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पिछले साल की मच्छरदानी इस बार बांटने की आई याद
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फरीदपुर सानी में मच्छरदानियों का वितरण करते अधिकारी। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। मलेरिया के लिहाज से अति संवेदनशील बदायूं में रविवार को विश्व मलेरिया दिवस औपचारिकताओं तक सीमित रह गया। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जगत ब्लॉक के गांव फरीदपुर सानी में कुछ परिवारों को मच्छरदानियों का वितरण जरूर किया। हालांकि, यह मच्छरदानी पिछले साल जिले को मिली थी। अब तक इनका वितरण भी नहीं हो सका है।
बरेली के लिहाज से बदायूं हाई रिस्क श्रेणी में है। जिले के पांच ब्लॉक के सौ से ज्यादा गांव हाई रिस्क श्रेणी में हैं। 2019 में इन गांवों में मच्छरजनित बीमारियों मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया ने कहर बरपाया था। इस दौरान जिले में 21 हजार से ज्यादा मलेरिया रोगी मिले थे। मलेरिया का सबसे ज्यादा प्रकोप जगत, म्याऊं, समरेर, सालारपुर और उसावां ब्लॉक के गांवों में रहा। हालात इतने खराब हो गए कि मलेरिया के प्रकोप के मामले में बदायूं प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा था। हालात पर काबू के लिए साल 2020 में शासन स्तर से मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम की मॉनीटरिंग की गई। मोटा बजट भी जिले को जारी किया गया। हालांकि, यह बजट देरी से मिला।
हर वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। रविवार को विश्व मलेरिया दिवस पर मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जगत ब्लॉक के गांव फरीदपुर सानी में कुछ परिवारों को एलएलआईएम मच्छरदानी का वितरण किया। औपचारिकता के तौर पर ग्रामीणों को मलेरिया के प्रति जागरूक किया गया।
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कोरोना के बीच धीमी हुई मलेरिया की जांच
मलेरिया विभाग गर्मियों का सीजन शुरू होने के साथ ही मलेरिया प्रभावित गांवों में लोगों की जांच शुरू कर देता है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण मलेरिया जांच की रफ्तार धीमी हो गई है। अब तक जिले में पीएफ मलेरिया के तीन मामले सामने आए हैं। हालांकि, पीबी मलेरिया के मामलों की बात करें तो यह ज्यादा हैं। जनवरी में पीबी मलेरिया के चार मामले मिले थे। फरवरी में संख्या बढ़कर 18 और मार्च में 35 हो गई। अप्रैल में अब तक मलेरिया के 42 नए मामले सामने आ चुके हैं।
दवाओं के छिड़काव को नहीं मिला मिट्टी का तेल
मलेरिया विभाग लगातार दवाओं के छिड़काव और फॉगिंग के लिए मिट्टी के तेल की मांग कर रहा है। डीएम के स्तर से भी शासन को खत लिखा जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी अब तक मिट्टी के तेल की आपूर्ति नहीं हो सकी है। पिछले वर्ष भी मिट्टी का तेल न मिलने के कारण मलेरिया प्रभावित गांवों में प्रभावी ढंग से फॉगिंग नहीं हो सकी थी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. हरदत्त कुमार ने बताया कि फॉगिंग समेत दवाओं के छिड़काव के लिए मिट्टी के तेल की डिमांड की गई है।
विश्व मलेरिया दिवस पर जगत ब्लॉक के गांवों में मच्छरदानियों का वितरण करने के साथ लोगों को जागरूक भी किया गया। 2019 के मुकाबले 2020 में मलेरिया पर काफी हद तक काबू हो गया था। इस बार भी अभी से अभियान चलाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण जांच आदि कुछ प्रभावित हो रही हैं। - डॉ. हरदत्त कुमार, डीएमओ
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बरेली के लिहाज से बदायूं हाई रिस्क श्रेणी में है। जिले के पांच ब्लॉक के सौ से ज्यादा गांव हाई रिस्क श्रेणी में हैं। 2019 में इन गांवों में मच्छरजनित बीमारियों मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया ने कहर बरपाया था। इस दौरान जिले में 21 हजार से ज्यादा मलेरिया रोगी मिले थे। मलेरिया का सबसे ज्यादा प्रकोप जगत, म्याऊं, समरेर, सालारपुर और उसावां ब्लॉक के गांवों में रहा। हालात इतने खराब हो गए कि मलेरिया के प्रकोप के मामले में बदायूं प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा था। हालात पर काबू के लिए साल 2020 में शासन स्तर से मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम की मॉनीटरिंग की गई। मोटा बजट भी जिले को जारी किया गया। हालांकि, यह बजट देरी से मिला।
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हर वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। रविवार को विश्व मलेरिया दिवस पर मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जगत ब्लॉक के गांव फरीदपुर सानी में कुछ परिवारों को एलएलआईएम मच्छरदानी का वितरण किया। औपचारिकता के तौर पर ग्रामीणों को मलेरिया के प्रति जागरूक किया गया।
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कोरोना के बीच धीमी हुई मलेरिया की जांच
मलेरिया विभाग गर्मियों का सीजन शुरू होने के साथ ही मलेरिया प्रभावित गांवों में लोगों की जांच शुरू कर देता है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण मलेरिया जांच की रफ्तार धीमी हो गई है। अब तक जिले में पीएफ मलेरिया के तीन मामले सामने आए हैं। हालांकि, पीबी मलेरिया के मामलों की बात करें तो यह ज्यादा हैं। जनवरी में पीबी मलेरिया के चार मामले मिले थे। फरवरी में संख्या बढ़कर 18 और मार्च में 35 हो गई। अप्रैल में अब तक मलेरिया के 42 नए मामले सामने आ चुके हैं।
दवाओं के छिड़काव को नहीं मिला मिट्टी का तेल
मलेरिया विभाग लगातार दवाओं के छिड़काव और फॉगिंग के लिए मिट्टी के तेल की मांग कर रहा है। डीएम के स्तर से भी शासन को खत लिखा जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी अब तक मिट्टी के तेल की आपूर्ति नहीं हो सकी है। पिछले वर्ष भी मिट्टी का तेल न मिलने के कारण मलेरिया प्रभावित गांवों में प्रभावी ढंग से फॉगिंग नहीं हो सकी थी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. हरदत्त कुमार ने बताया कि फॉगिंग समेत दवाओं के छिड़काव के लिए मिट्टी के तेल की डिमांड की गई है।
विश्व मलेरिया दिवस पर जगत ब्लॉक के गांवों में मच्छरदानियों का वितरण करने के साथ लोगों को जागरूक भी किया गया। 2019 के मुकाबले 2020 में मलेरिया पर काफी हद तक काबू हो गया था। इस बार भी अभी से अभियान चलाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण जांच आदि कुछ प्रभावित हो रही हैं। - डॉ. हरदत्त कुमार, डीएमओ