुमने तो कमाल कर दिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाह, वैभव तुमने तो कमाल कर दिया
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Tue, 30 May 2017 12:08 AM IST
विज्ञापन
परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला
पांच अंक अपेक्षा से कम मिले, 10 वीं में भी जिला टॉपर रहा
आईएससी 12 वीं के जिला टॉपर वैभव राठौर ने अंकों की इतनी ऊंची छलांग लगाई कि वह बरेली मंडल के टॉपर बन गए। वैभव ने यह कामयाबी अंग्रेजी में अपेक्षा से पांच अंक कम लाकर भी हासिल कर ली। उनको अंग्रेजी में 93 अंक मिले हैं, जबकि 98 अंक मिलने की उम्मीद वह लगाए हुए थे। अगर ऐसा होता तो उनके रिजल्ट का कुल योग 97.75 फीसदी के बजाय 99 फीसदी अंक हो जाता। हालांकि उनको सीटीएस और पीईडी में 100-100 अंक हासिल हुए हैं। पीसीएम ग्रुप का वैभव सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन कर अपने मां-बाप का सपना पूरा करना चाहता है। वह 10 वीं की परीक्षा में भी जिला टॉपर रहा। सोमवार को रिजल्ट आने के बाद उसके परिवार वाले खुशी से झूम उठे। शहर के मोहल्ला सिविल लाइंस में एक्सिस बैंक के सामने रहने वाले वैभव राठौर ने बताया कि परीक्षा के समय उन्होंने आठ से 10 घंटे पढ़ाई की। उनके पिता ग्राम विकास अधिकारी हैं और और मां बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापिका हैं। मां टीचर होने के नाते रोजाना सुबह पढ़ने के लिए चार बजे जगा देतीं थीं। पढ़ाई के साथ उनकी रुचि फुटबाल खेलने में है। वैभव का कहना है कि सफलता के लिए सतत अध्ययन और आत्मविश्वास के अलावा लगन के प्रति समर्पण जरूरी है। वह अपनी कामयाबी का श्रेय मम्मी-पापा की प्रेरणा और शिक्षकों के मार्गदर्शन को देते हैं।
उनके स्कूल में शिक्षा की वैज्ञानिक पद्धति और शिक्षकों की मेहनत के परिणाम स्वरूप बेहतर नतीजे प्राप्त हुए हैं। बच्चों ने मेहनत की है इसलिए वह कामयाब हो सके हैं। इसे आगे भी बरकरार रखा जाएगा।
-फादर जॉर्ज फर्नांडिस, प्रिंसिपल, डीपॉल
विज्ञापन
आईएससी 12 वीं के जिला टॉपर वैभव राठौर ने अंकों की इतनी ऊंची छलांग लगाई कि वह बरेली मंडल के टॉपर बन गए। वैभव ने यह कामयाबी अंग्रेजी में अपेक्षा से पांच अंक कम लाकर भी हासिल कर ली। उनको अंग्रेजी में 93 अंक मिले हैं, जबकि 98 अंक मिलने की उम्मीद वह लगाए हुए थे। अगर ऐसा होता तो उनके रिजल्ट का कुल योग 97.75 फीसदी के बजाय 99 फीसदी अंक हो जाता। हालांकि उनको सीटीएस और पीईडी में 100-100 अंक हासिल हुए हैं। पीसीएम ग्रुप का वैभव सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन कर अपने मां-बाप का सपना पूरा करना चाहता है। वह 10 वीं की परीक्षा में भी जिला टॉपर रहा। सोमवार को रिजल्ट आने के बाद उसके परिवार वाले खुशी से झूम उठे। शहर के मोहल्ला सिविल लाइंस में एक्सिस बैंक के सामने रहने वाले वैभव राठौर ने बताया कि परीक्षा के समय उन्होंने आठ से 10 घंटे पढ़ाई की। उनके पिता ग्राम विकास अधिकारी हैं और और मां बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापिका हैं। मां टीचर होने के नाते रोजाना सुबह पढ़ने के लिए चार बजे जगा देतीं थीं। पढ़ाई के साथ उनकी रुचि फुटबाल खेलने में है। वैभव का कहना है कि सफलता के लिए सतत अध्ययन और आत्मविश्वास के अलावा लगन के प्रति समर्पण जरूरी है। वह अपनी कामयाबी का श्रेय मम्मी-पापा की प्रेरणा और शिक्षकों के मार्गदर्शन को देते हैं।
उनके स्कूल में शिक्षा की वैज्ञानिक पद्धति और शिक्षकों की मेहनत के परिणाम स्वरूप बेहतर नतीजे प्राप्त हुए हैं। बच्चों ने मेहनत की है इसलिए वह कामयाब हो सके हैं। इसे आगे भी बरकरार रखा जाएगा।
विज्ञापन
-फादर जॉर्ज फर्नांडिस, प्रिंसिपल, डीपॉल