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Budaun News: बाढ़ में लकड़ी भीगी, सिलिंडर खत्म और खाना पकाने का संकट

Tue, 12 Aug 2025 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 12 Aug 2025 01:21 AM IST
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Wood got wet in the flood, cylinder finished and cooking crisis
सुनील।
उसहैत। प्रशासन ने चार दिन पहले बाढ़ प्रभावित लोगों को सूखी राहत सामग्री दी। अब लोगों के सामने संकट हैं कि वह खाना कैसे बनाए। बाढ़ में लकड़ी भीग गए और सिलिंडर खत्म हो गया। ऐसे में ग्रामीणों को भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा है।
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उसहैत क्षेत्र के गांव जटा, प्रेमी नगला, ठकुरी नगला में पानी घरों में घुस गया है। जटा गांव के चारों ओर पानी भर गया है। कई परिवार गांव छोड़कर सड़क किनारे गृहस्थी समेत पड़े हैं। वहां पर खुले में उनके सामने खाने का संकट है। पिछले दिनों प्रशासन ने राशन दिया लेकिन उसे पकाए कैसे। कई लोगों के पास सिलिंंडर नहीं है। जिनके पास हैं, वह खत्म हो गए हैं। लकड़िया गीली हैं। इसलिए खाना नहीं बना पा रहे हैं। कई परिवार अब तक गांव नहीं छोड़ा है। वह छतों पर रुके हुए हैं। उनके पास भी राशन सामग्री का संकट है। इसके अलावा पशुओं के सामने चारे का संकट है।
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प्रशासन ने बनाए शरणार्थी शिविर
प्रशासन की ओर से उच्च प्राथमिक स्कूल हजरतपुर, सुबोध का भट्टा दातागंज, जूनियर हाईस्कूल दातागंज, जीजीआईसी दातागंज, आईटीआई समरेर, नवीन मंडी स्थल दातागंज, उच्च प्राथमिक स्कूल कटरा शहादतगंज और समाज कल्याण स्कूल उसहैत को आश्रय स्थल बनाया है। बाढ़ प्रभावित गांवों से इसकी दूरी यहां से 30 किलोमीटर से भी अधिक है। इसलिए लोग वहां जाने का राजी ही नहीं हैं।
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गांव के चारों ओर पानी, कहां से लाए सब्जी व गैस
- प्रशासन ने गांव में एक बार राशन का वितरण किया। उसमें आटा, तेल, चीनी, नमक, माचिस आदि था। अब तो रसोई गैस आदि खत्म हो गई है। गांव के चारों ओर पानी भर जाने से यह टापू बना हुआ है। लकड़ी व गैस कैसे लाई जाए। भर पेट खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। मोटरबोट का घंटों इंतजार करना पड़ रहा है तब कहीं जाकर लोग कुछ आवश्यक सामना ला पा रहे हैं। - सुनील, प्रेमी नगला


खाना बनाने को लकड़ी भी नहीं
बाढ़ के चलते घर में पानी भर गया है। राशन और जानवरों का चारा और भूसा बर्बाद हो चुका है। जानवरों का पेट नहीं भर पा रहा है। खाना बनाने के लिए मिट्टी का बनाया गया चूल्हा ही काम कर पा रहा है। लकड़ी भीग जाने से खाना नहीं बना पा रही हैं। - सन्नो बेगम, जटा


कोट,

क्षेत्र में आठ आश्रय स्थल बनाए गए हैं। वहां पर करीब 18 हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। अभी किसी आश्रय स्थल में कोई शरणार्थी नहीं आया है। सभी बाढ़ प्रभावित लोगों को बता दिया गया है कि अगर मकान जर्जर हालत में है तो आश्रय स्थल में आकर शरण लें। खाद्य सामग्री वितरण का काम किया जा रहा है। - धर्मेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम दातागंज

सुनील।

सुनील।

सुनील।

सुनील।

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