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Budaun News: पहले करा दिया काम, बाद में निकाला टेंडर, आरईएस में बड़े खेल की आशंका

Sun, 21 Jun 2026 01:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 01:02 AM IST
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Work executed first, tender issued later; suspicion of major irregularities in RES.
आईईएस विभाग की ओर से यह विज्ञापन निकाला गया।  संवाद
बदायूं। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) शासन के नियमों को ताक पर रखकर काम करा रहा है। इसका प्रमाण यह है कि विभाग ने पहले निर्माण कार्य शुरू करा दिया। जब अधिकांश काम पूरा हो गया, तब निविदा प्रक्रिया शुरू की गई। सीडीओ कार्यालय में करीब 5.16 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे कार्य में घोटाले की आशंका जताई जा रही है। मामले ने सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और वित्तीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) ने सीडीओ कार्यालय में मई के अंत में कार्य शुरू करा दिया था। ऐसे में सीडीओ कार्यालय के पास में बने स्टेनो के कमरे की दीवार को तोड़कर उसमें समाहित कर दिया गया। साथ ही पूरे में टाइल्स, फॉलसीलिंग, किबाड़, वायरिंग समेत अन्य काम कराए जा रहे हैं।
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कमरे में काम चलने की वजह से सीडीओ उपायुक्त स्वत: रोजगार के कक्ष में बैठ रही हैं। इस काम को पूरा करने के लिए एसईएस की ओर से तीन जून को मैनुअल निविदा की सूचना निकाली गई। इसमें विकास भवन में स्थित मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में मरम्मत कार्य करने के लिए 5.11 लाख रुपये का काम करना दर्शाया गया।
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विभाग की ओर से जारी निविदा की अंतिम तिथि 14 जुलाई निर्धारित की गई है। निविदा प्रक्रिया 15 जून से शुरू की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ठेकेदार का चयन ही नहीं हुआ था तो कार्य किसके आदेश पर और किस एजेंसी से कराया गया। हैरानी की बात यह है कि मौके पर करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

फिर किसके लिए निकली निविदा
सीडीओ कार्यालय में चल रहे कार्य का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। ऐसे में जानकारों का सवाल है कि जब निर्माण कार्य लगभग समाप्ति की ओर है, तो निविदा प्रक्रिया किसके लिए निकाली गई है। जो फर्म अभी काम कर रही है उसका पेमेंट किस निधि और किस प्रक्रिया के तहत होगा। वहीं जब यह टेंडर 14 जुलाई को खुलेगा, उसमें जिस फर्म का चयन होगा, उससे कहां कार्य कराया जाएगा। या बिना काम कराए ही धनराशि का बंदरबांट कर लिया जाएगा।

ऑनलाइन टेंडर छोड़ आखिर क्यों की मैनुअल प्रक्रिया
शासन ने भ्रष्टाचार और पक्षपात रोकने के लिए अधिकांश विभागों में ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू की हुई है। बावजूद इसके आरईएस द्वारा मैनुअल निविदा जारी किए जाने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा अधिक होती है, जबकि मैनुअल प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती है। वहीं यह काम अवस्थापना निधि से होगा, जबकि इस मद से निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता।

वर्क ऑर्डर से केवल 20 हजार
तक का ही हो सकता है काम
विभाग का तर्क है कि वह यह काम वर्क ऑर्डर के जरिए करा रहे हैं, जबकि वर्क ऑर्डर के जरिए कोई भी निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है। हालांकि अगर कोई काम कराया भी जाता है तो एक काम का एक ही वर्क ऑर्डर बनाया जा सकता है, जबकि कार्यालय में पांच लाख रुपये से अधिक का काम कराया जा रहा है।


सीडीओ कार्यालय में काम कराने के लिए टेंडर निकाला गया है। इसमें निविदाएं 14 जुलाई तक आमंत्रित की है। हालांकि वर्क ऑर्डर के तहत काम कराया जा रहा है। -राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग प्रखंड बदायूं


कोई भी विकास हो, वह नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। विकास भवन में आरईएस की ओर से निर्माण कराया जा रहा है। इसकी जांच कराई जाएगी। -अवनीश राय, डीएम

आईईएस विभाग की ओर से यह विज्ञापन निकाला गया।  संवाद

आईईएस विभाग की ओर से यह विज्ञापन निकाला गया।  संवाद

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