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युवक पर ठेकेदार का कारिंदा होने का शक, क्रय केंद्र प्रभारी को क्लीनचिट
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उझानी (बदायूं)। गेहूं क्रय केंद्र पर किसान से वसूली का वीडियो वायरल होने के मामले में क्रय केंद्र प्रभारी के बयान के साथ ही जांच का भी पटाक्षेप हो गया। अभी हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि किसान से रुपयों की मांग करने वाला युवक सेंटर पर छह-सात दिन से किस आधार पर तौल करता रहा लेकिन युवक पर ठेकेदार का कारिंदा होने का शक बना हुआ है। सेंटरों पर अमूमन ठेकेदार या फिर उससे जुड़े लोगों की तौल कराने में अहम भूमिका रहती है। फिलहाल जांच के बाद एडीएम (वित्त एवं राजस्व) नरेंद्र बहादुर सिंह ने केंद्र प्रभारी को क्लीनचिट दे दी है।
कोतवाली क्षेत्र के ही एक गांव के निवासी किसान से गेहूं की तौल के नाम पर वसूली करने की मांग का वीडियो चार दिन पहले वायरल हुआ था। वीडियो वायरल होने के बाद एडीएम (वित्त एवं राजस्व) नरेंद्र बहादुर सिंह ने आरएफसी के क्रय केंद्र प्रभारी सत्यवीर सिंह समेत तीन लोगों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। बृहस्पतिवार को एडीएम के सामने प्रस्तुत होकर सेंटर इंचार्ज सत्यवीर सिंह ने बयान भी दर्ज करा दिया था। जांच में एक बात तो साफ हो गई है कि जिस दिन वीडियो बना, तब गेहूं क्रय केंद्र पर एक युवक के साथ क्रय केंद्र के मजदूर भी मौजूद थे। बावजूद इसके अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि रुपयों की मांग करने वाले युवक को क्रय केंद्र पर किसने बैठाया था। सूत्रों की मानें तो उसका पिछले कई दिनों तक तौल में हस्तक्षेप बना रहा था। मंडी के अधिकतर लोगों और क्रय केंद्र के मजदूरों को उसका नाम और पता भी मालूम है। युवक क्रय केंद्र पर लोडिंग-अनलोडिंग ठेकेदार से जुड़ा बताया जा रहा है। युवक पर पसोपेश के बीच क्रय केंद्र प्रभारी सत्यवीर सिंह को जांच में क्लीनचिट दे गई है। इंचार्ज सत्यवीर का कहना है कि जांच में युवक का भी पता लग जाएगा।
सरकारी और प्राइवेट के दाम में सवा रुपये प्रति क्विंटल का अंतर
उझानी। गेहूं क्रय केंद्र पर खरीद का मूल्य 1925 रुपया प्रति क्विंटल है तो मंडी में आढ़तों पर शुक्रवार को भी 18 सौ रुपया प्रति क्विंटल तक ही रेट पहुंच पाया। अच्छी गुणवत्ता का गेहूं तो आढ़तों पर 1800 रुपये तक ही बिका लेकिन दगीला और मध्यम दर्जे का गेहूं इससे 15-20 रुपये कम ही रहा। बताते हैं कि किसान आढ़तों पर इसलिए भी गेहूं बेचने को पहुंचते हैं कि उन्हें नकद भुगतान प्राप्त हो जाता है। जबकि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं पहुंचाने पर उन्हें भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में कुछ लोगों ने करीब 50 रुपया प्रति क्विंटल की कमीशन पर माल सेंटरों तक पहुंचाने का खेल शुरू कर दिया है। कमीशन पर काम करने वाले लोग अपने फायदे के साथ सेंटरों पर लोडिंग-अनलोडिंग का खर्चा भी उठा लेते हैं।
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वीडियो वायरल होने के मामले में आरएफसी के क्रय केंद्र के प्रभारी की भूमिका नहीं रही है। जांच में साफ हो गया है कि खरीद केंद्र पर किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। वीडियो में बाहरी तत्व बताए जा रहे हैं। - नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)
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कोतवाली क्षेत्र के ही एक गांव के निवासी किसान से गेहूं की तौल के नाम पर वसूली करने की मांग का वीडियो चार दिन पहले वायरल हुआ था। वीडियो वायरल होने के बाद एडीएम (वित्त एवं राजस्व) नरेंद्र बहादुर सिंह ने आरएफसी के क्रय केंद्र प्रभारी सत्यवीर सिंह समेत तीन लोगों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। बृहस्पतिवार को एडीएम के सामने प्रस्तुत होकर सेंटर इंचार्ज सत्यवीर सिंह ने बयान भी दर्ज करा दिया था। जांच में एक बात तो साफ हो गई है कि जिस दिन वीडियो बना, तब गेहूं क्रय केंद्र पर एक युवक के साथ क्रय केंद्र के मजदूर भी मौजूद थे। बावजूद इसके अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि रुपयों की मांग करने वाले युवक को क्रय केंद्र पर किसने बैठाया था। सूत्रों की मानें तो उसका पिछले कई दिनों तक तौल में हस्तक्षेप बना रहा था। मंडी के अधिकतर लोगों और क्रय केंद्र के मजदूरों को उसका नाम और पता भी मालूम है। युवक क्रय केंद्र पर लोडिंग-अनलोडिंग ठेकेदार से जुड़ा बताया जा रहा है। युवक पर पसोपेश के बीच क्रय केंद्र प्रभारी सत्यवीर सिंह को जांच में क्लीनचिट दे गई है। इंचार्ज सत्यवीर का कहना है कि जांच में युवक का भी पता लग जाएगा।
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सरकारी और प्राइवेट के दाम में सवा रुपये प्रति क्विंटल का अंतर
उझानी। गेहूं क्रय केंद्र पर खरीद का मूल्य 1925 रुपया प्रति क्विंटल है तो मंडी में आढ़तों पर शुक्रवार को भी 18 सौ रुपया प्रति क्विंटल तक ही रेट पहुंच पाया। अच्छी गुणवत्ता का गेहूं तो आढ़तों पर 1800 रुपये तक ही बिका लेकिन दगीला और मध्यम दर्जे का गेहूं इससे 15-20 रुपये कम ही रहा। बताते हैं कि किसान आढ़तों पर इसलिए भी गेहूं बेचने को पहुंचते हैं कि उन्हें नकद भुगतान प्राप्त हो जाता है। जबकि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं पहुंचाने पर उन्हें भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में कुछ लोगों ने करीब 50 रुपया प्रति क्विंटल की कमीशन पर माल सेंटरों तक पहुंचाने का खेल शुरू कर दिया है। कमीशन पर काम करने वाले लोग अपने फायदे के साथ सेंटरों पर लोडिंग-अनलोडिंग का खर्चा भी उठा लेते हैं।
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वीडियो वायरल होने के मामले में आरएफसी के क्रय केंद्र के प्रभारी की भूमिका नहीं रही है। जांच में साफ हो गया है कि खरीद केंद्र पर किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। वीडियो में बाहरी तत्व बताए जा रहे हैं। - नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)